क्‍या आप गैस और एसिडिटी से परेशान हैं?
जोड़ों के दर्द ने जीना मुश्किल कर दिया है?
इसके चलते मन भी बेचैन रहता है?
कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्‍या किया जाए? तो परेशान न हो क्‍योंकि हम आपके लिए ऐसा जबरदस्‍त तरीका लेकर आए हैं जिसकी मदद से आप सिर्फ अंगुलियों से अपनी इन सभी समस्‍याओं को आसानी से दूर कर सकती हैं। आपको लग रहा होगा पता नहीं हम आपको क्‍या बताने जा रहे हैं? लेकिन यह बहुत ही आसान नुस्‍खा है और रोजाना कुछ देर अपनी अंगुलियों की मदद से इस मुद्रा को करने से आपको हेल्‍थ से जुड़ी कई समस्‍याओं से छुटकारा मिल सकता है। 

मुद्रा हाथ का इशारा है जो ब्रेन और शरीर के विशिष्ट हिस्‍सों में एनर्जी फ्लो का मार्गदर्शन करता है। वायु मुद्रा शरीर के वायु तत्व को कम करती है जो बेचैनी, घबराहट को नियंत्रित करती है और असहज मन को शांत करती है। हमारे शरीर में वायु तत्व विभिन्न प्रकार के दर्द जैसे रूमेटाइड अर्थराइटिस, साइटिका, आदि और विभिन्न मनोवैज्ञानिक विकारों को मैनेज करने में मदद करते हैं। वायु असंतुलन से संबंधित समस्याओं को वायु मुद्रा का अभ्यास करके आसानी से दूर किया जा सकता है। 

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mudra benefits inside

दूसरे शब्‍दों में आप कह सकती हैं कि वायु का मतलब हवा है। वायु मुद्रा करने से शरीर में मौजूद हवा तत्व कंट्रोल में रहते हैं, जिससे आपका शरीर लंबे समय तक हेल्‍दी रहता है और आप वायु से जुड़ी बीमारियों से बची रहती हैं। आइए इसे करने के तरीके और फायदों के बारे में योग गुरू नेहा से जानें। योगा गुरु नेहा, द योग गुरु तथा वुमेन हेल्‍थ रिसर्च फाउंडेशन (ट्रस्‍ट) की संस्‍थापक हैंं और प्रेग्‍नेंसी के लिए योग पर काफी किताबें लिख चुकी हैं।

वायु मुद्रा के फायदे

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  • मन को शांत रखने में मददगार होती है।
  • इम्यूनिटी को बढ़ाती है। 
  • गैस्ट्रिक समस्याओं जैसे गैस और एसिडिटी पर काबू पाने में मददगार होती है।
  • एंडोक्राइन ग्‍लैंड को उत्तेजित करती है।
  • क्षतिग्रस्त और डेड नर्वस सेल्‍स को पुनर्जीवित करती है। 
  • वायु दोष के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द को दूर करती है।

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वायु मुद्रा करने का तरीका

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  • इसे करने के लिए सबसे पहले ध्यान मुद्रा में बैठें। इसके लिए आप लोटस या डायमंड पोज में बैठ सकती हैं या माउंटेन पोज़ में खड़ी हो सकती हैं।
  • इस मुद्रा को करते समय पीठ को सीधा और सिर को ऊंचा रखना चाहिए।
  • हाथों को घुटनों पर रखें लेकिन हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए।
  • अंगूठे के बेस पर तर्जनी की नोक को रखने से शुरूआत करें। 
  • अब धीरे से अपनी अंगुली से अंगूठे को दबाएं। इससे अग्नि तत्‍व द्वारा वायु तत्‍व का दमन होता है। 
  • बाकी तीन अंगुलियों को सीधा और फैला हुआ रखना है। ये एक दूसरे के समानांतर होनी चाहिए। दोनों हाथों से वायु मुद्रा को करें।
  • अब आंखें बंद करें और अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करें। 
  • अगर आप अच्‍छा रिजल्‍ट चाहती हैं तो ओम शब्द का जाप हर सांस के साथ करें।

आप भी इस मुद्रा को रोजाना सिर्फ कुछ मिनट तक करके वायु दोषों को दूर कर सकती हैं। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।  

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