मेरी तीन वर्षीय भांजी एकदम परी जैसी है। उसकी हंसी पूरे घर को चहका देती है। लेकिन कभी-कभी वह एकदम चिड़चिड़ी हो जाती है। ऐसे में वह पूरा घर सिर पर उठा लेती है। कभी-कभी उसे बहला-फुसला कर खुश कर दिया जाता है, लेकिन कभी पूरे परिवार को उसे संभालना मुश्किल हो जाता है। ऐसा कई महिलाओं की शिकायत भी होती होगी। एक बच्चे का व्यवहार कब एकदम अच्छा और एकदम बिगड़ जाए इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन बच्चे ऐसा क्यों करते हैं क्या आपने सोचा है? क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी का कहना है कि यह बच्चों का इमोशनल आउटबर्स्ट होता है, जिसे अमूमन माता-पिता समझ नहीं पाते। वे ऐसा क्यों करते हैं, इसके पीछे और क्या कारण है, क्या है उनका यह बिहेवियर आइए विस्तार से जानें।

क्या है टेंपर टैंटरम्स

temper tantrums

टेंपर टैंटरम्स बच्चों द्वारा दिखाने वाला इमोशनल आउटबर्स्ट होता है। उस समय बच्चा जिस परेशानी से गुजर रहा होता है, वह उसकी मन की भावनात्मक स्थित को दर्शाता है। उनके मन में किसी तरह का असंतोष इन चीजों को ट्रिगर करता है और वह गुस्से में, या चिड़चिड़ाहट के साथ व्यवहार करते हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चे शारीरिक रूप से अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करते हैं, जैसे वह कभी पैर पटकेंगे। कभी चिल्लाएंगे। चीजें फेकेंगे या फिर दूसरों को मारकर अपना अंसतोष जताते हैं।

क्या हो सकता है इसके पीछे का कारण

दो से चार वर्ष की उम्र के बच्चे अपनी लैंग्वेज स्किल को विकसित कर रहे होते हैं। वे नई-नई चीजों को सीख रहे होते हैं और ऐसे में अपनी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में असमर्थ होते हैं। उन्हें यह समझ नहीं आता कि वे इन चीजों से कैसे निपटें। वे क्या महसूस कर रहे हैं इससे भी अनजना रहते हैं। इसी कारण वह चीखकर या चिल्लाकर बातों को कहते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि उन्हें लगने लगता है कि उनके टैंट्रम्स से उनके काम हो जाएंगे, इसलिए वे ऐसा करते हैं। उन्हें लगता है कि अपनी बातें मनवाने या चीजों को मांगने का यह एक प्रभावी तरीका है।

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अपने बच्चों के ऐसे टैंट्रम्स से डील करना कभी-कभी बहुत मुश्किल हो जाता है। किन तरीकों से उन्हें संभालें आइए जानें।

समझने की कोशिश करें

understand your child

अपने बच्चों के अलग तरीके से व्यवहार के कारणों को समझने की कोशिश करें। जब आप उनके साथ समय बिताएं, तो उनके हाव-भाव से समझने की कोशिश करें कि आपका बच्चा क्यों परेशान है। बच्चों के लिए भावनाओं को समझना बहुत मुश्किल होता है, तो उन्हें व्यक्त करने की बात तो बहुत दूर है। उनके साथ खेलते हुए उनकी भावनाओं को समझें। उनके साथ जितना हो सके समय बिताएं।

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खुद का व्यवहार भी बदलें

हर बार अपने बच्चे को समझाने के लिए मारना-पीटना जरूरी नहीं है। इससे बच्चे और जिद्दी बन सकते हैं। उन्हें डराने या धमकाने से उन पर गलत प्रभवा पड़ सकता है। ऐसे समय में बच्चों पर इमोशन्स हावी रहते हैं और हो सकता है आपकी फटकार से वह इस आउटबर्स्ट से घुटता रहे है। शांत होने की बजाय और चिड़िचिड़ा हो जाए। इसलिए सबसे पहले अपने व्यवहार में बदलाव लाएं और बच्चों को प्यार से समझाएं।

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सही नियम बनाएं

make rules and stick to them

कई बार बच्चे जब पब्लिक प्लेस में टैंट्रम्स दिखाते हैं, तो शर्मिंदगी के कारण आप उनकी मनमानी पूरी होने देती हैं। ऐसा बिल्कुल न करें। जो नियम आपने घर पर बनाएं हैं उन्हीं को बाहर भी कायम रखें। अपने बच्चे को एक कोने में ले जाकर रोने दें, इससे उसके इमोशन्स बाहर निकलेंगे और वह शांत हो जाएगा। बच्चे की चिडचिड़ाहट खुद-ब-खुद कम हो जाएगी। वहीं अगर आपने घर में कोई नियम बनाया है, तो उसे सभी फॉलो करें। अगर आपने शाम को टीवी देखने के लिए मना किया है, तो पूरा परिवार भी उसे मानें और बच्चे को समझाएं।

हर बात को बढ़ाए बिल्कुल नहीं

कई बार ऐसा होता है कि बच्चे की छोटी छोटी बातों को आप खुद बड़ा बना देती हैं। अगर बच्चे ने गलती की है, तो आप उसे टोकती रहती हैं। ऐसा बिल्कुल न करें। अगर आपका बच्चा कुछ अच्छा कर रहा है, तो उसकी सराहना कीजिए। उनपर चीजें थोपने से अच्छा है, आप खुद उन चीजों करके उनमें वह आदत डालें। बच्चों को अटेंशन बहुत अच्छी लगती है, इसलिए उनके अच्छे कामों की चर्चा करें और ऐसे ही काम करते रहने के लिए प्रेरति करें।

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