कॉलेज जाने का मतलब किताबों में ही उलझे रहना नहीं होता। ना ही कॉलेज का मतलब मौज-मस्ती करना, नए दोस्त बनाना और लोगों को पहचानना तक ही सीमित है। कॉलेज में हम खुद की पर्सनालिटी को विकसित करते हैं, जीने का सलीका सीखते हैं साथ ही जिंदगी में मुसीबतों से जूझना सीखते हैं। सरल शब्दों में कहें तो कॉलेज में जिंदगी को जीने की कला सीखी जाती है। आइए जानते हैं हम कॉलेज जाकर क्या-क्या सीखते हैं-
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1. कॉलेज लाइफ आपको गलतियों से सीखना सिखाती है। शायद ही दुनिया में कोई इंसान ऐसा हो जो गलतियां करे बिना बड़ा बना हो। इसलिए गलतियां करने से घबराने की जरुरत नहीं बल्कि उनसे सबक लेकर आगे बढ़ना ही कॉलेज लाइफ है।
2. कॉलेज लाइफ में खुद को बेहतर और जिम्मेदार इंसान बनाने की कला सीखी जाती है। घर-परिवार में आप जिम्मेदारियों को किस तरह निभा पा रहे हैं यह आपकी कॉलेज के दिनों में ली गई शिक्षा से अंदाजा लग जाता है। इसलिए जिम्मेदार बनें।
3. कॉलेज लाइफ आपको जरुरत पड़ने पर अकेले रहना और जिंदगी गुजारना सिखाती है, विपरीति परिस्थितियों में जूझना सिखाती है। इतना ही नहीं, अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना भी सिखाती है।
4. किताबों में घुसे रहना, उन्हें रट लेना ही कॉलेज लाइफ का मकसद नहीं है। खुद के अंदर अच्छे गुणों को विकसित करना भी जरुरी है। कॉलेज लाइफ हमें ईमानदारी के साथ जिंदगी जीना सिखाती है और अपनी गलतियों पर पश्चाताप करना भी।
5. कॉलेज में हर तरह के लोगों से मिलना होता है। कॉलेज में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोगों से रू-ब-रू होने का मौका मिलता है। किन लोगों से कैसे निपटना है यह कॉलेज के दिनों में अच्छी तरह समझा जाता है। इतना ही नहीं, किसी के दबाव में ना आकर अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना भी इसी दौरान सीखते हैं।
6. हर कोई कॉलेज के दिनों में पैसे का सही इस्तेमाल करना सीख जाता है। जब थोड़े-थोड़े पैसे जोड़कर मूवी देख आते हैं। कभी बांटकर मैगी तो कभी चाउमीन का स्वाद ले लेते हैं। कभी-कभी तो मांगकर कपड़े पहनना भी इन्हीं दिनों में सीखा जाता है। यही आदत जीवन में पैसे की अहमियत सिखा देती है। अगर आप भी कॉलेज के दिनों में ऐसा ही करते थे जो जिंदगी में आप अपने जीवन के सबसे बड़े फाइनेंसियल एडवाइजर बन सकते हैं, क्योंकि आपको इमरजेंसी में पैसे की उपयोगिता समझ आ गई।
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7. मुसीबतें भी जिंदगी के साथ चलती हैं। इन्हें ऐसा ही समझिए जैसे एक ही सिक्के के दो पहलू। कॉलेज के दिन भी रोज एक जैसे नहीं रहते। कभी प्रोजक्ट पूरे नहीं होते तो कभी किसी सहेली के साथ मुसीबत में साथ निभाना होता है। कॉलेज के दिनों की इसी तरह की झंझावातों से जूझते हुए हमें जीवन में मुसीबतों से लड़ना आ जाता है।
8. सबसे अंत में, अगर किसी को दिल की बात कहनी हो या कैसे अपनी जुबां की बात उनकी जुबां पर लाई जाए, यह सब कॉलेज में ही सीखते हैं। यही आगे जाकर सफल दाम्पत्य जीवन गुजारने में काम आती है।
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