जब भी हम भारतीय व्यंजनों के बारे में बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले जो विचार आता है, वह है कि वह कितना तीखा और चटपटा है। कोई भी भारतीय व्यंजन मिर्च के बिना अधूरा सा है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि भारत में कितने प्रकार की लाल मिर्च होती हैं। इतना ही नहीं यह सब अपने तीखेपन के लिए जानी जाती हैं। हमारे स्वाद को बढ़ाने के अलावा मिर्च हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होती हैं। मिर्च खाने से पाचन तंत्र को लाभ पहुंचता है। यह हमारे दिल की सेहत को दुरुस्त रखती हैं। जोड़ों के दर्द और माइग्रेन आदि में भी राहत पहुंचाती हैं। इतना ही नहीं मिर्च खाने से वजन भी नियंत्रित रहता है। माना जाता है कि मिर्च पुर्तगालियों के जरिए भारत पहुंची थी। तभी से इन मिर्चों ने हमारे खाने में एक नया रंग और स्वाद जोड़ दिया। आइए जानें ऐसी ही अलग-अलग मिर्चों के बारे में।

भुट जोलोकिया, नॉर्थ ईस्ट स्टेट्स

ghost pepper

इसे घोस्ट पेपर भी कहा जाता है। भुट जोलोकिया की खेती पूर्वोत्तर राज्यों-अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड और मणिपुर आदि में की जाती है। इस मिर्च को इसके तीखेपन की वजह से साल 2007 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दुनिया की सबसे तीखी मिर्च के रूप में दर्ज किया जा चुका है। यह एक इंटरस्पेसिफिक हाइब्रिड मिर्च होती है। भुट जोलोकिया का उपयोग भोजन और मसाले के रूप में किया जाता है। इसे पोर्क, सूखी मछली या फर्मेंटेड फिश बनाने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है। 

गुंटूर मिर्च, आंध्र प्रदेश

guntur mich

आंध्र प्रदेश अपने मसालेदार व्यंजनों के लिए जाना जाता है और इसका सारा श्रेय गुंटूर जिले की गुंटूर मिर्च को जाता है। गुंटूर भारत से श्रीलंका, बांग्लादेश, मध्य पूर्व, दक्षिण कोरिया, यूके, यूएसए और लैटिन अमेरिका जैसे देशों में मिर्च और मिर्च पाउडर की अधिकांश किस्मों का मुख्य उत्पादक और निर्यातक है। गुंटूर की एक किस्म 'गुंटूर सन्नम' है, जिसकी खेती मध्य प्रदेश में की जाती है।

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कश्मीरी मिर्च, कश्मीर

kashmiri lal mirch

यह मिर्च कश्मीर में होती है और इसका उपयोग हर भारतीय व्यंजन में रंग देने के लिए किया जाता है। इसका रंग खूबसूरत लाल होता है और यह खाने में कम तीखी होती है। खाने में गहरा लाल या चटकीला रंग देने के लिए इसी का इस्तेमाल किया जाता है। कश्मीरी मिर्च का पाउडर बनाने में उन मिर्चो का प्रयोग होता है, जो साइज में छोटी और दूसरी मिर्चों की अपेक्षा कम तीखी होती हैं। तंदूरी व्यंजनों में रंग देने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

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धानी मिर्च, मनीपुर

bird eye red chilli

इसे बर्ड आई चिली और थाई चिली के नाम से भी जाना जाता है। यह कई एशियाई व्यंजनों में बड़े पैमाने पर उपयोग में लाई जाती है। यह अपने गहरे लाल रंग और पंजेंट स्मेल के लिए जानी जाती है। इसके अलावा यह बहुत तीखी होती है। थाई कुजीन, वियतनेमीज कुजीन और इंडोनेशियन कुजीन में इसे बहुत इस्तेमाल किया जाता है। यह लाल के साथ-साथ हरे और नारंगी रंग में भी होती हैं।

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ब्यादगी मिर्च, कर्नाटक

byadgi red chilli

ब्यादगी मिर्च मुख्य रूप से भारतीय राज्य कर्नाटक में उगाई जाने वाली मिर्च की एक प्रसिद्ध किस्म है। इसका नाम ब्यादगी शहर के नाम पर रखा गया है जो कर्नाटक के हवेरी जिले में स्थित है। यह भी अपने गहरे लाल रंग के लिए जानी जाती है और कश्मीरी लाल मिर्च की तरह कम तीखी होती है। यह दो प्रकार की होती हैं- दब्बी और कद्दी। दब्बी मिर्च छोटी और मोटी होती है और यह अपने रंग और स्वाद के लिए अधिक पॉपुलर है। हालांकि, इसमें अधिक बीज होते हैं, लेकिन यह कद्दी मिर्च की तुलना में कम तीखी होती है।

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