खराब लाइफस्टाइल, एक्‍सरसाइज न करना और डाइट में पोषक तत्‍वों की कमी के चलते पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या बढ़ती जा रही है। जी हां, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में होने वाली बेहद ही आम समस्या है जिसे पीसीओएस के नाम से भी जाना जाता है। पहले यह समस्या 30 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में देखने को मिलती थी लेकिन आज यह समस्या छोटी उम्र की लड़कियों को भी परेशान कर रही है। पीसीओएस महिला में होने वाली एक ऐसी समस्या है जिसमें ओवरी में सिस्ट यानि गांठ आ जाती है। हार्मोन्स में गड़बड़ी इस बीमारी का अहम कारण है। पीसीओएस के कारण हार्मोन्स का असंतुलन इतना ज्यादा होता है कि महिलाओं को कई अन्‍य समस्‍याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। इस कंडीशन के ज्यादा गंभीर होने पर महिलाओं को मां बनने में भी मुश्किलें आ सकती हैं। 

पीसीओएस को ठीक करना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन लाइफस्‍टाइल में बदलाव और डाइट में कुछ चीजों को शामिल करके आप इससे आसानी से बच सकती हैं। साथ ही यह पीएमएस के लक्षणों जैसे मूड स्विंग, थकान और पीरियड ऐंठन जैसी हार्मोनल समस्याओं को रोकने या कंट्रोल करने में मदद करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे बीज के बारे में बता रहे हैं जिनके सेवन से आप हार्मोन्स को कंट्रोल करके पीसीओएस से छुटकारा पा सकती हैं। हार्मोन्स को कंट्रोल करने में बीज आपकी कैसे मदद कर सकते हैं? इस बारे में हमें शालीमार स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल की डाइटीशियन सिमरन सैनी बता रही हैं।  

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एक्‍सपर्ट की राय 

सिमरन सैनी जी का कहना है कि ''हार्मोन्स को कंट्रोल में रखने के लिए एक्‍सरसाइज, सही लाइफस्‍टाइल और डाइट पर ध्‍यान देना बेहद जरूरी होता है। डाइट में भी खासतौर पर बीज का सेवन हार्मोन्स को कंट्रोल में लाने के लिए बहुत फायदेमंद होता है। मूल रूप से बीज पोषक तत्वों का पावरहाउस होते हैं। फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और आवश्यक विटामिन और मिनरल से भरपूर बीज पीसीओएस-फ्रेंडली सुपरफूड हैं। अधिकांश बीजों में बहुत कम कार्बोहाइड्रेट होते हैं, इसलिए ये आपके इंसुलिन लेवल को कम नहीं करते हैं।'' 

फ्लैक्ससीड्स

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फ्लैक्ससीड्स या अलसी ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं और इसमें लिग्नान नामक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो हमारे शरीर में हार्मोन को संतुलित करने में मदद करते हैं। साथ ही अत्यधिक एस्ट्रोजन के लक्षण जैसे सूजन, थकान, मूड स्विंग, ऐंठन, स्तन कोमलता और मुंहासों को भी फ्लैक्ससीड्स के सेवन से काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सनफ्लावर सीड्स

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सूरजमुखी के बीज कई एंजाइमों, विटामिन ई और बी विटामिन विशेष रूप से बी 6 से भरपूर होते हैं जो हमारे शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नामक हार्मोन्स के उत्पादन को बैलेंस करने में मदद करते हैं और पीएमएस के लक्षणों से लड़ते हैं।

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कद्दू के बीज

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ये बीज मैग्नीशियम और बीटा साइटोस्टेरॉल से भरपूर होते हैं जो पीसीओएस से संबंधित कई लक्षणों जैसे हेयरफॉल और पीरियड्स में ऐंठन को दूर करने में सहायक होते हैं। जर्नल प्लांट फूड्स फॉर ह्यूमन न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक स्‍टडी के अनुसार, कद्दू के बीजों में जिंक की मात्रा अधिक होती है। यह प्रोजेस्टेरोन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है क्योंकि आप अपने चक्र के दूसरे चरण में प्रोजेस्टेरोन वृद्धि की ओर बढ़ते हैं। वास्तव में, अगर आपमें प्रोजेस्टेरोन की कमी के कारण कुछ लक्षण जैसे माइग्रेन, सिरदर्द, अवसाद, चिंता, और मूड में बदलाव महसूस होते हैं तो दैनिक आधार पर कद्दू के बीजों का सेवन इन सभी चीजों को कंट्रोल करने में मदद करता है।

चिया सीड्स

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चिया सीड्स ओमेगा 3 फैटी एसिड और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं और हमारे शरीर में हार्मोन्स को संतुलित करने में मदद करते हैं। ये फाइबर से भरपूर होते हैं और कई तरह से हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। ये गुण हार्मोनल समस्याओं जैसे इंसुलिन संवेदनशीलता, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, इर्रेंगुलर पीरियड्स, मुंहासे और मूड स्विग्‍स को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। 

तो देर किस बात की हार्मोनल असंतुलन के लक्षणों को शांत करने के लिए इन जादूई बीजों का सेवन आप भी करें। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।  

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