कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के चलते देश में अब तक कुल 415 मामले सामने आए हैं, हालांकि 23 मरीज ठीक हो चुके हैं, लेकिन 7 लोगों की मौत हुई है। यह सब देखते हुए दिल्ली-19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है। देश की 13 लेबोरेट्री चेन को कोरोना के टेस्ट के लिए रजिस्टर किया गया है। इनके देशभर में 15,000 कलेक्शन सेंटर हैं। ऐसे में लोगों से दूरी बनाए रखने और आइसोलेशन के लिए कहा जा रहा है। भारत की एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉक्‍टर रमाकांत पांडा का इस बारे में क्‍या कहना है, आइए विस्‍तार से जानते हैं। 

डॉक्‍टर रमाकांत पांडा का कहना है कि 'कोरोना वायरस जैसी महामारी का प्रकोप फैलने पर सभी को बेहद सतर्क रहने और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं द्वारा निर्देशित एहतियातों का पालन करने सबसे अधिक जरूरत है। कोरोना वायरस और दूसरी समान बीमारियों में सबसे बड़ा फर्क यह है कि 80 प्रतिशत मामलों में इसके लक्षण बेहद मामूली दिखाई देते हैं। केवल 15 प्रतिशत मामलों में यह तीव्र दिखते है जिन्हें हॉस्टिपल में भर्ती करने और सही केयर की जरूरत होती है और केवल 4-5 प्रतिशत मामलों में ही इंटेन्सिव केयर की और वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत होती है।' 

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इसके तेजी से फैलने का कारण यही 80 प्रतिशत मामलों में लक्षणों का बहुत ही नॉर्मल होना है। इसके चलते पता ही नहीं चल पाता और न ही रोगी को अलग-थलग नहीं रखा जाता है। वास्तव में यही लोग रोग को फैलाते हैं। इसके मुकाबले सार्स या मर्स बीमारी के अधिकांश मामलों में लक्षण इतने कठोर और स्पष्ट होते हैं कि आसानी से पता लगाकर उन्हें अलग रखा जा सकता है।

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डॉक्‍टर रमाकांत पांडा ने इस बात को दोबारा दोहराया कि सरकार द्वारा सामाजिक दूरी और अलगाव जैसे कदम कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। इस संदर्भ में रोकथाम के लिए उठाए गए स्‍टेप्‍स इस प्रकार है-

कोविड-19 साधारण जुकाम और फ्लू के मुकाबले अधिक संक्रामक है। चूंकि यह सर्वाधिक संक्रामक है इसलिए सामाजिक दूरी बनाना सबसे अधिक जरूरी है। इस संदर्भ में सरकार द्वारा उठाए गए कदम बेहद अच्छे हैं क्योंकि कोरोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति की पहचान इतनी आसान नहीं है। हर नागरिक को यह समझना चाहिए कि ऐसे में किया गया सहयोग लंबे समय में उनके ही हित में है।

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श्वास नलिका के किसी भी वायरस के संचरण की क्षमता के आधार पर ही उसकी रोकथाम के उपाय बनते है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के नवीनतम अंक के अध्ययन के अनुसार इसकी मूलभूत प्रजनन क्षमता को 2.2 आंका गया है यानि औसतन इस बीमारी से प्रभावित हर व्यक्ति दो लोगों में इसका इनफेक्शन प्रसारित करता है। अगर इस बीमारी पर रोक लगानी है तो इसकी प्रजनन क्षमता को 1 प्रतिशत से नीचे लाना ही होगा।

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इसके लिए आपको सामाजिक अलगाव लाइफस्‍टाइल हिस्सा बनाना होगा, क्योंकि यह वायरस अगले 3 से 6 महीने तक लगातार इंफेक्‍शन फैलाता रहेगा और समय-समय पर इसके मामलों में वृद्धि होती दिखेगी। चूंकि इसका टीका तैयार होने में अभी समय लगेगा इसलिए यह जरुरी है कि सभी स्वास्थ्य मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करें।

वयस्क लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे इस बीमारी के आरंभ में गले के भीतर वायरस की एकाग्रता से निपटने के लिए भाप की सांस लें और नमक वाले गुनगुने पानी के गरारे करें।