साल भर के लंबे इंतजार के बाद दिवाली का त्योहार एक बार फिर से नजदीक आ गया है। इस वर्ष 4 नवंबर को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। लोगों ने इस त्योहार को धूमधाम से मनाने की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। घर की साफ-सफाई से लेकर घर को सजाने तक का काम शुरू हो चुका है। वहीं महिलाओं ने तो दिवाली के लिए शॉपिंग करना भी शुरू कर दिया है। 

मगर आप कितनी भी पहले से तैयारियां कर लें। दिवाली वाला पूरा दिन पूजा की तैयारियों में ही बीत जाता है। कब शाम हो जाती है और गणेश-लक्ष्मी पूजन का वक्त आ जाता है पता भी नहीं चलता है। 

दरअसल, गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा करने में जितना वक्त नहीं लगता है, उतना वक्त पूजा के लिए सामग्री इकट्ठा करने में लग जाता है। हमने भोपाल के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य विनोद सोनी जी से इस विषय में बात की और यह भी जाना कि दिवाली के पूजन में क्‍या सामग्री लगती हैं। इस पर पंडित जी कहते हैं, 'दिवाली के दिन केवल गणेश-लक्ष्मी का ही पूजन नहीं होता है बल्कि बहुत से घरों में देवी गंगा और कुबेर जी का भी पूजन किया जाता है। ऐसे में सभी के लिए अलग-अलग पूजन सामग्री लगती है।'

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लक्ष्‍मी जी का पूजन 

दिवाली के दिन बहुत से लोग देवी लक्ष्मी का व्रत भी रखते हैं। ऐसे में आपको लक्ष्मी पूजन के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। लक्ष्मी जी की पूजा में निम्नलिखित सामग्री लगती है- 

लक्ष्मी जी की एक मुस्कुराती हुई प्रतिमा, कमल का खिला हुआ फूल, पंच मेवा, मीठा पान, सिंदूर, केसर, अक्षत, सुपारी, शरीफा, इत्र, बताशा, लाल वस्त्र, चांदी या सोने का सिक्का (यदि चांदी या सोने का सिक्का न हो तो कुछ पैसे ही रख दें या फिर कोई गहना रख दें। पूजा के बाद आप उसे वापस अपनी तिजोरी में रख सकती हैं।), मिठाई और तेल का दिया।

इन सभी सामग्रियों के साथ आप लक्ष्मी जी का पूजन करेंगे और फिर महालक्ष्मी जी की आरती गाएंगे। 

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गणेश जी की पूजा 

गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाएगी, क्योंकि उन्हें सभी देवी-देवताओं में प्रथम स्‍थान प्राप्‍त है। गणेश जी की पूजा में निम्नलिखित सामग्री इस्तेमाल होती है- 

गणेश जी की प्रतिमा, पीले वस्त्र, जनेऊ, इत्र, गंगाजल, मेवा, 5 पान, धनिया और गुड़ का प्रसाद, पंचामृत, कमल गट्टे की माला, गन्‍ना, दूध की बर्फी, गेहूं, दूर्वा, सिंदूर, अक्षत, मौली, नारियल, शहद, दही और मोदक। 

इन सभी सामग्रियों के साथ आपको गणेश जी का पूजन करना होता है। गणेश जी के पूजन के बाद उन्हें अर्पित की गई मौली को रक्षा सूत्र की तरह परिवार के सभी सदस्यों के हाथों में बांध देना चाहिए। 

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कुबेर जी की पूजा 

धन के देवता कुबेर जी की भी दिवाली के दिन पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि कुबेर जी को प्रसन्न करके आर्थिक परेशानियों को दूर किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कि कुबेर जी की पूजा में कौन सी सामग्री लगती हैं- 

कुबेर जी की प्रतिमा, कुबेर जी का श्री यंत्र, लाल चंदन, पुष्प, सिंघाड़ा, चांदी का सिक्का इत्र, रोली चावल, तेल का दीपक, कुशा, गंगाजल, बताशे और पान। 

कुबेर जी की पूजा के बाद आपको उनके इस मंत्र का जाप भी करना चाहिए- 

' ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये धनधान्या समृद्धिम् देहि दापय दापय स्वाहा।' 


इस तरह इन तीनों देवी-देवताओं की पूजा करके आपकी दिवाली की पूजा संपन्‍न हो जाएगी। यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो इस आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्‍स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।   

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