घूमने के शौकीन लोगों को हमेशा ही नई जगहों की तलाश रहती है, जहां वो कुछ अलग देख सकें और कर सकें। इसके साथ ही, घूमने का मजा तब और अधिक बढ़ जाता है, जब प्राकृतिक सौंदर्य के साथ उस स्थान का कोई सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व भी हो। आज हम आपको ऐसी ही एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से समृद्ध जगह के बारे में बताएंगे। हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के शहर चित्तूर की। यहां आपको कई सारी ऐतिहासिक इमारतों के साथ प्राकृतिक सौंदर्य के बेहद अनोखे अंदाज देखने को मिलेंगे। इतना ही नहीं, यहां कई स्थानों पर आपको सुंदर वास्तुशिल्प कला का भी मनमोहक नजारा देखने को मिल जाएगा। तो चलिए, जानते हैं चित्तूर से जुड़े कई दर्शनीय स्थलों के बारे में..

क्यों खास है चित्तूर?

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आंध्र प्रदेश में स्थित चित्तूर कई वजह से खास है। इतिहास के पन्‍नों में भी इस स्थान का नाम दर्ज है। यहां कई राजाओं के साम्राज्य से जुड़े किले देखने को मिलते हैं। जिनमें से सबसे प्रमुख गुर्रमकोंडा किला है। इसके अलावा यहां हॉर्सले हिल्स, कौण्डिन्य वन्यजीव अभ्यारण्य आदि भी देखने लायक स्थान हैं, जहां पर आपको इतिहास से जुड़े कई रोचक तथ्‍य और यहां स्थापित रह चुके साम्राज्य के बारे में भी जानने का मौका मिलेगा।  

कौण्डिन्य वन्यजीव अभ्यारण्य

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चित्तूर में कौण्डिन्य सेंक्चुरी बहुत मशहूर है। यहां कई सारे स्थानीय वन्यजीव देखने को मिलेंगे जो जीव लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। आपको बता दें कि यहां आपको स्लोथ बीयर, हाथी, हाइना, दरियाई घोड़े के साथ हिमालयन काले भालू आदि जैसे जानवरों की प्रजाति देखने को मिलेंगी। यही कारण है कि कौण्डिन्य वन्यजीव अभ्यारण्य देश में मौजूद अन्‍य अभ्यारण्यों के मुकाबले अलग ही ऐतिहासिक महत्व रखता है।

हॉर्सले हिल्स

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चित्तूर आने वाले लोगों की लिस्ट में 'हॉर्सले हिल्स' जरूर शामिल रहता है। यहां आपको कई तरह के खूबसूरत पार्क देखने को मिलेंगे। साथ ही, अगर आप शादी के बाद पहली बार घूमने का प्लान बना रहे हैं तो एक बार चित्तूर के हॉर्सले हिल्स का मजा जरूर लें। यहां आपको ट्रेकिंग के साथ-साथ एक छोटा-सा चिड़ियाघर भी देखने को मिलेगा, जो बेहद खूबसूरत है। आपको बता दें कि इस स्‍थान को 'आंध्र ऊटी' भी कहा जाता है।

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गुर्रमकोंडा किला

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चित्तूर का गुर्रमकोंडा किला एक दार्शनिक स्‍थान है क्योंकि यह विजयनगर साम्राज्य और उसके इतिहास की गाथा सुनाता है। इस किले के इतिहास पर गौर करें तो शुरुआती दौर में इसे मिट्टी और चट्टान से निर्मित किया गया था। फिर बाद में नए-नए सुल्तानों ने अपने-अपने शासन काल में इस किले की बेहद अनोखे और खूबसूरत अंदाज में मरम्मत करवाई, शायद यही वजह है कि यह किला आज भी उतना ही विशाल नजर आता है और मजबूती के साथ वर्षों से खड़ा है। दूसरी ओर इस किले के बारे में यह भी कहा जाता है कि इस पर सुल्तान हैदर अली और टीपू सुल्तान भी शासन कर चुके हैं।

साथ ही, आपको यह भी बता दें कि इस किले की ऊंचाई 500 फीट है। आप जब भी आंध्र प्रदेश आएं तो एक बार गुर्रमकोंडा किला जरूर घूमें। आपको बता दें कि यह किला सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक ओपन रहता है। आप बिना किसी शुल्क के यहां घूम सकते हैं। साथ ही, यहां जाने के लिए आप बस या ट्रेन ले सकते हैं। अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं तो आपको Vayalpadu स्टेशन पर उतरना होगा। वहीं, अगर आप बस से आते हैं तो आप मदनपल्ली उतर सकते हैं क्योंकि यहां डायरेक्ट बस आती है । मदनपल्ली में पर्यटकों  के रुकने के लिए अच्छी व्यवस्था है। आपको यहां कई अच्‍छे और सस्‍ते होट्ल्‍स मिल जाएंगे। आप होटल को ऑनलाइन भी बुक करा सकती हैं या फिर यहां आकर भी आपको आसानी से होटल मिल जाएंगे।

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कैसे पहुंचे चित्तूर?

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चित्तूर पहुंचना बेहद आसान है, क्योंकि यह शहर भारत के सभी प्रमुख हवाई, रेल मार्ग तथा सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

हवाई मार्ग - अगर आप यहां हवाई मार्ग से आने की सोच रहे हैं तो आपको तिरुपति हवाई अड्डे आना होगा। वहां से यह लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है।

रेलवे स्टेशन- यहां का सबसे करीबी रेलवे स्टेशन चित्तूर जंक्शन है। यहां की सबसे अच्छी बात यह भी है कि यहां के लिए भारत के सभी बड़े शहरों से नियमित तौर पर ट्रेनें आती रहती हैं।

सड़क मार्ग - आप यहां सड़क मार्ग से भी आसानी से आ सकते हैं, क्योंकि सभी बड़े शहरों से बसें यहां सीधी आती हैं।

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चित्तूर आने का सही समय

वैसे तो आप किसी भी मौसम में यहां घूम सकते हैं लेकिन आप सितंबर से फरवरी के महीने के बीच में कभी भी यहां आएं क्योंकि इस दौरान यहां का तापमान 20 से 25 डिग्री के आसपास रहता है।

तो दोस्तों, आप भी चित्तूर की सैर जरूर करें। यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर और लाइक जरूर करें साथ ही इसी तरह की अन्य जानकारी पाने के लिए जुड़े रहें HerZindagi के साथ।

Image Credit- Travel Websites