महिला दिवस को दुनिया भर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन और मार्च के पूरे महीने को एक ऐसे समय के रूप में देखा जाता है जब महिलाएं अपने संघर्षों को शेयर करती हैं और अपनी सफलता की कहानियों का जश्न मनाती हैं। जबकि हम महिलाओं के जीवन के हर पहलू में खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं, वहीं कुछ ऐसा भी है जो अक्सर हमें नीचे खींचता है वह महिलाओं का स्वास्थ्य है। 

महिलाएं अपने हर काम में उत्कृष्टता हासिल करती हैं, लेकिन वे सबसे महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज करती हैं, जो उनका स्वास्थ्य है। उदाहरण के लिए, महिलाएं अक्सर पीरियड्स में ऐंठन जैसे सामान्य स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की उपेक्षा करती हैं, जो उन्हें हर महीने होती है। जबकि वे अनायास ही मल्टीटास्किंग की कला को पहचान लेती हैं, उनका स्वास्थ्य अक्सर पीछे हट जाता है। यह महत्वपूर्ण है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और इस ओर आवश्यक ध्यान दें।

एक महिला का शरीर जीवन में हर परिवर्तन के साथ बहुत सारे बदलावों से गुजरता है, चाहे वह यौवन, मातृत्व या मेनोपॉज हो, जो विभिन्न चरणों में विभिन्न स्वास्थ्य चिंताओं का कारण बनता है। हालांकि ये आम स्वास्थ्य समस्‍याएं उनके जीवन में बाधा पैदा करते हैं, उनकी दिनचर्या को प्रभावित करते हैं। इसलिए, सामान्य स्वास्थ्य चिंताओं का मैनेज करने में मदद करने के लिए अतिरिक्त देखभाल और सप्‍लीमेंट की आवश्यकता होती है। 

महिलाओं के बीच आम स्वास्थ्य चिंताओं को मैनेज करने के लिए इस आर्टिकल में कुछ टिप्‍स दिए गए हैं। इन टिप्‍स के बारे में हमें हिमालया ड्रग कंपनी की आयुर्वेदा एक्‍सपर्टस डॉक्‍टर श्रुति हेगड़े और डॉक्‍टर प्रतिभा बबशेट जी बता रही हैं।

अनियमित पीरियड्स

Irregular Menstrual Cycle inside

यह ज्यादातर महिलाओं द्वारा जीवनशैली में बदलाव, बढ़ते तनाव या हार्मोनल समस्‍याओं के कारण अनुभव किया जाता है। टॉनिक या गोलियों के रूप में सप्‍लीमेंट लिया जा सकता है, जिसमें अशोका, शतावरी, और लोधरा जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां शामिल हैं। ये जड़ी-बूटियाँ अंतर्जात हार्मोनल स्राव को नियमित करने में मदद करती हैं, यूट्रस की परत को शांत करती हैं, चक्रीय लय को ठीक करती हैं और इस तरह महिलाओं की स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़े लक्षणों से राहत प्रदान करती हैं।

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पीरियड्स में ऐंठन

periods cramps inside

कई महिलाओं को हर महीने पीरियड्स में ऐंठन का अनुभव होता है। हालांकि यह कुछ महिलाओं के लिए बहुत ज्‍यादा दर्दनाक नहीं होता है तो वही दूसरी तरफ कई महिलाओं के लिए यह उनकी दिन-प्रतिदिन के कामों को प्रभावित करने के लिए काफी गंभीर हो सकता है। पीरियड्स में होने वाली इस असुविधा को कम करने के लिए, यशतिमाधु और दालचीनी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों दी जा सकती हैं, क्योंकि ये दर्द और यूट्रस की मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने में मदद करने के लिए जानी जाती हैं।

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क्लाइमेक्टेरिक के दौरान मानसिक और शारीरिक समस्‍याएं 

climacteric inside

क्लाइमेक्टेरिक वह चरण है जो रिप्रोडक्टिव से नॉन-रिप्रोडक्टिव चरण में संक्रमण को चिह्नित करता है, जो सिर्फ पेरिमेनोपॉज, मेनोपॉज और मेनोपॉज के बाद के चरणों को संदर्भित करता है। यह संक्रमण मानसिक और शारीरिक लक्षण ला सकता है। इस चरण के दौरान मानसिक और शारीरिक तनाव का प्रबंधन करने के लिए, महिलाएं हर्बल समाधान की तलाश करती हैं। ऐसे में आप अशोक, मुलेठी और शतावरी जैसी जड़ी-बूटियों को ले सकती हैं। ये जड़ी-बूटियां क्लाइमेक्टेरिक के लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं और कल्याण की भावना सुनिश्चित करती हैं।

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हेल्‍दी जीवनशैली को बनाए रखते हुए जिसमें संतुलित आहार शामिल है, 30 मिनट की एक्‍सरसाइज (सप्ताह में कम से कम 4 दिन) जरूरी है और किसी भी रूप में आयुर्वेदिक और प्राकृतिक अवयवों का सेवन यह सुनिश्चित करने के लिए एक अच्छा तरीका है कि शरीर सामान्य बीमारियों से मुक्त है। इसलिए महिलाओं को जीवन के सभी चरणों में कल्याण और खुशी सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।

अगर आप भी हेल्‍थ से जुड़ी इन समस्‍याओं से परेशान हैं तो नेचुरल तरीके से इनका समाधान करें। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

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