अच्छा! अगर आपसे यह सवाल किया जाए कि गर्मी या बरसात के दिनों में मच्छर और कीड़े सबसे अधिक काटते हैं या फिर किसी अन्य मौसम में। शायद, कुछ देर सोचने के बाद आपका जवाब बरसात और गर्मी का मौसम ही हो। खैर, बदलते मौसम में मच्छरों और कीटों का आतंक कुछ अधिक ही बढ़ जाता है। ऐसे में इनके कटाने के बाद स्किन एलर्जी होने का खरता रहता है। कभी-कभी इनके काटने से स्किन का वह हिस्‍सा लाल निशान हो जाता है जिसमें बहुत अधिक खुजली भी होने लगती है। 

ऐसे में आप इस समस्या से हमेशा ही परेशान रहती हैं, तो इस लेख को आपको ज़रूर पढ़ना चाहिए। क्योंकि, इस संबंध में आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर रेखा राधामोनी हमें बात रही हैं कि आयुर्वेद के माध्यम से मच्छर और कीटों काटने से होने वाली परेशानी से कैसे बच सकते हैं, तो आइए जानते हैं।

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बिल्वादि गुटिका क्या है?

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उपाय जानने से पहले ये जान लेते है कि मच्छरों और कीटों को काटने की परेशानी को दूर करने वाला बिल्वादि गुलिका/बिल्वादि गुटिका क्या है? दरअसल, यह एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे अन्य कई और नाम से भी जाना जाता है। यह औषधि मुख्य रूप से मच्छरों के काटने, चूहे के काटने, छोटे-छोटे कीड़ों के काटने, मकड़ी काटने आदि कीटों के काटने पर उपचार में प्रयोग की जा सकती है। 

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कैसे बनता है बिल्वादि गुटिका

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बिल्वादि गुटिका कई चीजों से तैयार एक प्राचीन औषधि है। इसे बनाने के लिए बेल, तुलसी, ब्लैक पेपर, हल्दी, आंवला, अदरक, पिप्पली आदि कई चीजों का इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे घर पर बनाना आसान नहीं है फिर भी कई महिलाएं इसे आसानी से बना भी लेती हैं। लेकिन, इसके लिए किसी डॉक्टर से सलाह लेना भी बहुत ज़रूरी है। 

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बिल्वादि गुटिका इस्तेमाल करने का तरीका 

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बिल्वादि गुलिका कई रूप में बाज़ार में उपलब्ध है। पेस्ट या फिर टेबलेट के रूप में किसी भी आयुर्वेदिक दुकान में आसानी से मिल जाते हैं। डॉक्टर रेखा राधामोनी के अनुसार इसके पेस्ट में एक से दो चम्मच शहद मिलाकर मच्छर और कीटों ने जहां कटा है उस जगह लगाने से जल्दी ही आराम मिल सकता है। इसके अलावा इसके इस्तेमाल से मच्छर और कीटों के घाव भी जल्दी भर सकते हैं। हालांकि, यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि इस आयुर्वेदिक उपाय को आप अपनाती है या नहीं। ये ज़रूरी नहीं कि किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को आंखें बंद करके अपना लिया जाए। 

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