भारत की खूबसूरती और संस्कृति यहां पर मनाए जाने वाले त्योहारों में झलकती है। यूं तो ऐसे कई त्योहार हैं, जो पूरे देश में बेहद हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं। लेकिन कुछ त्योहार का जुड़ाव स्थान से भी है। मसलन, दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले त्योहारों का अपना एक अलग ही महत्व होता है। इन त्योहारों में जहां कुछ त्योहार धार्मिक हैं, तो कुछ सांस्कृतिक। इस तरह दक्षिण भारत के उत्सवों के माध्यम से देश की संस्कृति की एक अलग ही छटा देखने का अवसर लोगों को मिलता है।

दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले कई त्योहारों के बारे में तो लोगों को पता है, लेकिन ऐसे भी कई त्योहार हैं, जिनके बारे में अन्य राज्यों के लोगों को पता ही नहीं होता। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही त्योहारों के बारे में बता रहे हैं, जो यकीनन आपको भी आश्चर्यचकित कर देंगे-

हम्पी फेस्टिवल

south indian festival

इस महोत्सव का आयोजन हम्पी नामक शहर में किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि विजयनगर सम्राज्य के शासन काल से ही एक विजय उत्सव के रूप में मनाया जाता था। इस उत्सव को नाडा उत्सव भी कहा जाता है। इस उत्सव में बड़ी संख्या में लोग आते हैं। त्योहार का मुख्य आकर्षण नृत्य, नाटक, आतिशबाजी, कठपुतली शो व परेड आदि होता है। इस उत्सव में दूर-दूर से कलाकार हिस्सा बनने के लिए आते हैं। इस विशेष अवसर पर पूरा माहौल बेहद ही रमणीय नजर आता है।

करगा महोत्सव

kargaa festival

यह एक नौ दिवसीय महोत्सव होता है, जिसे आदि शक्ति द्रौपदी के भूमि अवतरण के रूप में मनाया जाता है। इस करगा महोत्सव की परंपरा थिगलर्स नामक बागवानों के एक तमिल भाषी समुदाय द्वारा शुरू की गई थी। करीबन 250 वर्षों से भी अधिक समय से इस महोत्सव को मनाया जाता रहा है। यह उत्सव बैंगलोर के धर्मराय स्वामी मंदिर में आयोजित किया जाता है। महोत्सव के अंतिम दिन शक्ति उत्सव तथा रथयात्रा निकाली जाती है। जिसमें महिला पोशाक पहने एक पुजारी एक शानदार जुलूस का नेतृत्व करता है। इसे पूरे कर्नाटक में बेहद ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

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उदागी

उगादी दक्षिण भारत में विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह दक्षिण भारतीय त्योहार एक नए हिंदू कैलेंडर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार मार्च-अप्रैल के महीनों में आता है। उगादि को लेकर कई लोगों में यह मान्यता प्राप्त है कि जब कृष्ण ने पृथ्वी पर अपना समय समाप्त किया था, तब कलियुग आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ था। इस खास दिन पर लोग ना केवल नए कपड़े पहनते हैं, बल्कि अपने घरों को सजाते हैं और नृत्य भी करते हैं।

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महामहम महोत्सव

mahamaham festival

महामहम दक्षिण भारत में तमिलनाडु राज्य में मनाया जाता है। इसे हर 12 साल में मनाया जाता है। यह उत्सव कुंभकोणम में स्थित महामहम टैंक में सेलिब्रेट किया जाता है। भगवान शिव के मंडपों से घिरे इस 20 एकड़ के तालाब को पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि त्योहार के दिन, देवी और भगवान शिव इसके जल का कायाकल्प करते हैं। इस प्रकार हिंदू तालाब में डुबकी लगाने को बहुत शुभ मानते हैं। इसे अक्सर कुंभ मेले में भाग लेने के बराबर कहा जाता है। यह उत्सव 10 दिनों की अवधि में आयोजित किया जाता है। उम्मीद है कि इसे अब 2028 में मनाया जाएगा क्योंकि यह तब मनाया जाता है जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करता है।

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