उपवास को हमेशा भारत में बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है। उपवास करने से ना सिर्फ हमारे खाने-पीने की आदत पर कंट्रोल रहता है बल्कि ये वजन को नियंत्रित करने के लिए भी जरूरी है। बड़े-बड़े योगी और ऋषि मुनि भी उपवास के महत्व को बताते हैं। अगर साइंस और डाइट एक्सपर्ट्स की बात करें तो इंटरमिटेंट फास्टिंग को भी अब ग्लोबली महत्व मिलने लगा है। कई रिसर्च भी इस लिए की गई हैं जो बताती हैं कि उपवास कितना फायदेमंद साबित हो सकता है।

उपवास को करने के नियम और तरीके कई हो सकते हैं। उपवास शरीर को डिटॉक्स करता है और इस कारण आपको कभी ना कभी इसे करना जरूर चाहिए पर लोग उपवास का मतलब ही कुछ और निकाल लेते हैं। यहां उपवास का मतलब साबूदाना वड़ा और कुट्टू के आटे का डोसा खाने से नहीं बल्कि अपने शरीर को डिटॉक्स करने से है।

उपवास रखने के लिए नियम का पालन करना जरूरी होता है। आप अपने शरीर को डिटॉक्स करने के लिए कई तरह से इसे कर सकते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टर दीक्षा भावसार ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उपवास के बारे में कुछ जरूरी जानकारी शेयर की है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर बताया है कि वो हर शनिवार उपवास रखती हैं और ये फिजिकल लेवल पर काफी अच्छा होता है।

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उपवास के क्या हैं फायदे?

दिक्षा भावसार के मुताबिक ये हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को वो जरूरी राहत देता है जिसकी उसे जरूरत है। ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम रात में सोते हैं जिससे हमारा शरीर काफी राहत भरा रहे। हमारी आंतों को हमेशा फास्टिंग की जरूरत होती है और ये अच्छा होगा अगर आप हफ्ते या 15 दिन में एक बार उपवास रख लिया करें।

  • उपवास रखने से शरीर में हीलिंग एक्टिव होती है
  • ये शरीर को तरोताजा करता है
  • ये शरीर को डिटॉक्स करता है
  • उपवास करने से शरीर रिलैक्स होता है

इसके अलावा, अगर सिर्फ हेल्थ से जोड़कर देखा जाए तो हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए भी उपवास करना बहुत जरूरी है। ये कई सारी हेल्थ से जुड़ी समस्याओं में मदद कर सकता है जैसे - 

  • पीसीओएस
  • मोटापा
  • हाई कोलेस्ट्रॉल
  • लिवर की समस्याएं
  • कैंसर
  • थायराइड
  • इरिटेबल बाउल सिंड्रोम
  • हार्मोनल समस्याएं
  • ऑटो इम्यून डिसऑर्डर
  • स्किन से जुड़ी समस्याएं
  • स्ट्रेस और स्ट्रेस से जुड़ी समस्याएं
  • एक्ने की समस्या
  • डल स्किन और बहुत कुछ 

कितनी तरह से किए जा सकते हैं उपवास? 

अब बात करते हैं अलग-अलग तरह के उपवासों की जिनकी मदद आप ले सकते हैं। आप अपने शरीर की स्थिति के हिसाब से इसे करें। 

1. ड्राई फास्ट - 

ऐसा उपवास जिसमें ना तो पानी पिया जाता है और ना ही खाना खाया जाता है। ऐसा उपवास एकदम से नहीं ट्राई करना चाहिए बल्कि धीरे-धीरे इसकी आदत डालनी चाहिए और शुरुआत कुछ घंटों से करनी चाहिए। इसी के साथ, ऐसा फास्ट करने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए। 

2. पानी वाला फास्ट- 

जैसा कि नाम बता रहा है ये वो उपवास होता है जिसमें सिर्फ पानी ही पिया जाता है और खाना नहीं खाया जाता। लो बीपी वाले लोगों को ये बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इस तरह का उपवास आपको हाइड्रेट रखता है। 

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3.  फलाहार- 

ये वो उपवास होता है जिसमें सिर्फ फलों को ही खाया जाता है। ये फलाहार कई लोग नवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे धार्मिक दिनों में भी करते हैं। उसमें नमक नहीं लिया जाता है और शरीर को नमक से डिटॉक्स किया जाता है। 

 
 
 
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4. अन्न न खाने वाला उपवास- 

ये उन लोगों के लिए अच्छा है जो भूखे नहीं रह सकते और जिन्हें हेल्थ के हिसाब से थोड़ा सा नमक लेना भी जरूरी होता है। इस तरह के उपवास में सिर्फ अन्न ही खाया जाता है। 

5. नमक और शक्कर से उपवास- 

ये ऐसा उपवास होता है जिसमें नमक और शक्कर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। आप अन्न भी खा सकते हैं, लेकिन नमक और शक्कर से शरीर को डिटॉक्स किया जाता है। 

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6. सोशल मीडिया से उपवास- 

वैसे से शारीरिक हेल्थ पर कम और मानसिक हेल्थ पर ज्यादा असर डालता है। सोशल मीडिया से दूर रहना ना सिर्फ आपकी आंखों के लिए अच्छा है बल्कि इससे आपको मानसिक शांति भी मिल सकती है। 

7. लिक्विड पर फास्टिंग -

ये ऐसा उपवास है जिसमें हर्बल ड्रिंक्स ही पी जाती हैं। आप जीरा पानी, सौंफ का पानी, अन्य हर्बल शरबत आदि पी सकते हैं। ये आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होती है। 

8. नेगेटिविटी से फास्टिंग- 

किसी भी तरह की बुराई, गलत सोच, गलत स्टोरी, न्यूज आदि से फास्टिंग को सही माना जा सकता है। मानसिक शांति के लिए ये बहुत जरूरी है। अगर आपको लग रहा है कि आपको बहुत ज्यादा नेगेटिविटी घेर रही है तो उससे दूर रहने की कोशिश करें। 

9. इंटरमिटेंट फास्टिंग- 

दिन के सिर्फ कुछ घंटे ही खाएं-पिएं बाकी समय खाने-पीने से बचें। जैसे आप 16 घंटे का उपवास रख सकती हैं जिसमें सोना भी शामिल होता है। 

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10. सर्काडियन रिदम फास्टिंग- 

आपके बॉडी क्लॉक को सेट करने के लिए उसी तरह से फास्टिंग करना। इसे बिना एक्सपर्ट के खुद से ट्राई नहीं करना चाहिए और ये करने के लिए हफ्ते में दो या तीन दिन चुन लेने चाहिए। पर इस तरह का उपवास आपके बॉडी क्लॉक को सही तरह से सेट करने के लिए बहुत अच्छा साबित हो सकता है। 

 

11. सर्काडियन इंटरमिटेंट फास्टिंग- 

इसके लिए भी आप किसी डाइटीशियन की मदद से अपने लिए फास्टिंग प्लान बना सकते हैं। ये सर्काडियन रिदम को ठीक करने के लिए किया जाता है। आपके बॉडी क्लॉक के हिसाब से ही शरीर डिटॉक्स होता है।

 

आपको जिस तरह का उपवास सूट करता है आप उसे कर सकते हैं। एक बात जरूर ध्यान रखें कि आप कुछ भी ट्राई करने से पहले अपने डाइटीशियन से जरूर बात कर लें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। उपवास करें, लेकिन सावधानी के साथ अपनी हेल्थ को ध्यान में रखकर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरीज पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।