अगर आपका लाडला 3-4 साल या उससे बड़ा है तो मुमकिन है कि आप उसकी हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी जरूरत का खयाल रखती होंगी। आप हमेशा यही सोचती होंगी कि अपने बच्चो को कैसे मेंटली स्ट्रॉन्ग और अपनी प्रॉब्लम्स को बेहतर तरीके से हैंडल करना सिखाएं। अगर बच्चा मानसिक रूप से स्ट्रॉन्ग है तो अपने सामने आने वाली चुनौतियों का बखूबी सामना कर सकता है, असफल होने पर दोबारा ट्राई करने के लिए उठ खड़ा हो सकता है। मानसिक रूप से मजबूत होने का अर्थ सिर्फ स्ट्रॉन्ग होना ही नहीं है, इसके मायने विनम्र होना और बड़ों की बात सुनना भी है। इसके लिए आप तीन स्टेप उठाट सकती हैं। पहला उनके नेगेटिव विचारों की जगह पॉजिटिव विचार रखिए, उन्हें अपने इमोशन्स पर कंट्रोल करना सिखाइए और उन्हें बताइए कि पॉजिटिव तरीके से एक्शन कैसे लिया जाता है। आइए ऐसे ही कुछ तरीकों के बारे में जानते हैं, जिनसे आप अपने बच्चे को निडर, साहसी और आत्मविश्वासी बना सकती हैं-

स्किल्स की ट्रेनिंग दें

बच्चों को गलती करने पर सजा देने के बजाय अगली बार बेहतर करने के लिए हौसला बढ़ाएं। बच्चों को प्रॉब्लम सॉल्विंग, इंपल्स कंट्रोल और सेल्फ डिसिप्लिन जैसे स्किल्स सिखाएं। इससे किसी तरह के प्रवोकेटिव बिहेवियर होने, मुश्किल स्थितियों और असफलता में भी पॉजिटिव तरीके से रिएक्ट करना सीख जाएंगे। 

गलती से सीख लेते हैं बच्चे

अक्सर बच्चों के गलती करने पर पेरेंट्स उन्हें डांटने लगते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं करें। बच्चे को सिखाएं कि सीखने में गलतियां हो जाती हैं, इसीलिए उससे शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है। अगर वे सुरक्षित माहौल में हैं तो उन्हें गलती करने पर उसका नतीजा देखने दें। उन्हें प्रेरित करें कि अगली बार वे उस गलती को ना दोहराएं। 

preparing children for unforesceen inside

हेल्दी सेल्फ टॉक

बच्चे अगर बुरे के बारे में सोचेंगे और बुरी चीजों की भविष्यवाणी करेंगे तो वे मेंटली स्ट्रॉन्ग नहीं हो पाएंगे, ऐसे में प्रैक्टिकल तरीके से बच्चे को नेगेविट थॉटस को रीफ्रेम करना सिखाएं। मसलन अगर बच्चा कोई बुरा सपना देखकर रो रहा है तो उसे आप बता सकती हैं कि वह अपनी किसी मनपसंद चीजे के बारे में सोचे, मसलन बर्थडे पार्टी, आउटिंग या फिर किसी तरह के गेम के बारे में, वह मन में जैसा सोचेगा, उसे उसी तरह का सपना आएगा और फिर वह सपने में भी खुश रहेगा। 

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डर का सामना करना सिखाएं

अगर आपका बच्चा किसी चीज से डरता है तो वह असहज स्थितियों का मजबूती से सामना नहीं कर पाएगा। अगर आपका बच्चा किसी नए व्यक्ति, अंधेरे या नए स्थान से डरता है तो उसे एक-एक कदम आगे बढ़ने के लिए कहकर उसका उत्साह बढ़ाएं। उसके प्रयासों के लिए उसकी तारीफ करें। 

बच्चे का चरित्र निर्माण करें

बच्चे हेल्दी डिसिजन लें, इसके लिए जरूर है कि आप उन्हें वैल्यूज की परख कराएं। आप बच्चों को जो मूल्य देना चाहती हैं, उसके लिए कड़ी मेहनत करें। ऐसे मौके क्रिएट करें, जिनसे बच्चों को सीख मिले और नियमित रूप से वे वैल्यु बच्चे के दिमाग में रीइन्फोर्स हों। 

बच्चे को आभार जताना सिखाएं

आभार जताने से मन की नेगेटिविटी हट जाती है और बुरी आदतों से भी छुटकारा मिल जाता है। दुनिया में अच्छाई है, यह बात बच्चे के मन में डालें ताकि वह समय अच्छा ना होने पर भी वह खुद को मिली चीजों के लिए शुक्रगुजार रहे। इससे बच्चे का मूड अच्छा रहेगा और वह आगे बढ़कर अपनी समस्या का समाधान करना भी सीखेगा। 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

परवरिश इंस्टीट्यूट ऑफ पेरेंटिंस के फाउंडर और पेरेटिंग कोच शशांक ढांडा बताते हैं, 'बच्चे को ऐसा स्पेस देना जरूरी है कि वह बिना डर के, बिना झिझक के अपनी बात बता सके। बच्चे को कुछ समझाने से पहले उसकी फीलिंग और इमोशन एक्सेप्ट करना जरूरी है। बच्चे के लिए यह समझना कि उसके साथ क्या हुआ, यह भी क्रिटिकल है। किसी बच्चे को छोटी से छोटी बात भी बुरी लग सकती है और किसी बच्चे को शायद बड़ी बात भी उतनी बुरी ना लगे, बच्चा किस चीज पर कैसे रिएक्ट करेगा, इसके बारे में पहले से कुछ कहा नहीं जा सकता है। बच्चा जो कुछ देखे, उसे समझे और महसूस करे और उसके बारे में खुलकर आपको बता सके, इसके लिए आपको बच्चे को तैयार करना होगा। अगर वह आपको कुछ बता रहा है तो पहले पेशंस के साथ उसकी बात सुनें। बच्चा जब आपके साथ पूरी तरह से कंफर्टेबल रहेगा तो वह उसे खुद पर विश्वास महसूस होगा। ऐसे में वह ज्यादा अवेयर रहेगा और अपने आसपास किसी तरह की गलत गतिविधि पर आवाज भी उठा सकता है। आपको अपने बच्चे को बार-बार यह कहने की जरूरत है, 'तुम कमजोर नहीं हो, कुछ भी कर सकते हो।' यह बात बच्चे के सामने इतनी बार दोहराई जाए कि वह उसका खुश पर विश्वास जाग जाए। यह काम सबसे अच्छे तरीके से मम्मी-पापा और टीचर्स कर सकते हैं। 

 

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