मछली खाना हमारी हेल्‍थ के लिए बहुत अच्‍छा होता है क्‍योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है। लेकिन एक रिसर्च के अनुसार, प्रेग्‍नेंसी में मछली खाना भी बेहद फायदेमंद होता है। जी हां एक नई रिसर्च के अनुसार, महिलाएं जो हफ्ते में तीन से चार दिन मछली खाती हैं, उनके बच्चों का दिमाग बेहद तेज होता है। रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि प्रेग्‍नेंसी के दौरान मछली खाने वाली महिलाओं के बच्चों में ऑटिज्म (अविकसित मस्तिष्क) का खतरा भी कम होता है।

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क्‍या है ऑटिज्‍म

ऑटिज्म एक ऐसा रोग है, जिसमें रोगी बचपन से ही परिवार, समाज व बाहरी माहौल से जुड़ने की क्षमताओं को गंवा देता है। यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है, जो बातचीत और दूसरे लोगों से व्यवहार करने की क्षमता को सीमित कर देता है।

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ऑटिज्‍म हैं लक्षण

  • बोलचाल व शाब्दिक भाषा में काफी कमी आ जाती है।
  • पीडित बच्चे सही समय पर सही बात नहीं कहते और अपनी जरूरतों को भाषा या शब्दों का प्रयोग करके नहीं कह पाते।
  • अगर बच्चे को भोजन करना है तो वह यह नहीं बोलता कि मुझे खाना दो। इसके विपरीत वह मां का हाथ पकड़ कर रसोई तक ले जाता है और मां अपने आप बात को समझ कर बच्चे को खाना दे देती है।

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क्‍या कहती है रिसर्च

अध्ययन के मुताबिक, "प्रेग्‍नेंसी के दौरान बड़ी वसायुक्त मछलियां खाने वाली महिलाओं के बच्चे के मस्तिष्क का विकास ना केवल बेहतर होता है, बल्कि उनमें ऑटिज्म का खतरा भी कम हो जाता है।"
शोधकर्ताओं के सामने चौंकानेवाली यह बात सामने आई है कि टुना या टाइलफिश जैसी कुछ विशेष मछलियां जिनमें मर्करी का लेवल ज्यादा होता है, उसे प्रेग्‍नेंट खाना पसंद नहीं करतीं, इनका संबंध कुछ सबसे बड़े विकासात्मक फायदों से है।

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, वैसी मछलियां जिनमें डोकोसाहेक्सानोइक एसिड (डीएचए) यौगिक का लेवल हाई होता है, वे मर्करी के किसी भी नकारात्मक प्रभाव को दूर करती हैं। स्पेन के बार्सिलोना में सेंटर फॉर रिसर्च इन एनवयारमेंटल एपिडेमियोलॉजी के मुख्य शोधकर्ता जॉर्डी जुल्वेज ने कहा कि टुना जैसी मछलियों में मर्करी होता है, लेकिन उनमें डीएचए की मात्रा बेहद अधिक होती है, जो मस्तिष्क के विकास में बेहद मदद करता है। पत्रिका 'लाइव साइंस' के अनुसार, जुल्वेज ने कहा, "हो सकता है कि मर्करी के नकारात्मक प्रभावों को यह दूर करता है।"

 

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