भारत के कई राज्‍यों में चावल को ही मुख्‍य भोजन माना गया है। कई लोगों को तो चावल के बिना खाना ही अधूरा लगता है। इसलिए गेहूं और विभिन्‍न दालों के अलावा लोग चावल को भी घर में स्‍टोर करके रखते हैं। चावल का इस्‍तेमाल कई तरह से किया जा सकता है और इससे कई तरह के स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन भी बनाए जा सकते हैं। यह खाने में स्‍वादिष्‍ट होता है और सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। मगर बाजार से इसे खरीदते वक्‍त बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। 

बाजार में आपको चावल की कई वैरायटी मिल जाएगी। जाहिर है, कई तरह के चावल देख कर उनमें से बेस्‍ट क्‍वालिटी के चावलों को पहचान कर खरीदना आसान नहीं है। इसलिए आज हम आपको कुछ टिप्‍स देंगे, जो आपके लिए मददगार साबित हो सकती हैं। 

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असली-नकली चावल की पहचान 

बाजार में आने वाली हर चीज में आजकल मिलावट हो रही है। चावल भी इससे अछूते नहीं हैं। आपको बाजार में प्‍लास्टिक वाले चावल मिल जाएंगे। दिखने में यह हू-ब-हू असली चावल की तरह ही लगते हैं। इन्‍हें पहचानने का असली तरीका है कि एक मुट्ठी चावल को आग में जला कर देखें। जलते वक्‍त अगर उनमें से प्‍लास्टिक की गंध आए तो समझ जाइए कि वह नकली हैं।

चावल को उबाल कर 2-3 दिन के लिए ढांक कर फ्रिज के बाहर ही रख दें। अगर चावल सड़ते नहीं है और उनमें फफूंद (फफूंद से बचाने के लिए अपनाएं ये तरीका) नहीं लगती है तो आप समझ जाएं कि वह नकली हैं। 

चावल के असली और नकली होने का अंतर जानने के लिए आप 1 चम्‍मच चावल को पानी से भरे कटोरे में डाल कर देखें। अगर चावल कटोरी के सतह पर बैठ जाए तो वह असली है और यदि वह पानी में तैरने लगे तो जान जाएं कि वह नकली है। 

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चावल का साइज देखें 

बाजार में आपको चावल कई वैरायटी में मिल जाएगा। रंग के साथ-साथ चावल का साइज भी अलग-अलग आता है। अगर आप बासमती राइस खरीदना चाहती हैं तो आपको बता दें कि यह बड़े साइज का होता है। बिना पके ही इसमें बहुत अच्‍छी खुशबू भी आती है। यह भी कई तरह के साइज में आता है। बासमती राइस का साइज जितना बड़ा होगा वह उतना ही महंगा और पकने के बाद दिखने में खूबसूरत दिखेगा। इतना ही नहीं, बासमती राइस खाने में भी स्‍वादिष्‍ट होता है। 

छोटे आकार के चावल में 'जोहा' वैरायटी आती है और इन चावलों की पैदावार अधिकतर असम में होती है। यह चावल दिखने में भले ही मोहक न लगें, मगर खाने में बहुत ही स्‍वादिष्‍ट होते हैं।

बाजार में आपको मध्‍यम आकार के चावल भी मिल जाएंगे। इनमें परिमल, आइजोन, मंसूरी आदि वैरायटी आती हैं। अगर आप अपनी डाइट में नियमित रूप से चावल खाते हैं तो इस तरह के चावल आपके लिए बेस्‍ट हैं। इन चावलों से आप खिचड़ी, इडली-डोसे का घोल और पुलाव आदि तैयार कर सकते हैं। यह चावल दाम में भी सस्‍ते होते हैं। 

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नए और पुराने चावल का अंतर कैसे समझें 

अमूमन लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि चावल जितना पुराना होता है उतना ही ज्‍यादा अच्‍छा होता है। मगर नए और पुराने चावल को पहचाना कैसे जाए यह एक बड़ी समस्‍या है। इसके लिए सबसे पहले तो आप चावल का रंग देखें। अगर चावल में पीलापन है तो वह पुराना है और यदि वह नया है तो उसका रंग सफेद होगा। 

वहीं आप नए और पुराने चावलों को हल्‍का सा दबा कर भी देख सकती हैं। अगर आपके दबाने से चावल टूट जाता है तो वह नया है और जो चावल मजबूत होता है वह पुराना होता है। 

चावल को पकाने पर भी आपको पता लग जाएगा कि वह नया है या पुराना है। नए चावल को पकाने पर उसमें ज्‍यादा स्‍टार्च निकलता है और वह गला-गला बनता है। वहीं पुराने चावल में ऐसा नहीं होता है। नए चावल का स्‍वाद और खुशबू भी खास नहीं होती है और पकने के बाद नया चावल अधिक फूलता भी नहीं है। 

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अनपॉलिश्‍ड और पॉलिश्‍ड चावल की पहचान

चावलों को आकर्षक रूप देने के लिए उन्‍हें मशीन में डाल कर पॉलिश किया जाता है। ऐसे में वह चिकने और ट्रांसपेरेंट नजर आने लगते हैं, मगर पॉलिश होने के साथ ही चावल में मौजूद सारे पोषक तत्‍व खत्‍म हो जाते हैं। वहीं अगर आप अनपॉलिश्‍ड चावल खरीदती हैं तो इनमें सभी जरूरी तत्‍व मौजूद होते हैं लेकिन दिखने में ये खुरदुरे और हल्‍के पीले रंग के होते हैं। 

आगे से जब भी आप चावल खरीदने जाएं तो ऊपर बातई हुईं टिप्‍स को जरूर ध्‍यान में रखें। यह जानकारी आपको अच्‍छी लगी हो तो इसे शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्‍स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। 

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