पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज ज्यादातर संक्रमित व्यक्ति से सेक्शुअल कॉन्टेक्ट के जरिए फैलती हैं। जब तक ये बीमारियां अपने एडवांस लेवल तक नहीं पहुंच जातीं, तब तक इनके किसी तरह के लक्षण नजर नहीं आते। इन बीमारियों से क्रॉनिक प्रॉब्लम्स हो सकती हैं और कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। इसीलिए इनसे संक्रमित होने से बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी है। इस बारे में हमने बात की Dr. Madhuri Mehendale (MBBS, DGO, FCPS, DNB) से और उन्होंने हमें इस विषय में अहम जानकारियां दीं-

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज से इस तरह रहें सेफ

pelvic inflammatory disease reasons

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज से सुरक्षित रहने के लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं-

  • एक से अधिक पार्टनर्स के साथ फिजिकल इंटिमेसी ना रखें। 
  • अगर आप बर्थ कंट्रोल के तरीके अपना रही हैं तो कंडोम जैसे बैरियर मेथड का इस्तेमाल कर सकती हैं। इनसे आप सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज और प्रजनन अंगों के संक्रमण से सुरक्षित रह सकती हैं। कंडोम के अलावा diaphragms (एक सिलिकॉन कप, जिसका इस्तेमाल प्रेग्नेंसी से बचाव के लिए फिजिकल इंटिमेसी से पहले किया जाता है) और vaginal spermicides (फिजिकल इंटिमेसी से पहले महिलाएं वेजाइना में इसे लगाती हैं, जिससे स्पर्म वेजाइना में ही नष्ट हो जाते हैं) जैसे बैरियर मेथड भी इस्तेमाल किए जाते हैं। 
  • नियमित रूप से गायनेकोलॉजिस्ट के पास चेकअप के लिए जाएं। सर्विक्स के बहुत से इन्फेक्शन्स की जांच की जा सकती है और आंतरिक प्रजनन अंगों के प्रभावित होने से पहले उनका इलाज किया जा सकता है। 

Recommended Video

  • ऐसे पार्टनर के साथ फिजिकल इंटिमेसी ना रखें, जिसके एक से ज्यादा पार्टनर हों।
  • ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स यानी गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल कम से कम करें। जिन महिलाओं की गर्भनिरोधक दवाएं लेने की हिस्ट्री रही है, उन्हें सर्विक्स के इन्फेक्शन होने की आशंका ज्यादा रहती है। 
  • इंट्रायूटरीन डिवाइस (गर्भनिरोध का एक तरीका) लगवाने के बाद शुरुआती महीनों में डॉक्टर के पास नियमित चेकअप के लिए जाएं। पहले कुछ महीने किसी तरह के इन्फेक्शन या एब्नॉर्मेलिटी का पता लगाने के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं। 
  • बहुत ज्यादा निकोटीन के सेवन से भी पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज जुड़ी मानी जाती है। इसीलिए या तो आपको धूम्रपान पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए या फिर बहुत कम कर देना चाहिए। 

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज के इलाज के बाद फॉलोअप

pelvic inflammatory disease symptoms

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज से क्रॉनिक पेन की समस्या हो सकती है और कुछ मामलों में इससे इन्फर्टिलिटी भी हो सकती है। प्रॉब्लम फिर से प्रभावित ना करे, इसके लिए सही तरीके से जांच और इलाज कराया जाना जरूरी है।

इलाज पूरा होने के कुछ हफ्तों बाद पेल्विक एरिया का अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए। जिन महिलाओं को इन्फेक्शन की ज्यादा समस्या रही है, डॉक्टर उन्हें लेप्रोस्कोपी टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकते हैं। यौन संबंधों में सेफ्टी सुनिश्चित करें और अपने पार्टनर को रूटीन चेकअप के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि किसी भी तरह के इन्फेक्शन की आशंका ना रहे। अगर इसके बाद मरीज डिप्रेस्ड फील करें तो उन्हें काउंसलिंग करानी चाहिए। इससे उनकी स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी तो इसे जरूर शेयर करें। हेल्थ से जुड़ी अपडेट्स पाने के लिए विजिट करती रहें हरजिंदगी।

Reference:

https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/9129-pelvic-inflammatory-disease-pid/prevention

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/23159202