हार्ट अटैक तब होता है जब हार्ट में ऑक्‍सीजन युक्‍त ब्‍लड का फ्लो अचानक से कम हो जाता है। पहले इसे बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था लेकिन आजकल की खराब लाइफस्‍टाइल, काम के बढ़ते बोझ और अनहेल्‍दी डाइट के कारण हार्ट अटैक किसी को भी हो सकता है। हार्ट अटैक दिल की बीमारियों में प्रमुख माना जाता है जो पूरे विश्व में तेजी से फैल रहा है। अगर सही समय पर इसका इलाज नहीं किया जाता है तो मृत्यु होने की भी संभावना होती है। 

आमतौर पर यही माना जाता है कि महिलाएं हार्ट अटैक से सुरक्षित हैं और उन्हें बहुत अधिक जोखिम होने पर ही हार्ट की बीमारी होती है। लेकिन अनुसंधान दर्शाते हैं कि न सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाओं को भी हार्ट अटैक का उतना ही खतरा रहता है। इसलिए महिलाओं को इसके लक्षणों को बिल्‍कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विभिन्‍न प्रकार के हार्ट अटैक, इसके लक्षणों और देखभाल से जुड़े कई तरह के सवाल हमारे जहन में होते हैं। इसलिए आज एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, डॉक्‍टर तिलक सुवर्णा आपके ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब दे रहे हैं।   

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सवाल: विभिन्न प्रकार के हार्ट अटैक के लक्षण क्‍या है? 

जवाब: हार्ट अटैक का सबसे आम और सबसे ज्‍यादा महसूस होने वाला लक्षण सीने में दर्द है। लेकिन सभी रोगियों में हार्ट अटैक सीने में दर्द के साथ उपस्थित नहीं होते हैं। ऐसे अन्य लक्षण हैं जिनके साथ एक व्यक्ति को हार्ट अटैक पड़ सकता है और उनमें शामिल हैं- 

  • पीठ या कंधे या जबड़े या बाहों में दर्द
  • चेस्‍ट या पेट में झनझनाहट 
  • सांस लेने में तकलीफ 
  • पसीना बहना
  • बेहोशी 

डायबिटीज के रोगी को विशेष रूप से एटिपिकल लक्षणों के साथ हार्ट अटैक हो सकता है या असामान्य रूप से हार्ट अटैक के लक्षणों के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं जिसे  तथाकथित "साइलेंट हार्ट अटैक" कहा जाता है।

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सवाल: क्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग होते हैं?

जवाब: जरूरी नहीं है कि हार्ट अटैक के लक्षण महिलाओं में अलग हो। सीने में दर्द पुरुषों और महिलाओं दोनों में सबसे आम लक्षण है। हालांकि, कुछ महिलाओं को एटिपिकल लक्षण महसूस हो सकते हैं, जैसा कि ऊपर विस्तार से बताया गया है।

लेकिन अधिक महत्वपूर्ण और अफसोस की बात यह है कि हार्ट अटैक के संदेह का सूचकांक महिलाओं में अधिक है और उनके लक्षणों को अक्सर गैर-कार्डियक के रूप में खारिज कर दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं में देरी से होने वाले निदान और उपचार में देरी होती है।

इसके अलावा, महिलाएं अपने लक्षणों को पुरुषों की तुलना में बहुत अधिक हद तक सहन करती हैं और इसलिए चिकित्सा की मांग करने में देरी करती हैं।

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सवाल: हार्ट अटैक के लक्षण दिखने पर क्‍या करना चाहिए? 

जवाब: सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके घर में किसी को हार्ट अटैक पड़ने की स्थिति में आप सभी के पास एक्‍शन लेने का प्‍लान होना चाहिए। और सभी को प्‍लान से परिचित होना चाहिए। इसमें आप में से कम से कम एक को कार्डिएक अरेस्ट के मामले में सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) जैसे बुनियादी लाइफ सपोर्ट उपायों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा, आपके परिवार के डॉक्टर, एम्बुलेंस और पास के नर्सिंग होम या अस्पतालों जैसे महत्वपूर्ण संपर्क नंबर होने चाहिए।

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अगर आपको लगता है कि आपको हार्ट अटैक पड़ रहा है तो आपको तुरंत बैठ जाना चाहिए या लेट जाना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि वह ज्यादा न हिलें। आपको तुरंत अपने परिवार के सदस्यों को कॉल करना चाहिए और अपने परिवार के डॉक्टर या एम्बुलेंस तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए ताकि आपको निकटतम मेडिकल सेंटर में ले जाया जा सकें। आपको कभी भी खुद से गाड़ी चलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

इस बीच, यदि आपके पास घुलनशील एस्पिरिन टैबलेट है तो आपको तुरंत एक लेनी चाहिए।

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हार्ट अटैक पड़ने की स्थिति में समय मुख्य होता है। सीने में दर्द की शुरुआत से कुछ घंटों के भीतर हार्ट अटैक पड़ता है, या तो एंजियोप्लास्टी के साथ या दवाओं के साथ, तो यह अवरुद्ध हृदय धमनी को खोलने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह हार्ट की मसल्‍स को उबारने और जीवन बचाने के लिए किया जाता है। इसलिए, सभी प्रयासों को कम से कम समय में उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।

अगर आपके मन में भी हार्ट हेल्‍थ से जुड़े कुछ सवाल हैं तो फेसबुक पर हमें कमेंट करके जरूर बताएं? हार्ट से जुड़ी और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

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