एंग्जायटी यानी चिंता जो कि किसी को भी हो सकती है, इसलिए इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। एंग्जाइटी में अक्सर विचार तेजी से आते हैं और उतनी तेजी से चले भी जाते हैं। लेकिन इस स्थिति में व्यक्ति की सांसों की गति तेज होने लगती हैं और पैर-हाथ ठंडे होने लगते हैं। अक्सर यह समस्या परीक्षा के दौरान अधिक होती है। अगर आप किसी चीज को लेकर बार-बार सोचने लगती हैं तो उससे भी एंग्जायटी की समस्या उत्पन्न होती है। यह समस्या इन दिनों हर तीसरे व्यक्ति को है। लेकिन अगर आप इस समस्या से छुटकारा पाना चाहती हैं तो कुछ चीजों को अपनी रूटीन में शामिल करना जरूरी है।

इन दिनों लोगों को हेल्दी डाइट के साथ-साथ योगा को अपनी रूटीन में शामिल करने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर्स के मुताबिक अगर वह कुछ समय अपने आप को दें तो एंग्जायटी के साथ-साथ कई शारीरिक परेशानियों को आसानी दूर किया जा सकता है। बता दें कि कभी-कभी चिंता करना ठीक है लेकिन बार-बार वही सोचते रहने से एंग्जायटी डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है।

एंग्जायटी को पहचाने

a anxiety disorder

आमतौर पर एंग्जायटी के लक्षण चिंता और डर होता है लेकिन कई बार इसकी वजह से सांस लेने में तकलीफ़, नींद न आना या फिर इसी तरह की अन्य समस्याएं होने लगती हैं। इसके लक्षण आपके एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रकार पर निर्भर करते हैं। एंग्जाइटी डिसऑर्डर कई तरह के होते हैं, जिसमें पैनिक डिसऑर्डर, सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर, स्पेसिफिक फोबिया, आदि शामिल हैं।

योगा करें

Yoga for Anxiety

योग और मेडिटेशन के जरिए भी आप अपने दिमाग को शांत कर सकते हैं। आसन की प्रैक्टिस, और मेडिटेशन टेक्निक के जरिए आप मूड और विचारों को बेहतर तरीके से कंट्रोल कर सकती हैं। योग और मेडिटेशन में ऐसे कई तरीके हैं, जिसके जरिए आप अपने विचारों को न सिर्फ कंट्रोल कर सकती हैं बल्कि पहले की तुलना में अधिक फ्रेश भी महसूस करेंगी।

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खुद से बातें करें

Power of Self Talk

स्ट्रेस फ्री लाइफ जीने के लिए खुद से बात करने की आदत डालें। खुद से बात करते हुए चलना एक तरह की थैरिपी है जिसकी मदद से आप न सिर्फ अपने दिमाग को बल्कि अपने शरीर को भी हेल्दी रख सकती हैं। अगर आप ऑफिस में काम करती हैं तो कुछ वक्त टहलने की कोशिश करें और कुछ मिनट तक खुद से बात करते रहें। खुद से बात करने की आदत डाल लें तो आपके दिमाग को शांति मिलेगी।

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एंग्जायटी दूर करे ये आसन

Asanas for Anxiety

हेल्दी रहने के लिए फिजिकल, मेंटल, और इमोशनल तीनों तरीके से स्वस्थ रहना जरूरी है। इन तीनों को मेंटेन रखना महत्वपूर्ण है। अगर आप अपने शरीर का ख्याल रख रही हैं तो ठीक उसी तरह आपको मेंटली और इमोशनली भी अपना ध्यान रखना चाहिए। अगर आप चाहें तो इसके लिए अपने रूटीन में इस आसन को शामिल कर सकती हैं।

  • बद्ध कोणासन- बद्ध कोणासन यानी बटरफ्लाई पोज, इसे करने के लिए आप सीधे बैठ जाएं और इस दौरान अपने दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा रखें। अब अपने पैरों को मोड़कर हाथों की उंगलियों को पैरों के पंजों के ऊपर लाकर आपस में मिला लें। इस दौरान आपकी एड़ियां शरीर से सटी हुई होनी चाहिए। सामान्य रूप से सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ यानी बटरफ्लाई की तरह ऊपर ले जाएं और फिर नीचे लाएं। ऐसा रोजाना 15 से 20 बार करना चाहिए।
  • पश्चिमोत्तानासन- इसे करने के लिए अपने दोनों पैरों को आगे की दिशा में फैला लें। इसके बाद अपने बाजुओं को सीधा करें और उन्हें आगे की ओर ले जाएं। इस दौरान अपने दोनों पैरों की उंगलियां यानी अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करें और अपनी नाक से घुटनों को टच करने की कोशिश करें। इस बीच अपने घटुनों और दोनों बाजुओं को सीधा रखें। रोजाना इस आसन को 3 से 4 बार करने से फायदा आपको खुद ब खुद नजर आने लगेगा।
  • दंडासन- दंडासन करने के लिए सीधा बैठ जाएं और अपनी टांगों को सीधा फैला लें। इसके बाद पैरों की उंगलियों को अंदर की ओर मोड़ें लेकिन तलवों को बाहर की ओर ही रखें। अब अपने बाजुओं को कमर के बराबर सीधा रखें और कूल्हे को जमीन पर बराबर सटा लें। इसके बाद अपने सिर को नीचे की ओर झुकाकर अपनी नजर को नाक पर फोकस करने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया को रोजाना 6 से 7 बार करें।
  • उत्तरासन- उत्तरासन में आपको अपने शरीर को ऊंट की मुद्रा में रखना है। इसके लिए अपने पैरों को पिछली दिशा की ओर मोड़कर सीधा कर लें। अब अपने शरीर को पीछे की ओर ले जाने की कोशिश करें और इस दौरान दोनों हाथों को एड़ियों पर रख लें। ध्यान रखें कि इस आसन को करते वक्त अपने दोनों बाजुओं को सीधा रखें। रोजाना इस आसन को सुबह-सुबह करें, इससे आपको काफी फायदा मिलेगा। 

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