बदलते लाइफस्टाइल की वजह से आज के समय में महिलाएं डाइबिटीज की शिकार हो रही हैं और इनमें भी भारतीय महिलाओं की संख्या ज्यादा है। एक अनुमान के अनुसार दुनियाभर के 49 फीसदी केस भारत में दर्ज होते हैं। अकेले साल 2017 में ही भारत में इस बीमारी के 72 मिलियन मामले दर्ज किए गए। इसके मद्देनजर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस ने डायबिटीज फाउंडेशन, नेशनल डायबिटीज, ओबिसिटी एंड कॉलेस्ट्रोल फाउंडेशन और फोर्टिस सेंटर फॉर डायबिटीज, ओबिसिटी एंड कॉलेस्ट्रोल मिलकर आने वाले समय में डायबिटीज से लड़ने के नए तरीके इजाद कर रहे हैं।

VITAMIN D DEFICIENCY inside

विटामिन डी की कमी से बढ़ जाता है ग्लूकोस का स्तर

स्टडी में पाया गया कि विटामिन डी की कमी से महिलाओं के शरीर में ब्लड ग्लूकोस का स्तर बढ़ जाता है, जिसे प्री-डायबिटिक माना जाता है। यह एक ऐसी स्थिति मानी जाती है, जिसमें किसी व्यक्ति को हाई ब्लड शुगर लेवल होता है, लेकिन वह इतना ज्यादा नहीं होता कि उसे डायबिटिक कहा जाए। 

20 से 60 के उम्र की 297 महिलाएं एक स्क्रीनिंग के लिए चुनी गईं, जिनके ओवरऑल लाइफस्टाइल का इवेल्युएशन किया गया। इसमें उनकी डाइट, फिटनेस, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और दूसरी चीजें जैसे कि पर्सनल और फैमिली हिस्ट्री शामिल हैं।

जिन महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया, उमें से 68 फीसदी में विटामिन डी की कमी पाई गई। साथ ही इन महिलाओं में ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा था, विशेष रूप से उन महिलाओं का, जो प्रीडायबिटिक थीं। 

इसे जरूर पढ़ें: जल्दी प्रेगनेंट होना चाहती हैं तो इन 6 तरीकों से जल्द होगा फायदा

VITAMIN D DEFICIENCY inside

डायबिटीज से बचाव की तलाशी जा रही हैं संभावनाएं 

इस स्टडी के बाद अब इस संभावनाओं को तलाश किया जाएगा कि विटामिन डी की कमी वाली महिलाओं में इसकी कमी पूरी करने से क्या डायबिटीज होने से बचाव किया जा सकता है। वर्तमान में प्रीडायबिटिक महिलाओं को लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव की सलाह दी जाती है ताकि वे अपना ब्लड शुगर का स्तर कम कर सकें और डायबिटीज को डिले कर सकें। इस स्टडी में यह भी प्रमुखता से बताया गया कि नॉन डायबिटिक की तुलना में डायबिटिक मरीजों में विटामिन डी का स्तर कम होता है। साथ ही जिनमें एबडॉमिनल ओबिसिटी पाई गई, उनमें डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।