
भारतीय महिलाएं पति की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए कई तीज-त्योहारों पर व्रत रखती हैं। इनमें से कुछ व्रतों की विधि बहुत ही कठिन होती है। ऐसा ही एक व्रत कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं रखती हैं। इस व्रत में भोजन तो दूर की बात है, महिलाएं जल तक ग्रहण नहीं करती हैं।
भोपाल के ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखार्विंद विशेषज्ञ शास्त्री विनोद सोनी पोद्दार कहते हैं, 'हिंदी पंचांग के अनुसार तीज का त्योहार हर वर्ष भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे भादो की तीज भी कहा जाता है। इस पर्व पर माता पार्वती की पूजा की जाती है और चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।'
इस वर्ष कजरी तीज का त्योहार 25 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन धृति योग रहेगा। पंडित जी कहते हैं, 'यह योग धरती से जुड़ा होता है और इसका दूसरा अर्थ धैर्य रखना है। वैदिक शास्त्रों में बताया गया है कि इस योग में किया गया हर कार्य शुभ होता है और उसके अच्छे फल प्राप्त होते हैं। व्रत रखने के अलावा इस योग में भूमि-पूजन, किसी नए कार्य की शुरुआत और मकान या जमीन खरीदना भी शुभ माना गया है।'
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तृतीया तिथि प्रारंभ- 24 अगस्त को शाम 4:05 से शुरू
तृतीया तिथि समाप्त - 25 अगस्त को शाम 4:18 मिनट पर समाप्त
ऐसे में कजरी तीज का व्रत 25 अगस्त को रखा जाएगा। इसी दिन शाम के वक्त चंद्रमा के दर्शन करने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद व्रत को खेला जा सकता है।
इस तीज पर नीमड़ी माता की पूजा होती है। इन्हें देवी पार्वती का ही स्वरूप माना गया है। कजरी तीज पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा है। इसके लिए महिलाएं सुबह उठ कर स्नान करती हैं और व्रत करने का संकल्प लेती हैं।
इस पर्व पर देवी पार्वती को माल पुआ भोग के तौर पर चढ़ाया जाता है। साथ ही घर पर पूजन के लिए मिट्टी और गोबर का छोटा सा तालाब बनाया जाता है। इस तालाब में नीम के पेड़ की एक डाल लगाई जाती है। इस डाल पर चूड़ी, चुनीर और सुहाग का सामान चढ़ाया जाता है । इस तरह से नीमड़ी माता की स्थापना की जाती है। रात में चंद्रमा के निकलने के बाद उसकी पूजा और अर्घ्य दे कर व्रत खोला जाता है। बहुत सारी महिलाएं इस दिन 24 घंटे निर्जला व्रत भी रखती हैं। मगर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद यह व्रत खोला जा सकता है।
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यह कथा एक गरीब ब्राह्मण और उसके परिवार की है। ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ एक गांव में रहता था। गरीबी के कारण दो वक्त का खाना तक उन्हें बहुत परिश्रम करने के बाद नसीब होता था। ऐसे में पति की इस दशा को देख पत्नी को बुरा लगता। इसलिए ब्राह्मण की पत्नी ने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए तीज का व्रत रखा। यह तीज भाद्रपद मास में आने वाली कजरी तीज थी।
व्रत रखने पर पत्नी ने ब्राह्मण को कहा कि वह कहीं से सत्तू ले आए। धन की कमी होने के कारण ब्राह्मण के लिए सत्तू खरीद पाना मुश्किल था, इसलिए रात के वक्त वह साहूकार की दुकान पर गया और उसने खुद ही सत्तू बनाया और लेकर जब जाने लगा, तो खटपट की आवाज से साहूकार 'चोर-चोर' कह कर चिल्लाने लगा और ब्राह्मण से अपनी पोटली खोल कर दिखाने के लिए कहने लगा।
ब्राह्मण ने कहा कि वह चोर नहीं है बल्कि अपनी पत्नी के लिए सत्तू बना कर ले जा रहा है क्योंकि उसका तीज का व्रत है। वाकई जब ब्राह्मण ने अपनी पोटली खोली तो उसमें से केवल सवा किलो सत्तू निकला। यह देख कर साहूकार ने ब्राह्मण को सम्मान पूर्वक जाने दिया और कहा कि आज से उसकी पत्नी को वह अपनी बहन मानता है और इसी के साथ साहूकार ने ब्राह्मण को उसकी पत्नी के लिए गहने, पैसे, मेहंदी और नए वस्त्र भी दिए।
व्रत की सामग्री इकट्ठा होने पर ब्राह्मण की पत्नी ने तीज माता का व्रत पूर्ण किया। बाद में माता की कृपा से ब्राह्मण को काम मिल गया और उसके घर में सुख-समृद्धि आ गई। इसलिए कहा गया है कि हर पत्नी को अपने पति के खुशहाल जीवन के लिए यह व्रत जरूर रखना चाहिए।
कजरी तीज के त्योहार की आपको भी ढेरों शुभकामनाएं। इस व्रत से जुड़ी यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो, तो इस आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें। साथ ही इसी तरह और भी धर्म से जुड़े आर्टिकल पढ़ने के लिए देखती रहें हर जिंदगी।
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