चिलचिलाती धूप के बाद मानसून बेहद जरूरी राहत के साथ आता है। लेकिन तापमान में बदलाव और आर्द्रता में वृद्धि के साथ, बारिश का मौसम एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याओं को भी घर लाता है।इस समय के दौरान त्वचा की एलर्जी सबसे आम समस्याओं में से एक है। जिन लोगों को राइनाइटिस होने का खतरा होता है, यानी बार-बार छींकने और/या खाने से एलर्जी के साथ नाक बहने वाली एलर्जी इस मौसम में त्वचा पर इसी तरह की खुजली वाली प्रतिक्रियाओं से प्रभावित होती हैं। इसका मुख्य कारण हवा में उड़ने वाले पोलेन्स और धूल का बढ़ना है।

इसके साथ ही जानी-मानी डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. दीपाली भारद्वाज का कहना है, 'यह एलर्जी मानसून के साथ-साथ कोविड की वजह से भी बढ़ रही हैं। कोविड के दौरान हमने ऐसे सप्लिमेंट्स लिए हैं, जो बहुत हैवी मेटल कंटेन करते हैं। आयुर्वेदिक के साथ-साथ एलोपेथिक दवाइयां और सप्लीमेंट लेने वाले लोग भी स्किन एलर्जी की समस्या से परेशान हैं।' इस मौसम में होने वाली कुछ आम समस्याएं भी हैं, तो चलिए उनके बारे में और उनसे बचने के कुछ टिप्स भी जानें।

एक्जिमा

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मानसून के दौरान एक्जिमा आम है क्योंकि अचानक मौसम में बदलाव और तापमान में गिरावट से त्वचा की संवेदनशीलता में बदलाव आता है। सामान्य प्रकार के एक्जिमा निचले पैरों या हाथों और पैरों को प्रभावित करने वाले होते हैं। एक्जिमा को रोकने और त्वचा की रक्षा करने का सबसे अच्छा तरीका इसे हाइड्रेट और मॉइश्चराइज करना है।

रैशेज

बढ़ती नमी और तापमान में कमी के कारण मानसून अपने साथ कई अलग-अलग चकत्ते लेकर आता है। इन्हीं में कुछ रैशेज ऐसे होते हैं, जो इस मौसम में सबसे ज्यादा देखा जाता है। जिन लोगों राइनाइटिस या छींकने जैसी एलर्जी होती हैं, उन लोगों में ये रैशेज भी बहुत देखे जाते हैं।

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हाइव

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शरीर में पित्ती लाल, खुजलीदार उभरे-उभरे धब्बे होते हैं जो त्वचा की प्रतिक्रिया के कारण होते हैं। ये आकार में अलग-अलग होते हैं और कभी भी निकलते हैं फिर फीके होने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि रिक्शन्स अपना एक कोर्स चलाती है। इन्हें ओल्ड हाइव माना जाता है, लेकिन यदि वेल्ड छह सप्ताह से अधिक समय तक दिखाई देते हैं, तो यह महीनों या वर्षों में बार-बार आते हैं।

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रिंगवर्म

यह एक फंगल संक्रमण है जो शरीर को प्रभावित करता है और लाल छोटे-छोटे छल्ले जैसा दिखता है। इसमें बहुत ज्यादा खुजली हो सकती है। यह एथलीट फुट के समान है। इसके लिए ओरल और सामयिक एंटी-फंगल दवाओं के साथ उचित उपचार की आवश्यकता होती है और अगर आप किसी भी तरह से इस दाद के संक्रमण से पीड़ित हैं, तो आपको किसी भी दवाई को खुद से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह ऐसे में गंभीर हो सकता है।

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वील

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त्वचा में एक उभरा हुआ, खुजली वाला एरिया जो कभी-कभी एलर्जी के साइन दिखाता है, तो समझिए कि आपको वील है। इसमें सभी दाने एक जैसे नहीं होते। वे अपने आसपास की त्वचा की तुलना में अधिक लाल या पीले हो सकते हैं। इतना ही यह एलर्जी अलग-अलग तरह की हो सकती है, जैसे- गोल या फ्लैट-टॉप हो सकते हैं।

बरसात के मौसम में स्किन एलर्जी से बचाएंगे ये टिप्स-

  • कोशिश करें कि अपने पालतू जानवरों से दूर रहें क्योंकि उनके बालों के झड़ने से भी आपकी एलर्जी  ट्रिगर हो सकती है।
  • नहाने के बाद नियमित रूप से मॉइश्चराइजर का उपयोग करें। इससे आपकी संवेदनशील त्वचा पर एक सुरक्षात्मक परत बनेगी। 
  • नहाते वक्त ग्लिसरीन युक्त साबुन का इस्तेमाल करें। यह त्वचा को नरिश करेगा।
  • अपने घर को नियमित रूप से साफ करें। ऐसे मौसम में कार्पेट रखने से बचें, क्योंकि कार्पेट में धूल-मिट्टी ज्यादा रहती है।

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