आजकल ज्यादातर महिलाएं हाई ब्लडप्रेशर की शिकार हैं। आमतौर पर महिलाएं इसे मॉडर्न लाइफस्टाइल से जोड़कर देखती हैं और इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देती लेकिन इसमें लापरवाही आपके सेहत के लिए सही नहीं है। इस समस्या में दवाएं लेने के साथ आप एक अचूक थेरेपी अपना सकती हैं और वह है म्यूजिक थेरेपी। एक नई सांटिफिक रिपोर्ट में कहा गया है कि म्यूजिक सुनने से हाइपरटेंशन की दवाओं का असर बढ़ जाता है। 

समझें हाईबीपी की समस्या को

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हाई ब्लडप्रेशर अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर की एक अवस्था है, जिसके कारण बाद में हार्ट डिजीज, डायबिटीज और किडनी की बीमारियां हो सकती हैं। हमारी बॉडी में आर्ट्रीज का जाल होता जो पूरे शरीर में खून की सप्लाई करती हैं। हाई बीपी की समस्या में खून के तेज बहाव की वजह से आर्ट्रीज पर दबाव बढ़ने लगता है। इससे उनकी भीतरी दीवारें सिकुड़ने लगती हैं। कई बार हार्ट बीट तेज होने पर भी आर्ट्रीज में खून का दौरा तेज हो जाता है और उन्हें अत्यधिक दबाव झेलना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बढ़ने वाले ब्लडप्रेशर को हाइपरटेंशन कहा जाता है। नॉर्मल स्टेज में ब्लडप्रेशर का सिस्टोलिक लेवल (अधिकतम सीमा) 110 से 120 और डायस्टोलिक लेवल (न्यूनतम सीमा) 70 से 80 mm/hg होनी चाहिए। यदि अगर आपका ब्लडप्रेशर की अधिकतम सीमा 140 mm/hg से ज्यादा और न्यूनतम सीमा 90 mm/hg से अधिक है तो इसे प्री हाइपरटेंशन कहते हैं और इसमें आपको खासतौर पर ध्यान देने की जरूरत है। 

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कैसे असर करता है संगीत

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अगर हाई ब्लड प्रेशर होने पर आप क्लासिकल म्यूजिक सुनती हैं तो एंटी-हाइपरटेंसिव दवाओं का असर बढ़ जाता है। साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि दवाएं लेने के बाद म्यूजिक सुनने से हाई बीपी बहुत हद तक कंट्रोल हो जाता है।


स्टडी कोऑर्डिनेटर वाइटर एनग्रेसिया वेलेन्टी का कहना है कि म्यूजिक सुनने से हार्ट बीट बेहतर हो जाती है और आधे घंटे के भीतर एंटी-हाइपरटेंसिव दवाओं का असर होने लगता है।


इस अध्ययन में हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीजों पर म्यूजिक के असर की स्टडी की गई। पाया गया कि म्यूजिक सुनते हुए दवा लेने के बाद एक घंटे के भीतर हार्ट बीट में काफी सुधार आ गया। स्टडी करने वालों ने यह भी कहा कि म्यूजिक सुनने से मरीजों पर दवाओं का असर बेहतर दिखाई दिया।

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शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि म्यूजिक से पैरासिम्पेथिटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, इससे गेस्ट्रोइन्टेस्टाइटल एक्टिविटी बढ़ती है और एंटी-हाइपरटेंसिव दवाओं का असर भी बढ़ जाता है। दिल पर भी इसका पॉजिटिव असर होता है और हार्ट बीट नॉर्मल हो जाती है। 

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म्यूजिक सुनिए, हेल्दी रहिए

तो अब म्यूजिक आप सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए ही नहीं, बल्कि खुद को हेल्दी रखने के लिए भी सुनिए। क्लासिकल गाने, 80 के दशक के सदाबहार गाने, 90 के हिट गाने या आज के समय के हिट गाने आप सुन सकती हैं। इंस्ट्रूमेंटल संगीत सुनना भी आपको काफी रिलैक्स कर सकता है। तो अपनी पसंद के अनुसार सुनिए म्यूजिक और बिना टेंशन के पूरी मस्ती के साथ करिए अपने काम।