टोक्यो ओलिंपिक की ट्रैक पर इंडियन स्प्रिन्टर दुती चंद ने निराश किया है। वह महिलाओं की 200 मीटर रेस के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाईं। हालांकि, हीट में दौड़ते हुए दुती चंद ने सीजन का अपना बेस्ट समय निकाला। बावजूद इसके वो सेमीफाइनल में जगह बनाने से चूक गईं।

प्रतिष्ठित ओलंपिक में इस वर्ष 18 स्पोर्ट्स कैटेगरी में 127 असाधारण एथलीट (रिजर्व सहित), 56 महिलाओं और 71 पुरुषों के साथ, टोक्यो, जापान में होने वाले ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। महिला बैच के एथलीटों में से एक दुती चंद हैं, स्पोर्ट्स वर्ल्‍ड में उनकी जर्नी ने कई स्पोर्ट्स उत्साही के साथ-साथ अन्य लोगों को भी इंस्‍पायर किया है। इसलिए, उनके उल्लेखनीय प्रेरक स्पोर्ट्स करियर और जर्नी का जश्न मनाने के लिए, हम यहां आप सभी को उनके बारे में बता रहे हैं।

कौन हैं दुती चंद?

achievements

दुती चंद ओडिशा के जाजपुर की रहने वाली एक पेशेवर धावक हैं। उनका जन्म 3 फरवरी, 1996 को हुआ था। ओडिशा की रहने वाले दुती चंद एक बुनकर परिवार से तालुक्क रखती हैं। उन्होंने अपनी बहन से प्रेरित होकर दौड़ना शुरू किया। लेकिन उन्होंने अपने जीवन के हर मोड़ पर कड़ी मुश्किलों का सामना किया है, फिर चाहे बात उनकी परवरिश को लेकर हो या हाइपरएंड्रोजेनिज़्म विवाद।

2013 में, चंद ने कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अपना लॉ कोर्स शुरू किया। इससे पहले उनके स्पोर्ट्स करियर ने उड़ान भरी थी। चंद वर्तमान में ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड में कार्यकारी अधिकारी हैं। इसके अलावा, प्रेरणादायक महिला देश में एक प्रतिष्ठित एलजीबीटीक्यू व्यक्ति भी है और पहली बार खुले तौर पर समलैंगिक एथलीट के रूप में खड़ी है।

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दुती के जीवन के संघर्ष

struggles in her life

  • उनकी प्रमुख समस्याएं तब शुरू हुईं, जब दुती चंद ने सार्वजनिक रूप से समलैंगिक संबंधों में समलैंगिक होने के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह एक समान सेक्स रिलेशनशिप में थीं। पूरे देश ने दुती चंद के इस साहस की सराहना की। हालांकि, उन्हें अपने घर और गांव चाका गोपालपुर में इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके परिवार, उनकी बहन और बाकी सभी लोगों ने दुती को उनके बयान के लिए परिवार से निकालने की धमकी दी।
  • इसके साथ ही, दुती के जीवन में एक और बड़ा विवाद तब हुआ, जब दुती चंद 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी कर रही थीं और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) ने अंतिम समय में उन्हें एथलेटिक्स से हटाने का फैसला किया। उस वक्त कहा गया कि हाइपरएंड्रोजेनिज़्म की वजह से उन्हें एक महिला एथलीट के तौर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अयोग्य करार दिया जाता है।
  • इसने चंद को महासंघ और खेल परिषदों के साथ बड़े पैमाने पर लड़ाई में उलझा दिया, जिसने उन्हें अस्वीकार कर दिया, जबकि दुनिया ने शासी मंचों के कार्यों की आलोचना की और इस असाधारण खिलाड़ी के समर्थन में खड़े हुए। विवाद के परिणामस्वरूप, उन्हें खेलों से निलंबित कर दिया गया और किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया।
  • बाद में यह मामला एक लंबी लड़ाई के बाद सुलझ गया। दुती चंद ने 2015 में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में अपील की थी, जिसके बाद उनपर लगा यह निलंबन हटा दिया गया था। चंद ने फिर से अपना खेल फिर से शुरू कर दिया।

दुती चंद का स्पोर्ट्स करियर

career of her in sports

2012 में 100 मीटर स्पर्धा में अंडर-18 वर्ग में राष्ट्रीय चैंपियन बनकर दुती चंद पहली बार सुर्खियों में आईं। इसके बाद, उन्होंने वर्ष 2013 में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिलाओं की 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। बाद में, उसी वर्ष, उन्होंने विश्व युवा चैंपियनशिप में भी प्रवेश किया और 100 और 200 मीटर दोनों में राष्ट्रीय खिताब हासिल किया।

उन्‍होंने एशियाई खेलों (2018), एशियाई चैंपियनशिप (2013, 2017, 2019), दक्षिण एशियाई खेलों (2016), समर यूनिवर्सियड (2019), आदि सहित कई अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

भले ही चंद ने सीधे ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं किया, लेकिन उनकी विश्व रैंकिंग ने उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में से एक का मार्ग प्रशस्त करने में मदद की और अब वह 100 मीटर और 200 मीटर स्पर्धाओं में टोक्यो ओलंपिक में धूम मचाती नजर आएंगी, जैसा कि विश्व स्तरीय धावक से बहुत कुछ देश उम्मीद कर रहा है।

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दुती चंद के कुछ रिकॉर्ड

  • दुती को अपने जीवन में जिन बाधाओं का सामना करना पड़ा, उनके बावजूद, उनकी प्रशंसा, उल्लेखनीय प्रतिभा और कड़ी मेहनत ने उन्‍हें सफल होने में मदद की।
  • वह वर्तमान में एक वैश्विक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं।
  • इसके साथ ही, वह ग्रीष्मकालीन ओलंपिक 2016 में 100 मीटर स्पर्धा के लिए क्वालीफाई करने वाली तीसरी भारतीय महिला हैं।
  • दुती ने नेपोली में 2019 के समर यूनिवर्सियाड में स्वर्ण पदक जीता। वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गईं, जिन्होंने किसी ग्लोबल मीट में यह कारनामा करने में कामयाबी हासिल की।
  • ओडिशा सरकार ने उन्हें एशियाई खेलों 2018 में रजत पदक जीतने के लिए 3 करोड़ रुपये दिए थे।

भले ही कुछ लोगों को दुती चंद के निजी जीवन को स्वीकार करने में मुश्किल होती हो, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि स्प्रिंटर दुती चंद भारत की सबसे बेहतरीन स्प्रिंटर हैं।

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