1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे मनाया जाता है। पूरी दुनिया में इस बीमारी को लेकर लोगों को जागरुक करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यकीन मानिए इस बीमारी को लेकर कई मिथकों पर लोग यकीन करते हैं। एड्स के मरीज़ों के साथ तो कई जगह पर ऐसा व्यवहार किया जाता है कि उन्हें अछूत मान लिया जाता है। एड्स जैसी बीमारी घातक होती है और लोगों के लिए जिंगदी भर का दुख बन जाती है। इस बीमारी के कारण कई लोग अपनी जिंदगी खो देते हैं, तो कई परिवार टूट जाते हैं। लेकिन इस बीमारी के मरीज़ों को लोगों के साथ की जरूरत होती है। वर्ल्ड एड्स डे पर हम बात करते हैं ऐसे मिथकों की जिनपर किसी को यकीन नहीं करना चाहिए।  

1. मिथक: किसी को HIV हो गया तो वो कुछ ही दिनों में मर जाएगा 

यकीन मानिए ऐसा कई लोग मानते हैं। Centers for Disease, Control, and Prevention अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 36.7 मिलियन लोग HIV के साथ जी रहे हैं और इस वायरस से रोज़ाना लड़ रहे हैं। अगर किसी के शरीर में HIV वायरस एक्टिव हो गया है तो मुमकिन है कि उसे सही दवाओं के साथ खुशहाल जिंदगी जीने का मौका मिले। इसके लिए antiretroviral therapy (ART) ट्रीटमेंट इस्तेमाल होता है। 

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2. मिथक: किसी को देखकर आप बता सकते हैं कि उसे एड्स है 

ये बिलकुल गलत है और अगर कोई इंसान HIV के संपर्क में आता है तो उसके शरीर में जो लक्षण होते हैं वो लगभग नजरअंदाज़ किए जा सकते हैं। HIV इन्फेक्शन के साथ जो लक्ष्ण होते हैं वो किसी सर्दी-खांसी के लक्ष्णों जैसा ही होता है। साथ ही शुरुआती चीज़ें सिर्फ कुछ हफ्तों तक ही दिखती हैं। आपका स्वास्थ्य बिगड़ेगा और फिर ठीक होने लगेगा।  

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3. मिथक: HIV छूने से फैलता है 

इस मिथक को लेकर तो बाकायदा सरकार ने विज्ञापन बनाया है और बताया है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। HIV न ही छूने से फैलता है, न ही आंसू, थूंक, पसीने या यूरीन के जरिए। तो अगर आप एक ही जैसा टॉयलेट इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें छू रहे हैं, एक ही जगह से पानी ले रहे हैं, एक ही बर्तन में खाना खा रहे हैं तब भी HIV नहीं फैलेगा। सबसे ज्यादा दिक्कत खून से होती है।  

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4. मिथक: गे और लेस्बियन लोगों को एड्स होता है 

ये बिलकुल गलत है। स्ट्रेट लोग भी इसके संपर्क में आ सकते हैं। सच तो ये है कि ये किसी भी तरह के असुरक्षित यौन संबंध से फैल सकता है।  

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5. मिथक: AIDS और HIV पूरी तरह से ठीक हो सकता है 

Antiretroviral drugs यानी ART ट्रीटमेंट यकीनन ऐसे मरीज़ों की समस्या कम कर देगा। उन्हें लंबे समय तक जिंदा रखेगा और उन्हें साधारण जिंदगी जीने में मदद करेगा, लेकिन ये ड्रग्स काफी महंगा होता है और कुछ लोगों में इसके साइड इफेक्ट्स भी देखे गए हैं। इसी के साथ, अभी तक ऐसी कोई दवाई नहीं बनी जो इसे पूरी तरह से ठीक कर सके।  

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6. मिथक: HIV पॉजिटिव लोग आसानी से माता-पिता नहीं बन सकते

ऐसा नहीं है अगर किसी महिला को HIV है तो भी वो अपने आने वाले शिशु को इस बीमारी से बचा सकती है। वो ART ट्रीटमेंट ले सकती है। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी ये सुरक्षित है, हालांकि कब और कैसा डोज लेना है वो लोगों को डॉक्टरी सलाह के बाद पता करना चाहिए। अगर ट्रीटमेंट सही लिया तो 1% से भी कम चांस रह जाएगा । अगर किसी पुरुष को HIV है तो उसे डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए और पहले ART ट्रीटमेंट लेना चाहिए उसके बाद ही उसे बच्चों के बारे में सोचना चाहिए। 

7. मिथक: HIV का मतलब आपको AIDS हो जाएगा

अक्सर ये मिथक लोगों के दिमाग में रहता है। AIDS काफी जानलेवा और खतरनाक है, लेकिन HIV के बाद भी लोग आम तरह से जिंदगी जी सकते हैं। HIV ऐसा इन्फेक्शन है जिससे AIDS होता है, लेकिन हर HIV मरीज को AIDS होगा ऐसा जरूरी नहीं है। किसी भी बीमारी का इलाज जल्दी किया जाए तो उसका असर शरीर पर कम हो जाता है ऐसे ही HIV इन्फेक्शन को ठीक तौर पर इलाज किया जाए तो इससे बचा जा सकता है।