
बर्थ कंट्रोल के तरीकों का काफी समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी इनका बहुत महत्व है। हालांकि समय के साथ इन तरीकों में बदलाव जरूर आया है और आजकल की महिलाओं को सेक्स और बर्थ कंट्रोल के बारे में पहले के मुकाबले ज्यादा जानकारी है। लेकिन महिलाओं के मन में आज भी बर्थ कंट्रोल को लेकर बहुत सारे मिथ है। जिनके चलते अक्सर महिलाएं प्रेग्नेंट हो जाती है। इस बारे में हमने पटपडगंज स्थित गायनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर मीना मल्होत्रा से बात की तब उन्होंने हमें बर्थ कंट्रोल से जुड़े मिथ के बारे में बताया। आइए हमारे साथ आप भी जानें कि उन्होंने क्या बताया।

सच: यह मिथ है कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सेक्स करने से प्रेग्नेंसी नहीं होती हैं। जबकि यह बात सही नहीं है। क्योंकि यह गलतफहमी मुझे भी थी जिसके चलते मैंने भी ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कंसीव कर लिया था। अगर आपको भी ऐसी ही कुछ गलतफहमी है तो आज से ही इसे अपने मन से निकाल दें। डॉक्टर मीना मल्होत्रा का कहना हैं कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बॉडी में जो हॉर्मोंस बनते हैं, उनके कारण ऑव्यूलेशन कुछ टाइम के लिए बंद हो जाता है। लेकिन यह बात हर महिला पर समान रूप से लागू नहीं होती है। इसलिये सेक्स के दौरान बर्थ कंट्रोल का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।
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सच: जबकि सच इस से बिलकुल अलग है। संबंध बनाने के बाद यूरीन जाने या शावर लेने का स्पर्म द्वारा अंडे को फर्टिलाइजेशन से कोई संबंध नहीं है। एग फर्टिलाइजेशन के लिए केवल एक शुक्राणु की जरूरत होती है। संबंध के दौरान कभी भी एग फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। नहाने या यूरीन जाने से स्पर्म को बाहर नहीं किया जा सकता।

सच: यह मानना कि सेफ दिनों में बिना किसी बर्थ कंट्रोल के सेक्स करने से प्रेग्नेंसी नहीं होती है, जबकि ऐसा मानना बिल्कुल गलत हैं क्योंकि सेफ दिनों में भी महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती है। ओवुलेशन और सुरक्षित अवधि का अनुमान बहुत ही मुश्किल काम है। ओवुलेशन के दिन हर महिला के अंदर भिन्न होते हैं भले ही हर महीने, चक्र रेगुलर ही क्यों ना हो।
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सच: कंडोम बर्थ कंट्रोल के सबसे प्रभावी रूपों में से एक है, इसलिए आपको यह सोचकर इससे नहीं बचना चाहिए कि यह आपके आनंद को कम करता है। वास्तव में नए प्रकार के कंडोम और लुब्रिकेंट आते हैं जो आपको ज्यादा आनंद दे सकते हैं। कंडोम के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह आपकी बॉडी के हार्मोन को प्रभावित नहीं करता है। मेडिकल डेली के अनुसार, गलत प्रकार का लुब्रिकेंट लेटेक्स कंडोम को पतला कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप ये टूट सकता है। पिछले शोध में यह भी दावा किया गया था कि पानी या सिलिकॉन आधारित लुब्रिकेंट लेटेक्स के साथ सबसे अच्छा काम करते हैं।

सच: ज्यादातर महिलाओं का मानना हैं कि बर्थ कंट्रोल जैसे कि कंडोम और गोलियां पूरी तरह से काम करते हैं, लेकिन यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि वह 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं है। फिलकेयर के अनुसार, विभिन्न प्रकार के गर्भनिरोधक उनके प्रभावशीलता के लेवल पर अलग होते हैं। कोई भी गर्भनिरोधक तकनीक 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं होता है और अनप्लांड प्रेग्नेंसी को रोकने में सब में कोई ना कोई जोखिम रहता है।
इन सभी चीजों को ध्यान में रखकर आप प्रेग्नेंसी से बच सकती हैं।
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