इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने वाले ये टॉप 10 टिप्स एक्सपर्ट से जानें

जिन लोगों की इम्यूनिटी मजबूत होती है, उन लोगों को छोटी-मोटी बीमारियां बिल्कुल भी परेशान नहीं करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इम्यून सिस्टम हमारे शरीर का रक्षा कवच है जो बीमारियों का कारण बनने वाले वायरस, बैक्टीरिया समेत उन तमाम रोगाणुओं के सामने ढाल बनता है। यह सिस्टम कोई एक सेल नहीं, बल्कि कई सेल्स का समूह है और शरीर का बाहरी डिफेंस सिस्टम भी है। इसलिए लोग अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के उपायों की खोज में रहते हैं। साथ ही कोरोना वायरस से बचने के लिए भी एक्सपर्ट साफ-सफाई का ध्यान रखने और इम्यून सिस्टम यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग इसकी चपेट में जल्दी आ जाते है। इसलिए इम्यूनिटी को मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन हर किसी मन में यही सवाल आता है कि इम्यूनिटी को मजबूत कैसे बनाया जाए? अगर आपको भी यही सवाल परेशान करता है तो आइए डॉक्टर वैद्याज़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्जुन वैद्य से इस बारे में जानें।
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1. प्राकृतिक आहार लें

जी हां, इम्यून फंक्शन के लिये विटामिन ‘सी’ महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अकेली सामग्री नहीं है, जिसकी आपको जरूरत है। विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और हेल्दी फैट समेत सभी अनिवार्य पोषक-तत्व इम्यून फंक्शन में अहम भूमिका निभाते हैं। अध्ययन दर्शाते हैं कि सूक्ष्म या बड़े पोषक-तत्वों की कमी से इम्यून फंक्शन विकृत हो सकता है। ऐसी कमियों का प्रमुख कारण केवल कम भोजन लेना नहीं, बल्कि बुरा भोजन लेना भी है। प्रोसेस्ड फूड पोषक-तत्वों की कमी और ज्यादा कैलोरी वाले होते हैं। उनमें शुगर, संतृप्त वसा और कृत्रिम तत्व होते हैं, जो सूजन उत्पन्न करते हैं। ऐसी स्थिति में, इम्यून सिसटम संक्रमणों से लड़ने में कम प्रभावी हो जाता है। इसके लिये सर्वश्रेष्ठ काम है पूरी तरह आयुर्वेदिक भोजन लेना।
2. शरीर में पानी की कमी न होने दें

इम्यूनिटी के मामले में हम पानी के बारे में कम ही सोचते हैं। कई आयुर्वेदिक विशेषज्ञ इस गलती को प्रकाश में लाते हैं। पानी सेल्स और चयापचय की कार्यात्मकता के लिये महत्वपूर्ण है। इस कारण प्रतिरोधक क्रिया की कमजोरी और इंफेक्शन को लेकर संवेदनशील होना आम बात है। जब शरीर में पानी का लेवल कम होता है, जो इसका सीधा प्रभाव श्वसन और पाचन मार्ग की म्यूकस मेम्ब्रेन पर पड़ता है। आपके श्वसन मार्ग में म्यूकस की परत कीटाणुओं को पकड़कर छानने में मदद करती है, इससे पहले कि वे इंफेक्शन उत्पन्न करें। इसलिए, म्यूकस मेम्ब्रेन में विकृति से इंफेक्शन का जोखिम बढ़ सकता है।
3. पर्याप्त नींद लें

आयुर्वेद में नींद के अनुशासित समय के महत्व पर जोर दिया गया है। दुर्भाग्य से, हममें से अधिकांश लोग इस सलाह को भूल जाते हैं। अभी इस पर ध्यान देना लाभदायक होगा, खासकर कोविड-19 के जोखिम वाले समय में। कई अध्ययनों ने यह साबित किया है कि पर्याप्त नींद का इम्यून फंक्शन पर सीधा प्रभाव होता है। कुछ अध्ययन कम नींद लेने वाले लोगों में वायुजनित और श्वसन सम्बंधी संक्रमण का बढ़ा हुआ जोखिम दर्शाते हैं। अगर आपको नींद लेने में कठिनाई है, तो आप इसके लिये प्राकृतिक आयुर्वेदिक दवाएं ले सकते हैं, जैसे ब्राह्मी और जटामांसी।
4. धूम्रपान छोड़ें और अल्कोहल से बचें
यह बात आप कई बार सुन चुके हैं, लेकिन इसे दोहराना जरूरी है। सिगरेट आपके लिये बुरी है और कोरोनावायरस का जोखिम भी बढ़ा सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों को आशंका है कि धूम्रपान से कोविड-19 की जीवन के लिये खतरनाक जटिलताओं, जैसे निमोनिया का जोखिम बढ़ता है। विगत वर्षों के अध्ययन दर्शाते हैं कि धूम्रपान (ई-सिगरेट भी) फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है और एंटीबॉडी का बनना कम करता है। इससे इंफेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है, खासकर श्वसन सम्बंधी संक्रमण का खतरा सबसे अधिक हो जाता है। अत्यधिक अल्कोहल लेने से सूजन बढ़ता है और इम्यून फंक्शन कमजोर होती है।
5. एक्टिव रहें

