भारत की स्वर कोकिला कही जाने वाली लता मंगेशकर की मधुर आवाज पिछले सात दशकों से भारतीय संगीत प्रेमियों को इंस्पायर करती रही है। चाहें उनके रोमांटिक गानें हों या भक्ति संगीत वाले, देश भक्ति वाले गाने हों या फिर लोक संगीत, उनकी आवाज ने हर भारतीय के दिल को छुआ है। लता मंगेशकर के इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए नरेंद्र मोदी सरकार उन्हें विशेष सम्मान से नवाजेगी। सूत्रों के अनुसार लता मंगेशकर को उनके 90वें जन्मदिन पर 'डॉटर ऑफ द नेशन' से सम्मानित किया जाएगा। केंद्र सरकार 28 सितंबर को यानी कि उनके 90वें जन्मदिन पर लता मंगेशकर को यह सम्मान देगी। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस खास मौके के लिए जाने-माने गीतकार और कवि प्रसून जोशी ने लता जी के लिए खास गीत लिखा है। 

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प्रधानमंत्री मोदी हैं लता मंगेशकर के फैन

lata mangeshkar with narendra modiinside

देश के बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज लता मंगेशकर की मधुर आवाज के प्रशंसक हैं। इनमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। लता मंगेशकर ने साल 1940 में फिल्मों में गायिकी से अपने करियर की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उनके गाने इतने चर्चित होने लगे कि ज्यादातर बॉलीवुड फिल्मों में उनकी ही कर्णप्रिय आवाज सुनाई देती थी। लता मंगेशकर को अपने इस योगदान के लिए 1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और साल 2001 में भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। लता मंगेशकर को इसके अलावा भी देश के कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया है। लता मंगेशकर ने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं में भी गीत गाएं हैं। लता मंगेशकर को सम्मानित करके केंद्र सरकार ना सिर्फ उनकी प्रतिभा की सराहना कर रही है, बल्कि महिला सशक्तीकरण की मुहिम को भी बढ़ावा दे रही है। 

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लता मंगेशकर ने 40 के दशक में की थी गाने की शुरुआत

lata mangeshkar with president inside

लता मंगेशकर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। 13 साल की उम्र में ही उन्होंने गायिकी की शुरुआत कर दी थी। उन्होंने पहला गीत मराठी फिल्म 'किती हसाल' (1942) के लिए गाया था, जिसे , जिसे फाइनल कट से पहले हटा दिया गया था। इसके बाद 1943 में आई एक और मराठी फिल्म 'गजाभाऊ' में उन्होंने 'माता एक सपूत की दुनिया बदल दे' गीत गाया था। यही उनका पहला गीत माना जाता है। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 'कोरा कागज था ये मन मेरा', 'अजीब दास्तां है ये', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'तेरे बिना जिंदगी से शिकवा तो नहीं', 'झिलमिल सितारों का आंगन होगा', 'आसमां के नीचे हम आज अपने पीछे', 'सत्यम शिवम सुंदरम', 'गाता रहे मेरा दिल', 'ये गलियां ये चौबारा', 'रैना बीती जाए', 'कांची रे कांची रे', 'राम तेरी गंगा मैली' जैसे कितने ही सदाबहार गीत लता मंगेशकर ने जाए, जिन्हें आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं। लता मंगेशकर के गीतों में भारतीयता की झलक मिलती है, एक ऐसी मधुरता, जिसकी प्रशंसा में शब्द भी कम पड़ जाते हैं। जाहिर है लता मंगेशकर को सम्मानित करना देश के करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का सम्मान करना है, जो वे लता मंगेशकर के लिए महसूस करते हैं। 

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भारत रत्न और दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से हुईं सम्मानित

lata mangeshkar to be conferred daughter of the nation title inside

लता जी को शानदार गायिकी की अभी तक तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। जिन फिल्मों के लिए उन्हें सम्मान मिला, वे थीं 1972 में आई 'परिचय', '1974 में आई कोरा कागज़' और 1990 में आई 'लेकिन'। भारत सरकार ने उन्हें 1969 में पद्म भूषण, 1999 में पद्म विभूषण और 2001 में भारत रत्न से सम्मानित किया था।

रानू मंडल पर प्रतिक्रिया को लेकर सुर्खियों में रहीं लता मंगेशकर

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुई रानू मंडल पर लता जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और इसे लेकर वह सुर्खियों में रही थी। उन्होंने कहा था, "अगर मेरे नाम और काम से किसी का भला होता है तो मैं अपने आपको भाग्यशाली समझती हूं। लेकिन मुझे यह लगता है कि किसी की नकल करने से सफलता हासिल नहीं की जा सकती। मेरे या किशोर दा या रफी साहब या मुकेश भैया या आशा (भोसले) के गानों से नए सिंगर्स थोड़े वक्त के लिए ध्यान खींच सकते हैं, लेकिन लंबा नहीं चलता।'' हालांकि रानू मंडल के लिए लता मंगेशकर की इस प्रतिक्रिया पर लोगों ने खिंचाई भी की थी। कुछ ट्विटर यूजर्स ने लिखा कि लता मंगेशकर उनके लिए थोड़ी नरमी से भी पेश आ सकती थीं। 

रानू मंडल पश्चिम बंगाल के रानाघाट रेलवे स्टेशन के लता मंगेशकर के गाने एक प्यार का नगमा है गाने के बाद सोशल मीडिया सेंसेशन बन गई थीं। रानू मंडल का वीडियो वायरल होने के बाद संगीतकार हिमेश रेशमिया ने रानू को अपनी फिल्म 'हैप्पी हार्डी एंड हीर' के लिए गाने का मौका दिया और यहीं से रानू मंडल को बड़ा ब्रेक मिल गया।