प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के जीवन का सबसे सुंदर, सुखद और जरूरी पड़ाव माना जाता है। इससे न सिर्फ शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई देते हैं, बल्कि यह समय इमोशनल और मानसिक दृष्टि से भी बेहद खास होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का शरीर आने वाले शिशु को सही पोषण देने और उसकी देखभाल के लिए कई प्रकार के नेचुरल बदलावों से गुजरता है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य शिशु की सुरक्षा और जन्म के बाद उपयुक्त पोषण सुनिश्चित करना होता है।
इन्हीं जरूरी बदलावों में से एक बदलाव ब्रेस्ट और निप्पल से जुड़ा होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रेस्ट का साइज और बनावट बदलने लगती है। यह बदलाव शरीर को शिशु के जन्म के बाद ब्रेस्टफीडिंग के लिए तैयार करता है। निप्पल के आस-पास की त्वचा का रंग गहरा होना, ब्रेस्ट का साइज बढ़ना, हल्का भारीपन महसूस होना आदि लक्षण नॉर्मल हैं। यह सभी दूध बनाने की प्रक्रिया और शिशु को सही तरीके से दूध पिलाने की तैयारी का हिस्सा है। प्रेग्नेंसी के दौरान निपल्स कैसे बदलते हैं? इस बारे में हमें डॉक्टर दीपिका तनेजा बता रही हैं। वह नियोनेस्ट हॉस्टिपटल में सीनियर गायनोलॉजिस्ट और एचओडी हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान निप्पल में होने वाले बदलाव
डॉक्टर तनेजा के अनुसार, प्रेग्नेंसी में निप्पल और उसके आस-पास के हिस्से में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। ये सभी बदलाव प्रेग्नेंसी के हार्मोन्स के कारण होते हैं, जो शरीर को ब्रेस्टफीडिंग के लिए तैयार करते हैं।
मोंटगोमरी ट्यूबरकल्स (Montgomery Tubercles)
ये छोटे-छोटे दाने या उभार होते हैं, जो निप्पल के आस-पास के काले हिस्से यानी एरिओला पर दिखाई देते हैं। ये दाने तेल जैसा पदार्थ निकालते हैं, जो निप्पल को लुब्रिकेशन और सेेफ्टी देता है। इसके नमीयुक्त होने से शिशु के लिए ब्रेस्टफीड करना आसान होता है। इस तेल की स्पेशल स्मैल होती है, जिससे शिशु निप्पल को ढूंढने और जुड़ने में मदद कर सकता है।
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निप्पल के साइज का बढ़ना
प्रेग्नेंसी के दौरान निप्पल का साइज और व्यास बढ़ जाता है। यह शरीर का नेचुरल प्रोसेस है, जो शिशु के जन्म के बाद ब्रेस्टफ्रीडिंग को आसान बनाने के लिए होता है। जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है, निप्पल और उसके आस-पास का हिस्सा ब्रेस्टफ्रीडिंग के लिए तैयार होता जाता है।
एरिओलाका रंग बदलना
निप्पल के चारों ओर का डार्क हिस्सा, जिसेएरिओला कहा जाता है, इसका रंग प्रेग्नेंसी के दौरान हल्के ब्राउन से डार्क ब्राउन हो जाता है। यह बदलाव शरीर में पिगमेंटेशन के बढ़ने के कारण होता है। इस रंग का गहरा होना शिशु के लिए एक दृश्य संकेत के रूप में काम करता है, जिससे वह ब्रेस्टफीडिंग के दौरान आसानी से निप्पल को पहचान पाता है।
हेयर फॉलिकल्स केआस-पास पिगमेंटेशन
निप्पल के आस-पास मौजूद हेयर फॉलिकल्स के आस-पास भी पिगमेंटेशन बढ़ जाते हैं। इससे यह हिस्सा डार्क हो जाता है। यह भी शरीर में हार्मोनल बदलावों के कारण होने वाला नॉर्मल बदलाव है। ये सभी बदलाव मिलकर शिशु के लिए ब्रेस्टफीडिंग को ज्यादा कंर्म्फेटेबल बनाते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के बदलावों पर कोई खास रिसर्च नहीं की गई है, क्योंकि इनकी कोई जरूरत नहीं है। ये बदलाव पूरी तरह से नेचुरल हैं और प्रेग्नेंसी के हार्मोन्स के कारण होते हैं। ये बदलाव शरीर को ब्रेस्टफीडिंग के लिए तैयार करते हैं और बच्चे के लिए भी फायदेमंद होते हैं। इनसे घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इसका कोई नेगेटिव असर नहीं होता है।
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