हर सुबह हम उठते हैं और सोशल मीडिया पर अपडेट्स देखना शुरु कर देते हैं। इसके बाद हम फटाफट अपना नाश्ता लेते हैं और अपने रोजमर्रा के कामों की शुरुआत कर देते हैं। दिनभर में हम अपने एंटरटेनमेंट के लिए कई तरह के प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस बारे में हम शायद ही सोचते हैं की बहुत सारी एक्टिविटीज हम किसी एडिक्शन की वजह से कर रहे होते हैं। उदाहरण के लिए हम हेल्दी खाना चाहते हैं, लेकिन जैसे ही तेज भूख लगने शुरु होती है तो हम फास्ट फूड के लिए की तरफ आकर्षित होने लगते हैं। इसके बाद हम बर्गर, पिज्जा, नूडल्स जैसी कोई भी चीज खा लेते हैं। एडिक्शन या लत एक मनोवैज्ञानिक समस्या है, जो हमें किसी केमिकल या द्रव्य को लेने या फिर किसी तरह की एक्टिविटी में इन्वॉल्व होने के लिए मजबूर कर देती है। इसकी वजह से हमारे शरीर को नुकसान पहुंच सकता है और हमारी दिनचर्या भी प्रभावित हो सकती है। सिर्फ नशीली दवाएं और शराब ही एडिक्शन के तहत नहीं आते। इसमें और भी बहुत सारी चीजें शामिल होती हैं, जिससे जिंदगी प्रभावित हो सकती है। ऐसे ही कुछ एडिक्शंस के बारे में आपको जरूर जानना चाहिए ताकि आप हेल्दी रहें और अपने रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकें।

फास्ट फूड

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फास्ट फूड आमतौर पर बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को पसंद आता है, लेकिन कब यह हमारी लत बन  जाता है, हमें पता भी नहीं चलता। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज ने फूड पर एक स्टडी की और पाया कि higher socio-economic group से आने वाले 12 से 18 साल के बच्चों में जंक फूड खाने की चाह 48 फीसदी ज्यादा था, जबकि lower socio-economic group की दिलचस्पी सिर्फ 6 फीसदी पाई गई। यह फर्क इसलिए दिखाई दिया क्योंकि फास्ट फूड की कीमत भी ज्यादा होती है और गरीब तबके से आने वाले परिवारों के लिए इसका खर्च उठाना संभव नहीं होता। फास्ट फूड की वजह से डायबिटीज और ओबिसिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

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शॉपिंग

इंडियाना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर Ruth Engs के अनुसार शॉपिंग करना लोगों को काफी ज्यादा पसंद आता है, क्योंकि इससे उन्हें अच्छा फील होता है। शॉपिंग करते हुए endorphins और dopamine रिलीज होते हैं, जिससे इंसान खुश होता है। यह बहुत एडिक्टिव फीलिंग होती है।

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शॉपिंग करते हुए महिलाएं अपनी हेल्थ और घर से जुड़े तनाव भूल जाती हैं, लेकिन बहुत ज्यादा शॉपिंग करने से महीने का बजट बिगड़ सकता है और ज्यादा महत्वपूर्ण चीजों के लिए पैसों की कमी हो सकती है। हेल्थ से लेकर राशन और घर की व्यवस्था से जुड़ी किसी भी तरह की इमरजेंसी जरूरतों के लिए इमरजेंसी फंड होना बेहद जरूरी है, लेकिन शॉपिंग की लत लग जाने पर इस तरह की क्राइसिस का सामना करना पड़ सकता है।

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वीडियो गेम्स

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने साल 2018 में गेमिंग डिसऑर्डर को International Classification of Diseases में शामिल किया। पारंपरिक तौर पर इन्हें इस तरह से डिजाइन ही किया गया है इनकी लग जाना स्वाभाविक है। आज के समय में Candy Crush Saga, Clash Royale, Pokémon GO, Rayman Adventures और Limbo जैसे गेम्स काफी ज्यादा लोकप्रिय हैं और ये एडिक्टिव नेचर के हैं। इस तरह के गेम्स खेलते हुए दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है, लेकिन इन्हें बहुत ज्यादा खेलने पर दिमागी सेहत प्रभावित हो सकती है। इसकी लत लग जाने पर अगर किसी कारणवश ऐसे गेम ना खेल पाएं तो चिंता, बोरियत या बहुत ज्यादा दुखी होने जैसे लक्षण नजर आने लग जाते हैं। 

प्लास्टिक सर्जरी

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बहुत सी महिलाओं को बॉडी शमिंग का शिकार होना पड़ता है, जिसकी वजह से उन्हें लगता है कि उनके शरीर में कोई कमी है और इस कारण वे हीन भावना से ग्रस्त हो जाती हैं। ऐसी महिलाएं बेस्ट लुक पाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराने के बारे में सोचती हैं, लेकिन मुश्किल तब होती है जब प्लास्टिक सर्जरी कराने के बाद भी वे संतुष्ट नहीं होती। यह समस्या Body Dysmorphic Disorder को जन्म देती है जिसमें इंसान को अपने शरीर में काल्पनिक कमियां नजर आने लगती हैं। पतले होंठों को लेकर भी बहुत सी महिलाएं परेशान हो जाती हैं और सेलेब्रिटीज आकर्षक होंठ पाने की चाह में वे लिप फिलर्स का इस्तेमाल करती हैं।

इंटरनेट सर्फिंग

बहुत से लोग आदतन इंटरनेट सर्फिंग करते रहते हैं। हर वक्त कुछ नया देखने की चाह में लोग लगातार इंटरनेट सर्फिंग करते हैं और वर्चुअल लाइफ में ही बने रहना चाहते हैं। इसकी वजह से लोग अपने रोजमर्रा के काम नहीं करते, खानपान पर ध्यान नहीं देते और उनकी सोशल स्किल्स भी प्रभावित होती हैं। इंटरनेट का एडिक्शन होने पर लोग डिप्रेशन के शिकार हो सकते है। इंटरनेट कनेक्शन बंद होने पर वे परेशान हो सकते हैं या बहुत ज्यादा गुस्सा हो सकते हैं।