भारतीय इतिहास में देखा जाए तो सेना में बहुत से बदलाव हुए हैं। जहां एक ओर सेना में शुरुआत में सिर्फ पुरुषों का वर्चस्व था वहीं दूसरी ओर धीरे-धीरे कर इस प्रभावशालि टीम में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। वैसे ऐसा नहीं है कि महिलाओं को बहुत आसानी से ये मौका मिला। इसके लिए भी लंबी लड़ाई की गई और मिलिट्री, एयरफोर्स, नेवी, सिविल सर्विसेज आदि सभी में महिलाओं ने धीरे-धीरे कर अपनी जगह बनाई। जहां भारतीय फायटर जेट और नेवी के जहाज चलाने के लिए महिलाओं ने हिस्सेदारी अब बराबर की बना ली है वहीं अब थल सेना के लिए भी एक गौरवांगित करने वाला समय आ गया है। 

पहले थलसेना में महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमिशन के जरिए ही अधिकारी पदों पर पहुंचा सकती थीं, लेकिन अब ये तस्वीर भी बदल गई है। हर मौके पर पुरुषों की तुलना में बराबरी का सामन्जस्य बैठानी वाली महिलाएं अब पूरी तरह से सेना का कार्यभार संभाल रही हैं। अब भारतीय सेना की महिलाएं भी देश की सुरक्षा का जिम्मा उठाएंगी और साथ ही साथ हमें गौरवांगित करेंगी। 

women in indian army

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पहली बार कड़ी ट्रेनिंग के बाद आधिकारिक तौर पर सेना में शामिल हुईं महिलाएं-

देश की सुरक्षा का बीड़ा उठाकर बेंगलुरु के कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP C&S) में महिला सैनिकों के दस्ते ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है और अब उन्हें सेना में शामिल किया गया है। ये पहली बार है जहां सिर्फ महिलाओं का एक दस्ता पूरी ट्रेनिंग कर सेना में शामिल हुआ है। इस महिला सैनिकों के बैच में कुल 83 महिलाएं थीं जिन्होंने द्रोणाचार्य परेड ग्राउंड ऑफ कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस सेंटर एंड स्कूल की अटेस्टेशन परेड में हिस्सा भी लिया और अपने दम खम को दिखाया। 

ये परेड कम लोगों के बीच की गई ताकि कोविड-19 के सभी प्रोटोकॉल्स का पालन सही तरह से किया जा सके। सीएमपी सेंटर एंड स्कूल के कमांडेंट ब्रिगेडियर सी दयालन इस परेड में मौजूद थे और उन्होंने महिलाओं के शौर्य और इस जज्बे को देख उनकी तारीफ भी की और शुभकामनाएं दीं। 

women soldiers

16 महीनों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद मिला ये अवसर-

महिला सैनिकों के पहले बैच की ट्रेनिंग 2020 में शुरू हुई थी। 6 जनवरी 2020 से लेकर 8 मई 2021 तक की कड़ी ट्रेनिंग के बाद 83 महिलाओं का ये दस्ता इस मुकाम पर पहुंचा है। ट्रेनिंग के तहत उन्हें पुलिस ड्यूटी के साथ-साथ युद्धस्तर का प्रशिक्षण और प्रबंधंन के गुण सिखाए गए। शुरुआती 19 हफ्तों में बेसिक ट्रेनिंग के बाद उनकी एडवांस ट्रेनिंग शुरू हुई और साथ ही साथ उन्हें ड्राइविंग, सिग्नल कम्युनिकेशन और अन्य सेना से जुड़े काम सिखाए गए। इस ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद ये महिलाएं भी पुरुषों की तरह कंधे से कंधा मिलाकर देश की सुरक्षा में अपनी भागीदारी देंगी। 

women and soldiers

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जवान रैंक पर पहली बार मिला है महिलाओं को मौक- 

अभी तक हमेशा महिलाओं को सैन्य अधिकारियों की पोस्ट दी जाती थी और महिलाओं को किसी गैर-अधिकारी श्रेणी में पहली बार शामिल किया गया है। अब वो पुरुषों की तरह हर रैंक पर पहुंच सकती हैं और आगे बढ़ सकती हैं। पहले महिलाओं को 1992 से जो सुविधा दी जा रही थी उस वक्त महिलाएं सिर्फ शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए लेफ्टिनेंट कर्नल पद तक ही पहुंच सकती थीं। 

 

ये वाकई एक नई पहल है जिसे महिला सैनिकों ने पूरा किया है। ये वाकई बहुत गौरव की बात है और ये महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।