Air Pollution से फेफड़ों को कैसे सुरक्षित रखें? रोज सिर्फ 60 सेकेंड आजमाएं योग गुरु अक्षर का बताया यह ‘जादुई’ उपाय

क्या आप भी रोज जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं? बाहर निकलते ही धुएं, धूल और जहरीले कणों से बच पाना नामुमकिन हो गया है। ऐसे में फेफड़ों पर इसका सीधा असर पड़ता है, जिससे सांस लेने में परेशानी, थकान, एलर्जी और इम्यूनिटी कमजोर होने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। भले ही आप हवा को पूरी तरह साफ न कर सकें, लेकिन अपने शरीर को अंदर से मजबूत जरूर बना सकते हैं। रोज सिर्फ 60 सेकेंड का आसान और असरदार ब्रीदवर्क रूटीन अपनाकर आप अपने फेफड़ों की क्षमता बढ़ा सकती हैं और प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचा सकती हैं। यह रूटीन न तो ज्यादा समय लेता है और न ही इसे करने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत होती है।
हिमालयन सिद्धा आचार्य अक्षर (लेखक, योग गुरू और फाउंडर, अक्षर योग केंद्र) बता रहे हैं कि यह आसान ब्रीद वर्क रूटीन कैसे आपके फेफड़ों को मजबूत बनाता है, सांस लेने की क्षमता बढ़ाता है और शरीर की इम्यून सिस्टम को सही रखता है। इसे रेगुलर करने से सांसों से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं और शरीर में ऊर्जा, मानसिक शांति और रोगों से लड़ने की ताकत भी बढ़ती है।
वायु प्रदूषण में फेफड़ों को मजबूत कैसे बनाएं?
आचार्य अक्षर बताते हैं कि आप बाहरी माहौल को बदल नहीं सकते हैं, लेकिन शरीर को अंदर से मजबूत बनाना बेहद जरूरी है। जब हमारा अंदरूनी सिस्टम मजबूत होता है, तब बाहरी परेशानियों जैसे प्रदूषण का असर अपने आप कम होने लगता है।

- योग विज्ञान- योग विज्ञान में सांस को सिर्फ हवा नहीं, बल्कि जीवित ऊर्जा माना गया है।
- प्राणायाम का महत्व- प्राणायाम सांस को कंट्रोल करने की पुरानी तकनीक है, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने की ताकत मजबूत होती है।
आज ज्यादातर लोग तेज सांस लेते हैं, जिससे फेफड़ों का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता। बढ़ते प्रदूषण में यह आदत और भी नुकसानदायक होती है।
कपालभाति, नाड़ी शोधन जैसे रेगुलर ब्रीदिंग एक्सरसाइज से फेफड़ों को फैलाने, ऑक्सीजन के आदान-प्रदान को अच्छा बनाने और श्वसन तंत्र में जमी गंदगी को साफ करने में मदद मिलती है।
60 सेकेंड का ब्रीद वर्क रूटीन क्या है?
सांस हमारे मन और शरीर के बीच की सबसे मजबूत कड़ी है। यह 60-सेकंड का अभ्यास सुबह के समय करना सबसे अच्छा होता है। इसमें भस्त्रिका प्राणायाम किया जाता है, जिसमें गहरी सांस लेना, थोड़ी देर सांस रोकना (कुंभक) और फिर आराम से सांस छोड़ना शामिल हैं।

60 सेकेंड का ब्रीद वर्क कैसे करें?
- इसे करने के लिए रीढ़ को सीधा करके बैठ जाएं।
- पूरा ध्यान सांसों पर लगाएं और जितना हो सके, गहरी सांस लें।
- कुछ सेकंड के लिए सांस रोकें (कुंभक)।
- फिर ध्यान के साथ सांस छोड़ें।
- इसे जोर लगाकर नहीं, बल्कि अनुशासन के साथ करें। चाहें तो इसे दिन में 2-3 बार दोहरा सकते हैं।
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यह रूटीन फेफड़ों को कैसे हेल्दी रखता है?
- गहरी सांस लेने से फेफड़ों के ऐसे हिस्से भी सक्रिय होते हैं, जो आमतौर पर निष्क्रिय रहते हैं।
- सांस रोकने (कुंभक) से शरीर में ऑक्सीजन को अच्छी तरह से सोखने की क्षमता बढ़ती है।
- सांस छोड़ने से फेफड़ों में जमा कचरा बाहर निकलता है।
- धीरे-धीरे फेफड़े ज्यादा मजबूत और प्रदूषण के प्रति सहनशील बनते हैं।
60 सेकेंड ब्रीद वर्क के अन्य फायदे
सिर्फ 60 सेकेंड का यह अभ्यास आपकी सेहत में बड़ा बदलाव ला सकता है।
- यह तनाव कम करता है और दिमाग को तेज करता है।
- यह इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है और अंदरूनी मजबूती देता है।
- नर्वस सिस्टम को भी संतुलित रखता है।
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यह 60 सेकेंड का ब्रीद वर्क रूटीन फेफड़ों को सुरक्षित रखने का आसान, नेचुरल और असरदार उपाय है, जिसे आप रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपना सकती हैं। हरजिंदगी के वेलनेस सेक्शन में हम इसी तरह अपने आर्टिकल्स के जरिए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में आप तक सही जानकारी पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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