प्रेग्नेंसी के दौरान पैरों में दर्द और सूजन की समस्या आम है और तकरीबन हर महिला को इस समस्‍या से रू-ब-रू होना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ते वजन और शरीर में हो रहे बदलावों के कारण ऐसा होता है, जिसे थोड़ा सा ध्यान देकर काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। हालांकि, प्रेग्नेंसी के बाद यह समस्‍या पूरी तरह से ठीक हो जाती है। दरअसल वजन बढ़ने की वजह से शरीर का सारा भार पैरों पर पड़ता है, इसलिए अकसर पैरों में दर्द की समस्या हो जाती है। वैसे प्रेग्नेंसी के समय अगर इस समस्‍या को अनदेखा किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए अगर पैरों में दर्द और सूजन हो रही है, तो ध्यान जरूर दें और इससे उबरने के लिए उपाय करें।

 how to take care of your feet during pregnancy inside

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प्रेग्नेंसी (प्रेग्नेंसी के दौरान कैसी डाइट लें) के पहले कुछ महीनों में पैरों में सूजन शुरु हो जाती है, जो सुबह के समय तो कम होती है पर शाम को ज्यादा होने लगती है। ऐसी स्थिति में कई महिलाओं की थाइज की त्वचा पर नीले रंग के दाग नजर आने लगते हैं। वहीं, कुछ महिलाओं की पैरों की नसें मोटी हो जाती हैं, इस समस्या को वेरिकोज वेन्स कहते हैं। कुछ प्रेग्नेंट महिलाओं के पैरों में कई बार खून जमा हो जाता है, जिससे पैरों में लाली और सूजन आ जाती है। वहीं, यह स्थिति कई बार मां और होने वाले बच्‍चे के लिए जानलेवा साबित होती है।

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तो चलिए इस समस्‍या की गंभीरता को समझते हुए निजी तौर पर किए गए उपायों के बारे में जानते हैं। वैसे तो अगर आपको ज्‍यादा समस्‍या हो रही है, तो आप अपने डॉक्‍टर से इस बारे में सलाह जरूर लें। एक बात का हमेशा ध्‍यान रखें कि आपके द्वारा अपनाएं गए किसी भी तरह के उपाय या नुस्‍खों की जानकारी आपके डॉक्‍टर को जरूर होनी चाहिए। इसलिए डॉक्‍टर को संज्ञान में रखकर ही इन बातों पर अमल करें।

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  • प्रेग्नेंसी के दौरान रोज नियमित रूप से टहले और पैरों से जुड़ा हल्का-फुल्का व्यायाम जरूर करें। इस दौरान कौन से व्‍यायाम करने हैं, इस बारे में अपने डॉक्‍टर से सलाह लें।

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  • अगर आप ऑफिस में बैठी हैं तो इस दौरान अपने पैरों को बीच-बीच में हिलाती रहें। अगर कुर्सी पर बैठी हैं तो बीच-बीच में पैरों को सीधा करें और किसी ऊंची जगह पर लंबाई में फैलाकर बैठें।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान किसी वैस्क्युलर सर्जन से हर दो महीने के अंतराल में अपने पैरों की जांच करवाती रहें। इससे आपकी समस्‍या ज्‍यादा बढ़ नहीं पाएगी।
  • प्रेग्नेंट महिलाओं को इस बात की कोशिश करनी चाहिए कि उनके पैरों में किसी तरह की समस्या उत्पन्न ना हो, क्योंकि पैरों की समस्या होने पर उन्हें कई तरह की दवाओं का सेवन करना पड़ सकता है, जो गर्भ में पल रहे बच्‍चे के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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  • प्रेग्नेंसी (प्रेग्‍नेंसी में वजन में होता हैं परिवर्तन, जानें क्‍यों) के दौरान धूप में लंबे समय तक ना बैठें। ऐसा करने पर पैरों की नसें गर्मी की वजह से आकार में बढ़ सकती हैं और वहां अशुद्ध खून इकट्ठा हो सकता है।
  • इन दिनों अगर पैरों में अचानक सूजन आ जाए, तो सबसे पहले अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें और इलाज के बारे में पूछें। अगर हो सके तो तुरंत किसी वैस्क्युलर या कार्डियो वैस्क्युलर सर्जन के पास जाएं, जहां एंजियोग्राफी, एम आर वीनोग्राम और डाप्लर स्टडी की सुविधा हो।
  • बहुत ज्यादा थका देने वाले कामों को करने के बाद पैरों पर ठंडा पानी डालें। वहीं, लेटते समय हमेशा पैरों के नीचे एक तकिया रखें।

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एक ही मुद्रा में लगातार ज्यादा देर तक ना तो खड़े हों और ना ही बैठें। बहुत देर तक कुर्सी पर पैर लटकाकर ना बैठें। साथ ही, सख्त किनारों वाली कुर्सी का इस्तेमाल बिल्‍कुल ना करें। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी तो जुड़ी रहिए हमारे साथ। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए पढ़ती रहिए हरजिंदगी।

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