आयुर्वेद में शारीरिक गतिविधि को अच्छे स्वास्थ्य के लिये जरूरी माना गया है। अभी चूंकि आपके जिम, पार्क और स्विमिंग पूल बंद हो सकते हैं, तो इस जरूरत की उपेक्षा नहीं की जा सकती। घर पर एक्सरसाइज करें, हल्की गतिविधियों से भी फायदा मिल सकता है, जैसे स्क्वाट, स्किपिंग, या डांसिंग। सबसे अच्छी चीज है योग। कई तरह के शोध दर्शाते हैं कि नियमित शारीरिक गतिविधि से एंटीबॉडी उत्पादन और प्रतिरोधक क्रिया बेहतर होती है।
6. सही सप्लीमेंट्स लें
सभी प्राकृतिक सप्लीमेंट्स इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद नहीं करते हैं, लेकिन कुछ जरूर करते हैं। यह ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है कि सभी विटामिन और खनिज सप्लीमेंट्स प्राकृतिक नहीं होते हैं; अधिकांश में सिंथेटिक तत्व होते हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक चीजों को अत्यंत प्रभावी माना जाता है, क्योंकि वे जड़ीबूटियों से बनाई जाती हैं। आप इम्यूनिटी बढ़ाने के लिये अदरक, लहसुन, तुलसी, आंवला और पुदीना ले सकते हैं। इम्यूनिटी को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाली अन्य चीजें हैं ज्येष्ठीमधु, गुडुची और अश्वगंधा। कुछ बूटियां अपने कच्चे स्वरूप में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन आप औषधियों के अर्क वाले सप्लीमेंट्स लेकर इन फायदों को प्राप्त कर सकते हैं।
7. अपना तनाव कम करें
इस सलाह को मानना आसान नहीं है, खासतौर से इस तनावपूर्ण समय में। दुर्भाग्य से, तनाव का स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव होता है। सूजन और जीवनशैली के रोगों का जोखिम बढ़ाने के अलावा यह इम्यूनिटी को कमजोर भी करता है। तनाव के स्तर को कम करने में ध्यान की भूमिका सबसे प्रभावी है। इससे हर स्थिति में, किसी भी समय, तुरंत राहत मिलती है। खुद को आनंद और शांति देने वाली अन्य गतिविधियों के लिये भी थोड़ा समय निकालना चाहिये। जरूरत हो, तो आयुर्वेद की अडप्टोजेनिक बूटियां, जैसे अश्वगंधा और ब्राह्मी स्थायी तनाव और चिंता (एंग्जाइटी) से राहत दे सकती हैं।
8. जल नेती करें
जल नेती से प्रत्यक्ष रूप से इम्यूनिटी नहीं बढ़ती है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिलती है। नेज़ल इरिगैशन की इस प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति के श्वसन सम्बंधी स्वास्थ्य पर लाभ प्रमाणित हैं। यह श्वसन सम्बंधी संक्रमण का जोखिम कम कर सकता है, जो वर्तमान संकट में सहायक होगा। जल नेती के बाद नास्या करना भी फायदेमंद होता है।
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9. प्राणायाम करें

आदर्श रूप से, प्राणायाम को योग और ध्यान की चर्या में शामिल करना चाहिये। इन यौगिक श्वास व्यायाम के श्वसन सम्बंधी और वायुजनित संक्रमण से बचाने में प्रमाणित लाभ हैं। कपालभाती और भ्रामरी जैसे प्राणायाम करने से फेफड़े मजबूत होते हैं, संक्रमणों और रोगों को रोकने की क्षमता बढ़ती है। सिर्फ इतना ही नहीं, इनसे तनाव भी कम होता है।
10. सकारात्मक सोचें
सकारात्मक चिंतन की शक्ति को सरलता से नकारा जा सकता है, लेकिन यह सलाह बुद्धिमत्तापूर्ण है। ऋषियों और गुरूओं ने लंबे समय तक सकारात्मक विचारों पर जोर दिया, लेकिन इसका स्वास्थ्य पर क्या लाभ होता है, यह प्रमाणित नहीं है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि युवावस्था में आशावादी रहने वालों का जीवन निराशावादी लोगों की तुलना में लंबा रहा। नकारात्मकता से चिंता और तनाव बढ़ता है और सबसे महत्वपूर्ण, यह प्रतिरोधक क्रिया को कमजोरी बनाती है। दूसरी ओर, शोध कहता है कि हंसने से इम्युनिटी बढ़ती है। इससे पुरानी कहावत को भी बल मिलता है कि ‘हंसी सबसे अच्छी दवा है’।
उपरोक्त बातों को समझने से यह स्पष्ट हो जाना चाहिये कि चिंता और घबराहट से हमारा कोई भला नहीं होता है। डॉक्टरों की सलाह पर चलें और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिये उपरोक्त सुझावों को आजमाएं। इस कठिन समय का सुदपयोग आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा खंगालने में करें- समय का उपयोग आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने और आपकी व्यक्तिगत विकास के लिये भी करें। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़े रहें।
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