बदलते वक्त के साथ हमारी जीवनशैली में भी बहुत बदलाव आया है। आज के समय में रहने का तरीका, खासकर की इस पैनडेमिक फेज में, रहने से हममें से अधिकांश लोग चिंता और तनाव से घिरे हैं। आयुर्वेदाचार्य हरिकृष्ण वैद्य कहते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार, एंग्जाइटी नर्वस सिस्टम और वात दोष का डिसऑर्डर है।

क्या है एंग्जाइटी

anxiety symptoms

एंग्जाइटी में इंसान घबराहट, चिंता और उन चीजों के लिए खासकर नर्वस होता है, जिस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। यह डर और घबराहट की भावनाओं को पैदा करता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो आप अवसाद से घिर सकती हैं। हालांकि थोड़ा बहुत स्ट्रेस होना आम बात है, जो जरूरी भी है, क्योंकि यह आपको मोटीवेट करने में मदद करता है। लेकिन अगर यह आपके दैनिक कार्यों पर असर डालने लगे, तो यह आपको शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत बीमार कर सकता है।

एंग्जाइटी के लक्षण

इसके मुख्य लक्षण में गिल्ट, निराशावादी होना, किसी चीज में मन न लगना या किसी गतिविधि को करते हुए सुखद महसूस न करना, मूड स्विंग्स, उदासीनता, ज्यादा खाना, भूख न लगना, वजन बढ़ना या वजन घटना शामिल है। यह किसी भी व्यक्तिगत परेशानी की वजह से उत्पन्न हो सकते हैं जैसे सडन शॉक, मेडिकल ट्रीटमेंट, फिजिकल, सेक्सुअल और इमोशनल एब्यूज।

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आयुर्वेद कैसे है फायदेमंद

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कुछ ऐसे आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जो आपके विचलित मन को शांत करने में, एंग्जाइटी और स्ट्रेस की स्थिति में मदद कर सकती हैं। इनमें कुछ हैं-

ब्राह्मी-ब्राह्मी एक प्राचीन भारतीय जड़ी-बूटी है, जो करीब 3000 सालों से उपयोग में लाई जा रही है। इसका एक्सट्रैक्ट याद्दाश्त बढ़ाने और स्ट्रेस से जूझ रहे लोगों के लिए काफी फायेदमंद है। इसके तेल का उपयोग करने से या फिर इसे चाय या कैप्सूल के रूप में भी लिया जा सकता है। चिंता, अवसाद, घबराहट से गुजर रहे लोगों के लिए यह औषधि बड़े काम की है।

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मंदुकपर्णी- यह एक खूश्बूदार जड़ी-बूटी है, जो मेंटल एलर्टनेस में मदद करती है। अगर इसका इस्तेमाल नियमित रूप से किया जाए, तो यह मेमोरी बढ़ाने में मदद करती है। इतना ही नहीं, यह जड़ी-बूटी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी काम करती है। आप इसका एक कैप्सूल दिन में एक या दो बार लेने से मेंटल एलर्टनेस को इंप्रूव करेगा।

वाचा- यह एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग दवाई के रूप में प्राचीन समय से चलता आ रहा है। इसके असरदार फायदों को ऋषियों द्वारा खोजा गया ता। आयुर्वेद में, वाचा को एक रिजुवेनेटिंग हर्ब के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आपके नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है। यह स्वाद में कड़वा होता है और इसे सूखाकर ही उपयोग में लाया जाता है। इसे ब्रेन टॉनिक के नाम से जाना जाता है। यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है और नॉजिया होने से रोकता है।

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अश्वगंधा- यह एक हर्बल मेडिसन है। ब्लड शुगर, जलन, मूड स्विंग्स, स्ट्रेस और एंग्जाइटी के लिए यह काफी असरदार सिद्ध होती है। कुछ शोध में पाया गया है कि मन को शांत करने के लिए अश्वगंधा का इस्तेमाल करना फायदेमंद रहा है।

भ्रिंगराज- भ्रिंगराज की चाय आपके शरीर को डिटॉक्सीफाई करती है और आपके मस्तिष्क में ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाकर उसे ऊर्जा से भरती है। आप इसके तेल को सिर पर लगा सकती हैं, इसके आपके मन और शरीर पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। सिरदर्द और माइग्रेन की स्थिति में भी भ्रिंगराज का तेल लगाने से काफी आराम मिलता है।

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के फायदे तभी हैं, जब आप उन्हें एक सीमित मात्रा में लें। इसलिए इनका उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

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