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मेंटली स्ट्रॉन्ग होने के लिए पेशंस है बेहद जरूरी

अगर आप चाहती हैं कि हर हाल में खुद को स्ट्रॉन्ग रखें तो आपको अपने भीतर पेशंस यानी धैर्य विकसित करने की जरूरत है। इससे आप अपनी मंजिल को जल्द हासिल करने...
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Published -25 Jun 2018, 14:56 ISTUpdated -25 Jun 2018, 15:19 IST
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हर महिला चाहती है कि वह अपनी जिंदगी में खुश रहे, उसकी रिलेशनशिप अच्छी रहें और वे जो भी काम करे, उसमें उसे कामयाब मिले। ऐसा होने के लिए आपके अंदर पेशंस यानी धैर्य जरूर होना चाहिए। शायद आपको यह जानकर हैरानी हो कि आपकी तरह कई बॉलीवुड सेलेब्स ने अपनी हेल्थ और पर्सनल लाइफ से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया है और उन पर जीत हासिल की। दीपिका पादुकोण, मनीषा कोईराला, अनुष्का शर्मा और इलियाना डिक्रूज जैसी एक्ट्रेसेस खुद ये बात स्वीकार कर चुकी हैं कि एक समय में वे मानसिक बीमारियों से जूझते हुए परेशान हो गई थीं, लेकिन उन्होंने इस मुश्किल दौर में भी धैर्य बनाए रखा। 

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शिल्पा शेट्टी, काजोल और किरण राव जैसी एक्ट्रेसेस ने अपने बच्चों को खोने का गम सहा और फिर से पूरी मजबूती के साथ उठ खड़ी हुईं। अगर आप भी इन एक्ट्रेसेस की तरह खुद को मानसिक तौर पर मजबूत बनाना चाहती हैं तो जानिए कि आप किस तरह से अपने इंपेशंस को कंट्रोल कर सकती हैं-

गुस्सा करने पर उठाने पड़ते हैं नुकसान

जब हम परेशान होते हैं, गुस्सा करते हैं, दूसरों पर दोष मढ़ते हैं या उन्हें लज्जित करते हैं तो हम एक तरह के दुष्चक्र में फंसते चले जाते हैं। आमतौर पर यह एक तरह की परेशानी से शुरू होता है, हमें हर वक्त इस बात का अहसास होता है कि चीजें हमारे हिसाब से नहीं हो रहीं और फिर हम परेशान होती हैं। हमें इस बात का अहसास नहीं होता कि इस तरह मूड खराब होने पर हम लंबे वक्त तक उसी मेंटल स्टेट में रह जाते हैं, जिससे हमारा नुकसान ही होता है।

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दर्द से करें दवा की पहचान

अक्सर जब हम परेशानियों का हल खोजने की कोशिश करते हैं तो हमें कामयाबी नहीं मिलती, क्योंकि हम किसी दूसरे इंसान या परिस्थिति को बदलने की कोशिश कर रहे होते हैं, जबकि समस्या हमारे माइंडसेट में होती है। बाहरी चीज अच्छी है या बुरी, यह हमारी सोच पर निर्भर करता है। अपने भीतर पेशंस विकसित करने पर हमारी सोच का दायरा बढ़ जाता है, जिससे हमें हमारी मंजिल जल्द मिलने के आसार बढ़ते हैं। 

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दर्द बढ़ाने वाली मुश्किलों पर दे पाती हैं ध्यान

अक्सर हम तकलीफदेह बातों के बारे में बार-बार सोचती हैं और उसका सॉल्यूशन निकालने की कोशिश करती रहती हैं। इस दौरान हम उस तकलीफ को बार-बार महसूस करती हैं। इस समय में हमें अपने घावों को कुरेदने से ज्यादा कुछ नहीं मिलता। अगर आप ये सोचें कि इस तरह के विचार आने पर आपके भीतर कितना कुछ बदल जाता है तो आप खुद को इसमें जाने से बचा भी सकती हैं। अगर आप अपने भीतर पेशंस विकसित करें तो आप लंबे समय तक खुद को स्थिर रख सकती हैं और तकलीफदेह स्थितियों में डालकर खुद को बार-बार परेशान होने से बचा सकती हैं। 

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खुद से करें बात

कई बार जरूरत से ज्यादा सोचने की वजह से महिलाएं अपने लिए मुसीबतें बढ़ा लेती हैं। पति के ऑफिस जाने के बाद अगर दिन में पत्नी के लिए कॉल ना आए तो पत्नी खुद को इग्नोर फील करने लगती है, उसके मन में तरह-तरह के बुरे खयाल आने लगते हैं। लेकिन अगर वह ठंडे दिमाग से अपने पति के बारे में सोचती है तो उसे इस बात का अहसास जरूर होता है कि वह नाहक ही परेशान हो रही है और पति उसकी छोटी-छोटी जरूरतों का कितना खयाल रखता है। यह अहसास होने पर मन के भीतर पनपने वाली नेगेटिविटी खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है। 

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