पॉलसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम महिलाओं में बहुत ही आम बीमारी है। इसे पीसीओएस और पीसीओडी के नाम से भी जाना जाता है। पीसीओडी एक ऐसी समस्‍या है जो युवा महिलाओं और टीनेज लड़कियों में अलग-अलग अवस्‍था में पाई जाती है। टीनेज में पीसीओडी की समस्‍या को पहचानने से लेकर उसके उपचार तक के लिए एक अलग दृष्टिकोण अपनाने की आवश्‍यकता होती है। 

टीनेज लड़कियों में रिप्रोडक्टिव लाइफ (प्रजनन जीवन) का प्रारंभिक चरण होता है। इस अवस्‍था में यदि पीसीओडी हो जाए तो उसे शीघ्र पता लगाने और शीघ्र उपचार शुरू करना अती आवश्‍यक हो जता है ताकि इस समस्‍या की जड़ में पहुंच कर इसे खत्‍म किया जा सके। इस बीमारी से जुड़े लंबे समय तक होने वाले कॉम्प्लिकेशन और जोखिमों को दूर करने के लिए बहुत जरूर है कि लड़कियों द्ववारा रइस बीमारी को पहचान कर उसे रोकने के लिए सही उपचार और चिकित्‍सीय उपायों को अपनाया जाए। 

Hormonal imbalance

टीनेजर्स में पीसीओडी को कैसे पहचाना जाए  

युवा महिलाओं की ही तरह टीनेज लड़कियों में भी पीसीओडी को पहचानने का एक तरीका होता है। टीनेजर्स में पीसीओडी ओव्‍यूलेटरी मेकैनिजम और एंड्रोजन हार्मोंस की गणना पर निर्भर करता है। ओवुलेटरी डिसफंक्शन की गणना उन विशिष्ट लक्षणों के आधार पर की जा सकती है जिन्हें लड़कियां अनुभव कर सकतीी हैं। 

जैसे:

  • मासिक धर्म चक्र के पहले वर्ष में 90 दिनों से अधिक समय तक पीरियड्स का न होना । 
  • जब आपका मासिक धर्म चक्र 21 दिनों से कम या दो वर्षों तक लगातार 45 दिनों के चक्र में हो। 
  • स्‍तनों के आकार लेने के 2-3 साल बाद तक और 15 की उम्र तक भी अगर आपको पीरियड्स नहीं होते हैं तो भी आपको पीसीओडी हो सकता है। 
 

इसी तरह शरीर में अत्‍यधिक एंड्रोजन हार्मोन होने से भी शरीर में कुछ बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। 

जैसे: 

  • मुंहासे जो टॉपिकल थेरेपी (सामयिक चिकत्‍सा) के लिए अनरिसपॉन्सिव (अनुत्‍तरदायी) हों। 
  • चेहरे पर अत्‍यधिक बाल होना। 
  • रक्‍त में टेस्‍टोस्‍टेरोन का बढ़ता स्‍तर। 
Polycystic ovarian syndrome

यदि आपको उपर बताए गए कोई भी लक्षण हैं तो आपको तुरंत ही स्‍त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह से पीसीओडी का ट्रीटमेंट तुरंत ही शुरू कर देना चाहिए। अगर आपको ऐसे कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं तब भी आपको सतर्क रहना चाहिए और लक्षणों के दिखते ही शीघ्र इसका उपचार शुरू करवा देना चाहिए। इससे आप भविष्‍य में होने वाली किसी भी बड़ी समस्‍या या कॉम्‍प्‍लीकेशन से खुद को बचा पाएंगी। 

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टीनेजर्स में PCOD के लिए उपचार:

  • PCOD का इलाज करने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण तरीका है अपनी जीवनशैली में अच्‍छे बदलाव लाना। एक खराब लाइफस्‍टाइल, अनहेल्‍दी डाइट और पूरी नींद न लेना अपके शरीर में हार्मोंस को असंतुलित कर सकती है। आपको इन सभी बातों का ध्‍यान रखना होगा। अपने शरीर बीएमआई (बॉडी मास्‍क इंडेक्‍स) सही रखना भी पीसीओडी के सही उपचार के लिए बहुत जरूरी है। शरीर में हार्मोंस के संतुलन को बनाए रखने के लिए आपको नियमित शारीरिक व्‍यायाम, नैचुरल और स्‍वस्‍थ आहार लेना चाहिए। इतना ही नहीं आपको प्रिजरवेटिव फूड आइटम्‍स, जंक फूड से भी परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही अच्‍छी और पूरी नींद लेना भी आपके लिए बहुत जरूरी है। 
  • अनियमित मासिक धर्म और लंबे समय तक रहने वाले मुंहासों को ठीक करने के लिए आपको ओरल कॉन्‍ट्रासेप्टिव्‍स आदि का कॉम्‍बीनेशन प्रिस्‍क्राइब किया जा सकता है। 
  • आपका डॉक्टर आपके वजन को नियंत्रित करने और अपने ग्लाइसेमिक स्तर का अनुकूलन करने के लिए बिगुआनइड्स प्रिस्‍क्राइब सकता है। 

पीसीओडी की बीमारी मेटाबॉलिक (चयापचय), शारीरिक, हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक पिरवर्तनों का एक कॉम्‍बीनेशन है। पीसीओडी के लक्षण शरीर में उम्र के बढ़ने के साथ होने वाले बदलावों के साथ ओवरलैप करते हैं। इसलिए किशोरावस्‍था में पीसीओडी को डाइग्‍नॉज करने का तरीका अलग होता है। यदि जीवनशैली में बदलाव और वजन पर नियंत्रण कर लिया जाए तो शरीर में हार्मोन लेवल को नॉर्मल रखा जा सकता है। अगर आप व्‍यायाम करती हैं तो पीसीओडी के लक्षणों को कम गंभीर बनाया जा सकता है। व्‍यायाम शरीर में बनने वाले इंसुलिन की संवेदनशीलता को भी कम करता है। किसी भी तरह की दवा और एंटीड्रोग्रंस की जाने वाली मेडिकल थेरिपी हो सकता है केवल कुछ ही मामलों में जरूरी हो। अगर आपको सही परामर्श और ट्रीटमेंट मिल जाता है तो आप अवसाद से भी बच सकती हैं। इसलिए हमेशा ध्‍यान रखें कि प्रारंभिक उपचार एक स्‍वस्‍थ और बेहतर जीवन को सुनिश्चित करता है। 

संदर्भ:

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5682369/

https://clinicaltrials.gov/ct2/show/NCT00714233

 
एक्‍सपर्ट सलाह के लिए डॉ. प्रज्ञा चेंजडे [एम.बी.बी.एस., एम.एस. (प्रसूति और स्त्री रोग), विशेषज्ञ की सलाह के लिए C.P.S, D.G.O, F.C.P.S, F.I.C.O.G, I.B.C.L.C.] को विशेष धन्यवाद ।