आज हमारे देश में महिलाएं हर एक क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं। किसी भी क्षेत्र में महिलाएं उन्नति का परचम लहराती हुई निरंतर आगे बढ़ती जा रही हैं। ऐसा ही एक उदाहरण भारत की तीन महिलाओं ने प्रस्तुत किया जब उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में एक साथ शपथ ली। ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है जब नौ न्यायाधीशों ने एक साथ इस पद की शपथ ली है। यही नहीं इनमें से 3 महिलाएं हैं जो इस पद के लिए आगे बढ़कर हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। आइए जानें कौन हैं वो 3 भारतीय महिलाएं और उनसे जुड़ी कुछ बातें। 

कौन हैं शपथ लेने वाली 3 महिलाएं 

three women judges

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब मंगलवार 31 अगस्त को तीन महिला जजों ने एक साथ शपथ ली है। इन महिला जजों में जस्टिस हीमा कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला एम त्रिवेदी शामिल हैं। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को  एक साथ 9 जजों को शपथ दिलाई गई जिनमें 3 महिला जज शामिल हैं। इसी के साथ अब सुप्रीम कोर्ट में 4 महिला जज शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के कुल 33 जजों में से 4 महिला जज हैं जो वास्तव में भारत के लिए एक गर्व की बात है। आइए जानें तीनों जजों के जीवन से जुड़ी कुछ ख़ास बातें। 

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जस्टिस हीमा कोहली

जस्टिस हीमा कोहली का जन्म 2 सितंबर 1959 को नई दिल्ली में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट थॉमस गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मंदिर मार्ग, नई दिल्ली से की। 1979 में उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से इतिहास में बीए. की परीक्षा पास की । बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की डिग्री हासिल की। हीमा कोहली ने 1984 में बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली में दाखिला लिया। उन्होंने दिल्ली में कानून की प्रैक्टिस की। उन्होंने 1999 और 2004 के बीच नई दिल्ली नगर परिषद के वकील के रूप में कार्य किया, साथ ही साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार का प्रतिनिधित्व किया। कोहली ने 7 जनवरी, 2021 को तेलंगाना राज्य के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और वह पद संभालने वाली पहली महिला थीं। वह न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी के साथ सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाली तीन महिला न्यायाधीशों में से एक हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल 2 सितंबर, 2024 तक रहेगा। 

जस्टिस बी वी नागरत्ना

justice bv nagarathna

जस्टिस  बी.वी. नागरत्ना  का जन्म जन्म 30 अक्टूबर 1962 को हुआ था। उनके पिता ई.एस. वेंकटरमैया भारत के 19वें मुख्य न्यायाधीश थे। उन्हें 18 फरवरी 2008 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश और 17 फरवरी 2010 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। जस्टिस  बी.वी. नागरत्ना  इस समय भारत में कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं। जस्टिस बी वी नागरत्ना वर्ष 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश यानी कि चीफ जस्टिस बनेंगी। जस्टिस नागरत्ना ने कर्नाटक में कमर्शियल और संवैधानिक कानूनों की व्याख्या करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। सीनियरिटी के आधार पर वे सितंबर 2027 में सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनेंगी और उनका कार्यकाल 36 दिनों का होगा। इसी के साथ भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब चीफ जस्टिस के पद पर कोई महिला जज आसीन होगी। जस्टिस बी वी नागरत्ना भी सुप्रीम कोर्ट में जज की शपथ लेने वाली तीन महिलाओं में से एक हैं। 

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जस्टिस बेला एम त्रिवेदी

जस्टिस बेला एम त्रिवेदी का जन्म 10  जून 1960 में हुआ था। वह पहले 9 फरवरी 2016  से गुजरात उच्च न्यायालय की न्यायाधीश थीं। उन्होंने पूर्व में 17  फरवरी 2011 से 27  जून 2011 तक गुजरात उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्य किया और बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी गुजरात हाईकोर्ट में पहली महिला जज थीं। 17 फरवरी 2011 को उन्हें गुजरात हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनाया गया था।  जून 2011 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया और बाद में फरवरी 2016 में उन्हें दोबारा गुजरात हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।  2003 से 2006 तक उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में लॉ सेक्रेटरी के पद पर कार्य किया। हाल ही में  उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के तौर पर हुई है और वे इस पद पर जून 10, 2025 तक बनी रहेंगी। 

ये सभी महिलाएं वास्तव में हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और इन महिलाओं का इतना बड़ा पद हासिल करना पूरे देश के लिए गर्व की बात है। 

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