माता-पिता हमेशा किसी न किसी कारण अपने बच्‍चों को लेकर चिंतित रहते हैं। ज्‍यादातर माता-पिता अक्‍सर 1 से 5 साल तक के बच्‍चों को भूख ना लगने और सही ढंग से खाना नहीं खाने की अक्‍सर शिकायत करते हैं। माता-पिता के मुताबिक शुरू के 1 साल तक बच्‍चे का वजन 5-6 किलो तक बढ़ता है। इसलिए पहला साल पूरा होने तक उसका वजन 9-11 तक हो जाता है। लेकिन पहले साल के बाद 5 साल तक सिर्फ 2-3 किलो तक ही वजन हर साल बढ़ता है। इस उम्र में कई बार देखा जाता है कि बच्‍चे के वजन में 3-4 महीने तक कोई बदलाव नहीं आया है। तब माता-पिता को लगता है कि बच्‍चे की सही तरह से परवरिश नहीं हो रही है लेकिन ऐसा नहीं है क्‍योंकि इस उम्र में वह पहले साल की तरह नहीं बढ़ रहे होते हैं इसलिए उनकी भूख भी थोड़ी कम हो जाती है। इस घटना को फिजियोलॉजिकल एनोरोक्सिया कहते हैं। अगर आपके बच्‍चे को भी भूख नहीं लगती है तो इसके कारण और उपचार के बारे में निसर्ग हर्ब्‍स की आयुर्वेदिक एक्‍सपर्ट डॉक्‍टर आरती सोमण से विस्‍तार में जानें। 

आृमतौर पर बच्‍चे उतना ही भोजन करते हैं जितना उन्‍हें बढ़ने और एनर्जी के लिए आवश्‍यकता होती है। कई माता-पिताअपने बच्‍चों को जरूरत से ज्‍यादा खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश करते हैं। यहां तक कि कई माता-पिता अपने बच्‍चे को पूरा दिन फल, स्‍नैक्‍स या और अन्‍य कुछ खाने की आदत डालते हैं। इस वजह से जब खाने का समय होता है तब बच्‍चों को भूख नहीं लगती है। 

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हालांकि बच्‍चा जब खाने की मांग करे तभी उसे खाना देना चाहिए। उसे इस तरह प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि वह तब खाना मांगे जब इसकी जरूरत हो। माता-पिता को यह चिंता रहती है कि कम भूख के कारण शरीर में जरूरी विटामिन्‍स और मिनरल्‍स की कमी हो सकती है। लेकिन जबरदस्‍ती करवाए गए भोजन से बच्‍चों के शरीर में ना तो इसकी कमी पूरी होगी न वह इसे मन से खाना पसंद करेंगे।

एक बार जब आपका बच्‍चा चम्‍मच से खाना सीख जाता है तो मां-बाप को उसे जबरदस्‍ती कभी नहीं खिलाना चाहिए। अगर बच्‍चा भूखा होगा तो वह खुद से खाएगा। अगर आपके बच्‍चे का वजन और लंबाई उम्र के हिसाब से सामान्‍य है तो चिंता न करें क्‍योंकि छोटे बच्‍चों में भोजन की जरूरत कम होती है।

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भूख न लगने के कारण

लेकिन अगर बच्‍चा बड़ा है और उसे भूख कम लगती है, वह हमेशा थका हुआ और चिड़चिड़ा रहता है तो यह चिंता का विषय है। इसकी वजह बीमारी जैसे- पेट का फ्लू, बुखार, गले में खराश और दस्त हो सकती हैं। इसके अलावा कुछ अन्य कारण यह भी हो सकते हैं- 

  • तनाव- परिवार के मुद्दों से संबंधित तनाव या पढ़ाई में परेशानी होना।
  • अवसाद- अवसाद बच्‍चों की भूख को काफी हद तक प्रभावित करता है। 
  • एनोरेक्सिया नर्वोसा- खाने से संबधित मनोवैज्ञानिक परेशानी यानि आहार करने की इच्‍छा न होना। 
  • एनिमिया- एनिमिया से पीड़ित बच्‍चे सुस्‍त, थके और चिड़चिड़े होते हैं। 
  • पेट में कीड़े- कीड़े भूख की कमी, आंतों से खून बहना या सूजन, दस्‍त होना और पेचिश जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं। 
  • कब्‍ज- अनियमित शौच बच्चे की भूख को प्रभावित कर सकती है।
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भूख बढ़ाने का प्राकृतिक तरीका  

आपके बच्‍चे की भूख बढ़ाने के कई प्राकृतिक तरीके हैं, लेकिन कभी-कभी आपको भूख बढ़ाने वाली चीजों का इस्‍तेमाल करने की जरूरत होती है ताकि आपके बच्‍चे उतना ही खाएं जितना उनके शरीर को जरूरत है। भूख बढ़ाने वाले सप्‍लीमेंट का चयन करते समय आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रोडक्‍ट वास्‍तविक और अच्‍छी तरह से रिसर्च करके बनाया गया हो।

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उपरोक्त सभी पहलुओं को ध्‍यान में रखते हुए और आयुर्वेदिक औषधि पर गहराई से शोध करने के बाद भूख बढ़ाने और बच्‍चों में इम्‍यून सिस्‍टम को बढ़ाने में योगदान करने वाली औषधियां जैसे विडंग, बला, अनंतमूल, अश्‍वगंधा, कालमेध, मधुपर्णी, अतासी मिलाकर निसर्ग हर्ब्‍स से इम्‍यूटाइजर सिरप बनाया है जो हर्बल सप्‍लीमेंट है। इसके कोई साइड इफेक्‍ट्स नहीं हैं और यह भूख बढ़ाने के अलावा बच्‍चों में इम्‍यून‍ सिस्‍टम भी बढ़ाता है। बच्‍चों में इसका इस्‍तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित है।  

अगर आपके बच्‍चों को भी भूख नहीं लगती है तो यह इम्‍यूटाइजर सिरप आप भी उन्‍हें दे सकती हैं। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

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