आज के समय में महिला सशक्तिकरण पर काफी ज़ोर दिया जा रहा है। महिलाओं के हक को लेकर लोग सचेत हुए हैं और अब उन्हें भी समान अवसर दिए जाने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर, महिलाओं ने भी अपने हुनर व काबिलियत का परिचय पूरे विश्व के सामने रखा है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक इस बात का इतिहास गवाह है कि महिलाएं समाज में किसी ना किसी स्तर पर अपना पूर्ण योगदान देती आई हैं।

इतिहास के पन्नों में कई ऐसी महिलाओं के नाम दर्ज हैं, जिन्हें पढ़ जाना चाहिए। कहते हैं कि एक कामयाब इंसान के पीछे एक महिला का हाथ होता है। इसी तरह, आजाद हिन्दुस्तान के पीछे भी कई महिलाओं का हाथ है, जिन्होंने हिंदुस्तान को आजादी दिलाने के लिए पूर्ण योगदान दिया। हिन्दुस्तान में बसे हर राज्य की अपनी अलग कहानी, संघर्ष है। भोपाल भी कई मायनों में खास है क्योंकि यहां कई सालों तक महिलाओं का शासन रहा है। भोपाल की बेगम प्रेरणादायक शख्सियत हैं, जिन्होंने अपना भाग्य बनाने के लिए उन मानदंडों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। आज हम आपको सुल्तान जहां बेगम के बारे में बताने जा रहे हैं। तो चलिए जानते हैं.... 

कौन थी सुल्तान जहां बेगम? 

nawab sultan jahan begum

सुल्तान जहां बेगम भोपाल की ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने भोपाल पर कई सालों तक शासन किया और समाज में महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया। उन्होंने  लगभग 19 वीं शताब्दी की शुरुआत से लेकर अप्रैल 1926 तक शासन किया था। भोपाल में उन्होंने कई ऐसे काम किए, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज है। 

आपको बता दें सुल्तान जहां बेगम का जन्म 9 जुलाई 1858 में हुआ था। इन्होंने लगभग 25 साल के शासनकाल में भोपाल को पूरी तरह बदल कर रख दिया था। बेगम ने अपने शासनकाल के दौरान कई स्कूल खुलवाए और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना में विशेष योगदान दिया था। आज उन्हें समाज सुधारक और प्रगतिशील नवाब बेगम के रूप में जाना जाता है। 

कैसी थी भोपाल की रियासत? 

bhopal riyasat

आज भोपाल राज्य की अपनी एक अलग पहचान है, संस्कृति है, खूबसूरती है। आज जो भोपाल हमारे सामने हैं और इसे बनाने में कई लोगों ने कड़ी मेहनत व संघर्ष किए हैं, जिसे कभी नकारा नहीं जा सकता है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक भोपाल की रियासत पर हमेशा से मुस्लिम पुरुष शासकों और नवाबों का शासन रहा है। 

लेकिन इसके बावजूद कई महिलाओं ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगन से राजनीति और सार्वजनिक जीवन में एक लंबा इतिहास रच दिया है। इतिहास गवाह है कि कैसे दोस्त मुहम्मद की पत्नी, फतेह बीबी ने राजपूतों और मराठों से युद्ध करने वाले हमलों के खिलाफ भोपाल में अपनी संपत्ति का बचाव किया था। 

इसके बाद, ममोला बाई की पत्नी ने लगभग 50 वर्षों तक भोपाल को प्रभावी ढंग से प्रशासित किया। यहां तक कि भोपाल की कुछ शाही महिलाओं, जैसे अस्मत बेगम, जीनत बेगम और मोती बेगम ने भी राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भोपाल की बेगम प्रेरणादायक शख्सियत हैं, जिन्होंने अपना भाग्य बनाने के लिए उन मानदंडों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

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बेगम सुल्तान जहां और एएमयू

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उस समय भोपाल से लगभग 600 किलोमीटर की दूरी पर, उत्तर प्रदेश प्रांत में, अलीगढ़ में मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज आकार ले रहा था। लगभग 1910 में मसूरी से लौटते समय बेगम पहली बार अलीगढ़ में रहीं। इसी दौरान, उन्होंने अखिल भारतीय मुहम्मदन शैक्षिक सम्मेलन के निर्माण के लिए 50,000 रुपये का दान दिया था। यह आज भी मौजूद है और इसलिए इसे सुल्तान जहां मंजिल के नाम से जाना जाता है।

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इसके अलावा, कहा जाता है कि अलीगढ़ में शेख अब्दुल्ला द्वारा शुरू किए गए गर्ल्स स्कूल के लिए भी उन्होंने 100 रुपये का मासिक अनुदान दिया था, जिसे आज एएमयू के महिला कॉलेज के रूप में जाना जाता है। फिर बाद में वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की संस्थापक और (आज तक) एकमात्र महिला चांसलर हैं । शिक्षा के अलावा, उन्होंने कराधान, पुलिस, सेना, न्यायपालिका, कृषि, स्वास्थ्य और स्वच्छता में भी सुधार किया। 1914 में, वह अखिल भारतीय मुस्लिम महिला संघ की अध्यक्ष बनीं।

लिखी कई किताबें 

सुल्तान जहां बेगम को फारसी भाषा का ज्ञान काफी ज्ञान था, इसलिए उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान लगभग 26 किताबें लिखी। यह किताब महिलाओं से जुड़े मुद्दे पारिवारिक संबंध और परिवार के अंदर आपसी संबंधों को लेकर थी। भोपाल की बेगमों का शासन तब समाप्त हुआ, जब सुल्तान जहान के पुत्र ने ताज ग्रहण किया। 

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हालांकि, इससे पहले, कुदसिया बेगम, सिकंदर बेगम, शाहजहां बेगम, भोपाल पर शासन कर चुकी है और इतिहास के पन्नों में दर्ज उनकी शख्सियत दर्ज है। अगर आपको लेख अच्छा लगा हो, तो उसे लाइक और शेयर ज़रूर करें। साथ ही, जुड़े रहे हरजिन्दगी के साथ।

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