मेनोपॉज के परिणामस्‍वरूप हार्मोनल परिवर्तन होते हैं जो ब्‍लैडर के कार्य को काफी प्रभावित कर सकते हैं। 

रजोनिवृत्ति मूत्राशय के नियंत्रण को कैसे प्रभावित करती है? 

हार्मोन के स्‍तर में उतार-चढ़ाव , खासतौर पर एस्‍ट्रोजन के स्‍तर में बदलाव के कारण वेजाइना और ब्‍लैडर की प्रक्रिया बहुत ज्‍यादा प्रभावित होती है। जैसे: 

  • श्रोणि क्षेत्र (Pelvis Region) कमजोर हो जाता है। ब्‍लैडर और Urethra  को सपोर्ट करने वाली मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे यूरीन को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। 
  • वेजाइनल टिशूज शुष्‍क और कम लोचदार हो जाते हैं। 
  • Urethra को कवर करने वाली लाइनिंग, मूत्राशय में पड़ा ट्यूब जो यूरीन को खाली करता है, उसकी स्‍टोरेज क्षमता को प्रभावित करता है। 
 
urine problem solution

मेनोपॉज के दौरान ब्‍लैडर में कौन सी समस्‍याएं हो सकती हैं? 

  • आग्रह को नियंत्रित करने में असमर्थ- यह एक अतिसक्रिय और परेशान करने वाले ब्‍लैडर का संकेत है, ऐसे में आपको अचानक और अप्रत्‍याशित यूरीन महासूस हो सकती है। कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आप वॉशरूम तक भी न पहुंच पाएं। यूरीन में दर्द और जलन से परेशान हैं तो कारण, लक्षण और बचाव के तरीके जान लें
  • तनाव असंयम- ऐसा भी हो सकता है कि जब आपके खांसते, हंसते या छींके वक्‍त यूरीन की कुछ बूंदे निकल जाएं। ऐसा तब भी हो सकता है जब आप किसी गतिविधि के दौरान आपके ब्‍लैडर पर दबाव पड़ता है। 
  • दर्दनाक यूरीन- कभी-कभी रजोनिवृत्ति होने के बाद महिलाओं को यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्‍शन हो जाए। इससे यूरीन के दौरान आप जलन महसूस कर सकती हैं। 
  • रात्रि आग्रह- सबसे ज्‍यादा रात के समय यूरीन आना। इस लक्षण की वजह से जिन महिलाओं को मेनोपॉज हो जाती है उन्‍हें अच्‍छी नींद भी नहीं आ पाती है। 
symptoms of menopause at

मनोपॉज के दौरान ब्‍लैडर की समस्‍याओं से निपटने के लिए आप क्‍या कर सकती हैं? 

लक्षणों के प्रकार के आधार पर आप सबसे अधिक ध्‍यान दें और समस्‍या से निपटने के लिए निम्‍न उपायों का सहारा लें। 

  • केगेल व्‍यायाम करने से आपकी पैल्विक मांसपेशियां बार-बार टाइट होती हैं और फिर रिलीज होती हैं। ऐसा आप यूरीन के दौरान कर सकती हैं। कुछ सेकेंड के लिए यूरीन के फ्लो को रोकें और फिर छोड़ दें। मगर, ऐसा ज्‍यादा न करें। इससे आपको संक्रमण भी हो सकता है। 
  • सोने से पहले तरल चीजों को सेवन कम करें- शाम के बाद तरल चीजों का सेवन कम से कम करें। क्‍योंकि इससे आपको रात के समय कई बार यूरीन लग सकती है। 
  • वज को नियंत्रित रखें- जितना शरीर का वजन होगा ब्‍लैडर पर उतना ही प्रेशर होगा। इस समस्‍या से निजात पाने के लिए अपने वजन को काबू में रखें। जानें PCOD के लक्षण, उपचार और प्रभाव
  • स्‍वस्‍थ पेय पदार्थ लें- ज्‍यादा चाय, कॉफी, सोडा और मादक पेय पदार्थों का सेवन करने से बचें। क्‍योंकि यह सारे पदार्थ ब्‍लैडर को कमजोर बनाते हैं और यूरीन को नियंत्रित करने की क्षमता को बाधित करते हैं। 

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  • निर्धारित दवा लें- यदि लक्षण गंभीर हैं, तो स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए डॉक्‍टर दवा लिख सकते हैं। 
  • सर्जरी- बहुत विकट परिस्थितियों में, डॉक्‍टर आपको ऐसे ऑपरेशन का विकल्‍प चुनने की सलाह दे सकते हैं जिसमें आपके ब्‍लैडर को Urethra के सपोर्ट के लिए लिफ्ट किया जाएगा। 

ब्‍लैडर की समस्‍याएं बहुत पेरशानी और जलन पैदा कर सकती हैं। ऐसे में यह सलाह दी जाती है कि आपको हर घंटे में एक बार वॉशरूम जाना चाहिए। यह आपके शरीर के बरदाश्त करने की क्षमता को बेहतर बनानो में मदद करेगा। 

एक्‍सपर्ट सलाह के लिए डॉ.बिस्वज्योति गुहा [एमडी (सीएएल) डीएफएफपी (यूके) एमआरसीओजी (लंदन) एफआईसीओजी] विशेष धन्यवाद।

संदर्भ:

https://www.webmd.com/urinary-incontinence-oab/womens-guide/bladder-control-menopause#3

https://www.womenshealth.northwestern.edu/blog/bladder-control-problems-during-menopause

https://www.verywellhealth.com/menopause-vaginal-urinary-tract-changes-3520881