कोविड-19 संक्रमण की वजह से सभी का जीवन अव्‍यवस्थित हो गया है। खासतौर पर उन लोगों का, जिनका पूरा रूटीन ही बदल गया है। ऑफिस जाने की जगह अब अधिकतर लोग घर बैठ कर काम कर रहे हैं। ऐसे में सुबह उठने से लेकर दिनभर खाने-पीने तक की दिनचर्या में बहुत ज्यादा बदलाव आया है। 

इससे एक नई तरह की बीमारी का लोगों को सामना करना पड़ रहा है और इसका नाम है 'ईटिंग डिसऑर्डर'। इसे आप खाने-पीने से जुड़ी बीमारी के तौर पर समझ सकते हैं।

 इस बीमारी से जुड़ी जानकारी हमें न्‍यट्रिशनिस्‍ट कविता देवगन दे रही हैं। वह कहती हैं, 'इसे आप खाने-पीने से जुड़ी बीमारी के तौर पर समझ सकते हैं। इस बीमारी में कभी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ही भूख लगती है, तो कभी उसे कुछ भी खाने का मन नहीं करता है।' कविता जी ने हमें इस बीमारी के लक्षण और उपचार भी बताए हैं। 

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क्‍या होता है ईटिंग डिसऑर्डर 

ईटिंग डिसऑर्डर तब होता है, जब आपके खाने-पीने का रूटीन पूरी तरह से बदल जाता है। जब आप समय पर और भूख लगने पर खाना नहीं खाते हैं। ऐसे में आपको कभी बहुत तेज भूख लगती है, तो कभी पूरे दिन नहीं लगती। इतना ही नहीं, ईटिंग डिसऑर्डर की वजह से कुछ लोग बेवक्त खाना खा लेते हैं या फिर वजन बढ़ने के डर से अपनी खुराक से भी कम खाना खाते हैं। 

कविता बताती हैं, 'इस बीमारी में वजन बढ़ भी सकता है और घट भी सकता है। यह आपकी ईटिंग हैबिट पर निर्भर करता है। ईटिंग डिसऑर्डर होने पर मरीज एनोरेक्सिया नर्वोसा, बुलीमिया नर्वोसा या बिंज ईटिंग डिसआर्डर का शिकार हो सकता है।'

एनोरेक्सिया नर्वोसा

जो लोग एनोरेक्सिया नर्वोसा से पीड़ित होते हैं, वह जरूरत से कम खाना खाते हैं ताकि उनका वजन न बढ़े। ऐसे में उनका वजन भी कम हो जाता है, साथ ही बॉडी मास भी कम हो जाता है। इससे उन्हें थकावट और चक्कर आते हैं। शरीर में खाने की सही खुराक न पहुंचने पर वह कमजोर भी हो जाते हैं। 

बुलीमिया नर्वोसा 

बुलीमिया नर्वोसा के मरीज को जरूरत से ज्‍यादा ही भुख लगती है। ऐसे में उसका वजन भी बढ़ जाता है। यह बीमारी तब होती है, जब आप वक्‍त पर खाना नहीं खाते हैं और बेवक्‍त भूख लगने पर जरूरत से ज्‍यादा खा जाते हैं। 

बिंज ईटिंग डिसआर्डर

बिंज ईटिंग डिसआर्डर डाइटिंग करने वालों को होता है। इसमें आपका वजन बढ़ भी सकता है और घट भी सकता है। 

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ईटिंग डिसऑर्डर के लक्षण 

  • जब आपको भूख तो लगती है, मगर आप जरूरत से भी कम खाना शुरू कर देते हैं। 
  • जब आपको यह भ्रम हो जाता है कि आप मोटे लग रहे हैं। 
  • त्वचा और बालों का ड्राई होना। 
  • दांतों का डैमेज होना। 
  • हर मील के बाद वॉशरूम जाने की जरूरत पड़ना। 
  • बेचैनी होना भी इसका एक लक्षण है।
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ईटिंग डिसऑर्डर से बचने के लिए क्‍या करें 

  • टाइम पर खाना खाएं और एक भी टाइम की मील को स्किप न करें। 
  • जंक फूड खाने से बचें और पौष्टिक आहार को महत्व दें। 
  • अगर भूख नहीं लगती है, तो भूख बढ़ाने वाले फूड आइटम्‍स को अपनी डाइट में शामिल करें। 
  • एक साथ ढेर सारा खाने की जगह दिन में 3-4 बार छोटी-छोटी मील लें। 
  • जब भूख लगे तब ही खाएं बिना भूख के जबरदस्‍ती न खाएं। 

नोट- अगर आप ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं, तो तुरंत ही अपने डॉक्‍टर से मिलें और इसका इलाज शुरू करें। साथ ही डॉक्‍टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें। 

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