शादियों का सीजन चल रहा है। शहनाई की गूंज चारों ओर से सुनाई दे रही है। जाहिर है, शादी हर व्यक्ति के जीवन में एक बड़ा उत्सव होता है। यह एक ऐसा उत्‍सव है, जो पूरी जिंदगी ही व्यक्ति के जीवन में चलता रहता है। आप इसे मिठास भरे रिश्ते का उत्‍सव कह सकते हैं। किसी भी शादी में एस्‍ट्रोलॉजी की भी बड़ी भूमिका होती है, फिर चाहे शादी से पहले कुंडली में गुणों का मिलान हो या फिर शादी के बाद गृहस्थ जीवन में सुख शांति के लिए पूजा-पाठ करना हो, ज्‍योतिष शास्‍त्र हर जगह बड़ी भूमिका में नजर आता है। 

ज्‍योतिष शास्‍त्र में शादी-विवाह के लिए काफी कुछ बताया गया है। यह मनुष्य के जीवन से जुड़े प्रमुख संस्कारों में से एक है और इससे जुड़े कई रीति रिवाज हैं। मगर ज्‍योतिष शास्‍त्र में नवग्रहों के बारे में बताया गया है, जो शादी और विवाह पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं। 

शादी पर नवग्रहों का क्या प्रभाव पड़ता है इस पर हमने फेमस एस्ट्रोलॉजर रिद्धि बहल से बात की। वह कहती हैं, 'सभी ग्रहों का शादी पर कुछ न कुछ असर जरूर पड़ता है, मगर कुछ विशेष रूप से शादी को प्रभावित कर सकते हैं।'

इस बारे में रिद्धि जी ने हमें विस्‍तार में जानकारी भी दी है- 

शादी के बाद संतान 

बृहस्पति ग्रह लड़की की कुंडली में मजबूत होना चाहिए। इससे पति के बारे में और संतान के बारे में पता चलता है। अगर बृहस्पति नीच का है, तो पति का स्वभाव बुरा हो सकता है। संतान सुख पाने में भी दिक्कत आ सकती है। शादी में पति की ओर से ज्‍यादा दिक्‍कत होती है। 

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शादी के बाद सेहत 

  • मंगल ग्रह भी शादी में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। मंगल की कृपा जब तक नहीं होगी तब तक शादी नहीं हो सकती है। मगर इससे डरना नहीं चाहिए क्योंकि इसके उपाय भी हैं, जिन्‍हें करना जरूरी है क्योंकि यह ग्रह लड़का लड़की की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है। शादी के बाद साथी से तालमेल 
  • मन का मिलना बहुत जरूरी है क्योंकि शादी में मन का मेल जरूर होना चाहिए। इसके लिए चंद्र ग्रह को देखा जाता है। चंद्रमा मन का कारक होता है। इसका मेल खाना बहुत जरूरी है, तब ही आपसी तालमेल सही रहता है। 
  • शुक्र ग्रह शादी का ही कारक है। शुक्र की स्थिति लड़का और लड़की की कुंडली में मजबूत होनी बहुत जरूरी है। 
 
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कब नहीं हो सकती है शादी 

  • शादी के लिए राहु का मजबूत होना भी बहुत जरूरी है। वहीं केतु कुंडली में न ही हो तो अच्छा है क्योंकि केतु मजबूत होने पर व्‍यक्ति की दी में रुचि खत्म हो जाती है। 
  • सूर्य ग्रह भी कुंडली में अगर मजबूत नहीं है, तो शादी में दिक्कत आ सकती हैं। क्योंकि सूर्य ग्रह आत्मा का ग्रह है। अगर आत्‍मा का मिलन नहीं होगा तो शादी कैसे होगी। 
  • अगर शनि कुंडली के सप्तम भाव में हैं, तो शादी में देरी होती है। शनि ग्रह मैरिड लाइफ को नुकसान नहीं पहुंचाता है, बस शादी से जुड़ी हर चीज की गति को धीमा कर देता है। 

 

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