आप आजाद खयाल हैं, नई सोच की हैं, कुछ कर दिखाने की तमन्ना रखती हैं। आपने पढ़ाई खूब मेहनत से की, कॉलेज में टॉप रैंकिंग स्टूडेंट्स में आप शुमार रहीं और अब आप एक अच्छी कंपनी के लिए काम कर रही हैं। लेकिन जब आपने शादी का फैसला लिया तो आपकी जिंदगी में बहुत से नए बदलाव आ गए, जिससे सामंजस्य बिठा पाना शायद आपके लिए शायद मुश्किल साबित हो रहा हो। मुमकिन है कि मैरिड लाइफ में तालमेल बिठाने में थोड़ी दिक्कत हो रही हो और इसका असर आपके कामकाज पर भी पड़ रहा हो। शादी के बाद आपकी जिंदगी में काफी बड़े बदलाव आते हैं। एडजस्टमेंट करते हुए और इन बदलावों को स्वीकार करते हुए ही आप आगे बढ़ सकती हैं। आइए रिलेशनशिप कोच पंकज दीक्षित से जानें कि आप कैसे अपनी नई-नवेली शादी और ऑफिशियल रेस्पॉन्सिबिलिटीज के बीच बैलेंस स्थापित कर सकती हैं-  

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पति के साथ बैठकर करें अहम बातों पर चर्चा

शादी के बाद एक-दूसरे को समझने के लिए आपको पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए। शुरुआती दौर में ही अगर आप इस बात पर चर्चा कर लें कि आप दोनों के लिए कौन-कौन सी चीजें महत्वपूर्ण हैं और आपके क्या हासिल करना चाहते हैं। अलग-अलग बैकग्राउंड से आने पर आपकी महत्वाकांक्षाओं में भी फर्क होगा, उसे समझते हुए एक दूसरे के लक्ष्यों को समझने की कोशिश करें।

अपने लक्ष्यों पर करें चर्चा

आपके शॉर्ट टर्म गोल क्या हैं, लॉन्ग टर्म गोल क्या हैं, इस पर विस्तार से चर्चा करनी चाहिए। इस पर बात करने से आपको स्पष्ट हो जाएगा कि आपको किस तरह से आपको अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ना है और उसके लिए कौन सा रास्ता चुनना है। हर कपल की स्थितियों के हिसाब से उनके लक्ष्य अलग-अलग होंगे। इन मुद्दों पर बात करने से आपको कई चीजों पर क्लेरिटी हो जाएगी और आपका रिश्ता भी इससे मजबूत होगा। 

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फाइनेंशियल गोल बनाएं

शादी के बाद फाइनेंस एक अहम मुद्दा बन जाता है। आपकी घर से जुड़ी जरूरतें और एस्पिरेशन्स पूरी करने के लिए पर्याप्त फाइनेंस होना बहुत जरूरी है। चाहें आपकी प्रायोरिटी घर खरीदने की हो या फिर गाड़ी खरीदने की, बच्चे की प्लानिंग कर रहे हों या फिर कुछ सालों में अपना बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हों, इन सब के लिए आपको इस बात का अंदाजा होना चाहिए कि आपको कितने पैसे चाहिए होगी। इन चीजों को ध्यान में रखने हुए हर पहलू पर अपने पति के साथ बात कर लें। 

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मैरिटल और वर्कलाइफ में ऐसे बनाएं बैलेंस 

भविष्य में आप अपने काम की दशा-दिशा क्या रखना चाहती हैं, इस पर भी शुरुआती दौर में ही बातचीत कर लेना अच्छा रहता है। अगर आप भविष्य में बिजनेस शुरू करना चाहती हैं, तो आपको एक्सपीरियंस, फाइनेंस और नेटवर्किंग इन तीनों चीजों की जरूरत पड़ेगी। इसके हिसाब से अपने लिए रणनीति तैयार करें। अगर आपकी जॉब में आपको परेशानी हो रही है या चीजें आपके अनुकूल नहीं हैं तो बदलने के लक्ष्य तय कर लें। काम से जुड़े लक्ष्य के हिसाब से ही अपनी पर्सनल लाइफ के गोल तय कर लें। यह सोच लें कि आप घर की जिम्मेदारियां किस-तरह से मिल-बांटकर निभाएंगे।

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अगर आप अपने लिए मुश्किल लक्ष्य तय करते हैं तो मुमकिन है कि शुरू-शुरू में आप दोनों को बहुत काम करना पड़े। यह भी संभव है कि आप दोनों को एक व्यक्ति की सैलरी से ही गुजारा करने की स्थिति हो। अपनी स्थितियों के अनुसार आप में से एक लाइटर रोल ले सकता है और दूसरा स्ट्रेटेजिकली बड़ा रोल ले सकता है। एक बार ये सोच लेंगे तो रणनीति के तहत काम करने में सफल होंगे। इससे आपके फैमिली के गोल भी तय हो जाएंगे और उन्हें अचीव करने के लिए भी आपको रास्ता मिल जाएगा। 

हर कुछ महीनों में आपको एसेसमेंट भी करने चाहिए कि आपके लक्ष्यों में बदलाव की जरूरत तो नहीं है। वर्क और फैमिली में, कई बार हसबैंड और कई बार वाइफ को ज्यादा रेस्पॉन्सिबिलिटी उठानी पड़ती है, ज्यादा मुश्किल उठानी पड़ती है, लेकिन आपको ओवरऑल फैमिली के गोल के हिसाब से चलना चाहिए। आपको हमेशा इस बात को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए कि आप जो भी कदम उठा रही हैं, उसके पीछे कारण क्या है। अगर आप स्थितियों की स्पष्ट समझ रखेंगी तो आपको मुश्किल लक्ष्य त्याग जैसे नहीं लगेंगे, बल्कि यह आपका एक सोचा-समझा फैसला होगा। 

त्याग की भावना आपके लिए सही नहीं 

महिलाएं बहुत ज्यादा इमोशनल होती हैं और इसी वजह से वे ऐसी जिम्मेदारियां उठाने के लिए हां कर देती हैं, जिनके कारण बाद में उन्हें बहुत तकलीफ होती है, मसलन नौकरी छोड़ देना या फिर परिवार के सदस्यों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी हॉबीज के लिए वक्त ना देना। महिलाओं को यह समझने की जरूरत है कि अपनी खुशियां त्यागने से उनकी लाइफ बेहतर नहीं होगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि सेक्रिफाइज करना हमेशा सस्टेनेबल नहीं रहता। अगर बाद में यह बात मन में रह जाती है तो लंबे दौर में इससे अच्छी फीलिंग नहीं आती, झगड़ा या कलह होने का अंदेशा रहता है। आज के समय में लेडीज कोफाइनेंशियल और इंडिविजुअल आइडेंटिटी लूज नहीं करनी चाहिए, क्योंकि स्थितियां कभी भी बदल सकती हैं। अगर कुछ अनहोनी हो जाए, तो आपमें इतना सामर्थ्य होना चाहिए कि अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। अगर एडजस्टमेंट करना है, तो फैमिली के साथ बैठकर करें और फैसला लें, लेकिन सेक्रिफाइज नहीं करें।