आज के समय की बढ़ती व्यस्तता में महिलाओं के लिए किचन में खाना बनाना काफी मुश्किल हो गया है। खासतौर पर वर्किंग महिलाएं टाइम की कमी के चलते बाहर से खाना खाती हैं और तेज भूख लगने पर जंक फूड का ऑप्शन चुन लेती हैं। अगर आप भी इसी समस्या के चलते जरूरत से ज्यादा जंक फूड खाने लगी हैं तो इससे आपकी प्रेगनेंसी पर असर पड़ सकता है। स्थिति ज्यादा बिगड़ने आपको इन्फर्टिलिटी की समस्या भी हो सकती है। इस बारे में हमने बात की जेपी हॉस्पिटल की गायनाकॉलेजिस्ट और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉक्टर श्वेता गोस्वामी से और उन्होंने इस बारे में हमें कुछ अहम सुझाव दिए-

जंक फूड से बढ़ती है पीसीओएस की समस्या

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आईवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर श्वेता गोस्वामी बताती हैं कि महिलाओं में इन्फर्टिलिटी की समस्या का एक मुख्य कारण पोलीसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम है। अगर इसका वक्त रहते इलाज न कराया जाए तो यह एक कैंसर का रूप ले सकता है। आजकल जंक फूड के चलन की वजह से मोटापा बढ़ रहा है, जिससे पीसीओएस जैसी समस्या के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों को बीमारियों से बचने के लिए जंक फूड से बचाएं। इसमें इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  • व्यायाम की कमी से फैटी फूड और जंक फूड से तेजी से वजन बढ़ता है। अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन-हार्मान की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है, जो ओवरी में सिस्ट बनाने के जिम्मेदार होते हैं, जिससे आप पीसीओएस जैसी बीमारी की चपेट में आ सकती हैं।
  • जीवनशैली को सही प्रकार से मैनेज कर व मोटापे को काबू में कर इस समस्या से बचा जा सकता है।
  • इस बीमारी के लक्षणों के नजर आते ही अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेकर आप आपकी आने वाली जिंदगी को बेहतर बना सकती हैं
 
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फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए खतरनाक जंक फूड

शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी जंक फूड खतरनाक है। जंक फूड में ज्यादा चीनी और नमक की वजह से कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है। अत्यधिक कैलोरी के साथ चीनी की वजह से आपका मोटापा बढ़ता है। कोलेस्ट्रॉल और नमक के कारण हाई बीपी, स्ट्रोक और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है। ज्यादा नमक से गुर्दे की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। ठंडे ड्रिंक्स, हैंबर्गर, फ्रेंच फ्राई, चॉकलेट, कुकीज, फ्राइड चिकन महिलाएं बहुत ज्यादा पंसद करती हैं। धीरे-धीरे भारत में शहरी वर्गों में इनका प्रचलन जोर पकड़ रहा है। ये सभी जंक फूड की श्रेणी में आते हैं।

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जंक फूड का लंबे समय तक सेवन कमजोरी का कारण बन सकता है, क्योंकि इसमें पोषक तत्व नहीं होते। इसे खाने के बाद शरीर में फैट जमने से रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे भारीपन और बेचैनी महसूस होती है। एकाग्रता हासिल करने में भी परेशानी होती है। इसके साथ-साथ जंक फूड यंग महिलाओं के लिए भी खतरे की घंटी बना हुआ है।

करीब दस फीसदी महिलाएं किशोरावस्था में ही पीसीओएस की समस्या से प्रभावित होती है। डॉक्टर श्वेता गोस्वामी का कहना है कि आमतौर पर यह समस्या महिलाओं को प्रेगनेंसी की उम्र से लेकर रजोनिवृत्ति तक प्रभावित करती है। महिलाओं और पुरूषों दोनों के शरीर में प्रजनन संबंधी हार्मोन बनते है। एंड्रोजन हार्मोन पुरूषों के शरीर में भी बनते हैं, लेकिन पीसीओएस की समस्या से ग्रस्त महिलाओं के अंडाशय में हार्मोन सामान्य से अधिक बनते हैं। इसकी वजह से अंडाणु सिस्ट या गांठ में तब्दील हो जाता है और कई बार कैंसर का रूप भी ले लेता है। यह स्थिति घातक हो सकती है।

मोटापे से रहें सावधान

डॉक्टर श्वेता गोस्वामी ने बताया कि मोटापे से सावधान रहें। ज्यादा फैटी और जंक फूड लेने और एक्सरसाइज की कमी से तेजी से वजन बढ़ता है। ज्यादा चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है, जो ओवरी में सिस्ट बनाने के जिम्मेदार होते हैं। इसलिए वजन घटाने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। जो महिलाएं बीमारी होने के बावजूद अपना वजन घटाने में कामयाब रहती हैं, उनकी ओवरीज वापस से एग्ज बनने शुरू हो जाते हैं। जंक फूड से खुद को बचाने के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार बहुत जरूरी होता है। इससे पीसीओएस जैसी बीमारी के खतरों को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। डॉक्टर अनुभा सिंह ने कहा कि अगर पीसीओएस की जांच शुरुआत में नहीं हो पाती और इलाज न हो पाए तो इन्फर्टिलिटी के साथ-साथ महिलाओं को टाइप 2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की शिकायत भी हो जाती है।

मोटापे को इस तरह कम करें

  • रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जरूर करें
  • बहुत ऑयली, फैटी और मीठे भोजन से बचें।
  • स्ट्रेस से दूर रहें।