कांग्रेस नेता सचिन पायलट भारत के सबसे कम उम्र के संसद सदस्यों में से एक हैं। वह राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। इन दिनों सचिन पायलट चर्चा में हैं, इसके पीछे राजस्थान में छिड़ी सियासी जंग है। दरअसल राजस्थान में कांग्रेस के अंदर एक बार फिर से उठा-पटक देखने को मिल रही है, जिसकी वजह से नेताओं के बीच बयानबाज़ी का दौर जारी है। वहीं युवाओं के बीच 42 वर्षीय सचिन पायलट काफ़ी मशहूर हैं, उन्होंने सिर्फ़ 25 साल की उम्र में कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी।

कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद वह राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते चले गए। महज 23 साल की उम्र में अपने पिता राजेश पायलट को खोने वाले सचिन पायलट राजनीति में आने के बजाय नौकरी करना चाहते थे। उनकी इच्छा थी कि वह भारतीय सेना में पायलट के तौर पर नौकरी करें, लेकिन एक्सीडेंट में पिता को खो देने के बाद उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया। बता दें कि सचिन पायलट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अबदुल्लाह की बेटी सारा से शादी की है। 

सारा पायलट और सचिन पायलट की लव स्टोरी

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सारा पायलट और सचिन पायलट के दो बच्चे हैं और दोनों अपनी हैप्पी लाइफ़ एन्जॉय कर रहे हैं। हालांकि शादी के बंधन में बंधना उनके लिए आसान नहीं था। कई अड़चनें आईं, लेकिन दोनों ने इस दौरान अपने रिश्ते को निभाए रखने की कोशिश की। सिमी ग्रेवाल को दिए इंटरव्यू में साचिन पायलट की पत्नी सारा ने बताया कि हमारे लिए आसान कुछ भी नहीं था, जब इस बारे में बात हुई तो सिर्फ़ हमारा परिवार ही नहीं बल्कि सचिन के परिवार से भी कई बातें सुनने को मिलीं। हमने तय कर लिया था कि हमें शादी करनी है, अब इसके लिए हमें दो या फिर पांच साल इंतज़ार करना पड़े तो करेंगे, लेकिन हालात सुधर नहीं रहे थे, बात वहीं अटकी हुई थी, जहां से शुरू हुई थी। ऐसे में हमने फ़ैसला किया कि ठीक है, अगर सबकुछ ऐसा ही चलने वाला है तो फिर शादी कर लेते हैं, क्योंकि हम अपनी ज़िंदगी में ख़ुशी चाहते थे।

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जब दोनों के रिश्ते के बारे में परिवार को चला पता

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भारत में धर्म और जातियों के नाम पर तलवारें निकल जाती हैं, ऐसे में दोनों की शादी पर सवाल उठना लाज़मी था। ऐसा इसलिए क्योंकि सारा मुस्लिम थीं और सचिन एक हिंदू। जब पिता को सारा और सचिन के रिश्ते के बारे पता चला तो उन्होंने इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया। दिक़्क़तें शुरू हुईं, जिसकी वजह से हमे लगने लगा था कि हम शादी कर ही ना पाएंगे। हालांकि सचिन ने अपने परिवार को मना लिया था, लेकिन सारा अपने परिवार को मनाने में असफल रहीं थीं। जबकि उनके परिवार में पिता और भाई दोनों ने ही लव मैरिज की है। पिता फारूक अबदुल्लाह ने जहां कैथोलिक क्रिश्चियन महिला से शादी की थी तो भाई उमर अब्दुल्ला ने सिख से। सारा के घर में धार्मिक कट्टरता जैसा कोई माहौल नहीं था, इसके बावजूद परिवार सचिन के साथ उनके रिश्ते को स्वीकर नहीं कर रहा था। सारा पायलट ने बताया कि हम दोनों के परिवार के बीच अच्छी दोस्ती थी, दोनों एक-दूसरे को जानते थे। सचिन को मेरी मां पसंद करती थीं, वह मेरी मां से मिलने आया करते थे। सारा ने बताया कि हम चीज़ों को सही तरीक़े से कर रहे थे, क्योंकि मुझे पता था कि यह शख़्स मेरे लिए ख़ास है। वहीं सचिन ने बताया कि वह डेस्टिनी में विश्वास रखते हैं, यह हमारी लाइफ़ है, अगर हम ख़ुश हैं तो आपसे प्यार करने वाले लोग भी ख़ुश होंगे।

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सारा और सचिन की प्रेम कहानी की शुरुआत ऐसे हुई थी

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सारा पायलट और सचिन पायलट के परिवार के बीच अच्छे संबंध होने की वजह से दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते थे, लेकिन इनकी प्रेम कहानी लंदन से शुरू हुई। दोनों एक समारोह में मिले थे, इस बीच दोनों ने एक-दूसरे को लाइक करना शुरू कर दिया। तब सचिन अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत आ चुके थे, हालांकि सारा तब भी लंदन में पढ़ाई कर रही थीं। एक-दूसरे से दूर होने के बावजूद दोनों के बीच प्यार की कमी नहीं बल्कि रिश्ता और भी गहरा होता चला गया। इंटरव्यू में सारा ने बताया कि हम फ़ोन, मैसेज, और ईमेल से एक-दूसरे को कॉन्टैक्ट करते थे, मगर इस वजह से बिल बहुत ज़्यादा आ जाता था।

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शादी के कुछ महीने बाद सारा और सचिन के परिवार के बीच दूर हो गई थी कड़वाहट

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फारूक अबदुल्लाह बेहद खुले विचारों के माने जाते थे, जब उन्हें इस रिश्ते के ख़िलाफ़ देखा गया तो लोग बहुत हैरान हुए। मीडिया रिपोर्ट्स की माने ते उस वक़्त फारूक अबदुल्लाह को डर था कि बेटी की शादी हिंदू धर्म में किए जाने से कहीं कश्मीर के लोग नाराज़ ना हो जाएं। यही नहीं ऐसा भी कहा गया था कि फारूक बेटी की शादी के बाद उनसे रिश्ता तोड़ लेंगे, लेकिन हुआ इसके उलट। शादी के कुछ महीने बाद ही फारूक के परिवार की कड़वाहट दूर हो गई थी। वहीं शादी के समय सचिन एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर रहे थे इसके कुछ महीनों बाद ही लोकसभा के चुनाव हुए, जिसमें उन्हें राजनीति में उतरना पड़ा। साल 2004 के लोकसभा चुनावों में जब वह दौसा से मैदान में उतरे तो उन्होंने बड़ी जीत हासिल की। जिसके बाद फारूक ने भी उन्हें अपने दामाद के रूप में स्वीकार कर लिया। बता दें कि सारा एक योगा इंस्ट्रक्टर हैं, इसके अलावा वह महिलाओं की उन्नति के लिए लगातार काम करती रहती हैं।

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