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    प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम क्‍या है इसके जोखिम कारक, लक्षण और उपचार के बारे में जानें

    महिलाओं को प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का अनुभव कब होता है इससे जुड़े जोखिम कारक और ट्रीटमेंट के बारे में डॉक्‍टर से विस्‍तार में जानें। 
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    Updated at - 2020-09-16,10:39 IST
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    प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) एक भावनात्मक और शारीरिक बदलाव है जिसे महिलाएं मेंस्ट्रुएशन के दौरान महसूस करती हैं। पीएमएस का कोई विशेष समय नहीं होता है। ये ओवेल्यूशन से लेकर मेंस्ट्रुएशन तक किसी भी समय शुरू हो सकता है। औसतन 80-90% महिलाएं अपनी लाइफ में पीएमएस का अनुभव करती हैं। ज्यादातर मामलों में ये हल्का या मीडियम लेवल के बदलाव लाता है जिससे दिनचर्या पर असर न पड़े। हालांकि, गंभीर मामलों को प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्ट्रोफिक डिसऑर्डर (पीएमडीडी) कहा जाता है। इस स्थिति को खुद से मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और डॉक्टर की मदद की जरूरत होती है। 

    पीएमएस का सटीक कारण अभी तक अज्ञात नहीं है। हालांकि, रिप्रोडक्टिव हार्मोनल बदलाव और सेरोटोनिन प्रभाव इसके साथ जुड़े पाए गए हैं। सेरोटोनिन का लो लेवल (ब्रेन और आंत में मौजूद एक हार्मोन) मूड, भावनाओं और विचारों को प्रभावित करता है।

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    प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से जुड़े जोखिम

    किसी को भी पीएमएस हो सकता है, लेकिन कुछ जोखिम कारक निश्चित रूप से पीएमएस को ट्रिगर कर सकते हैं। इसमें शामिल है:

    • पीएमएस या डिप्रेशन की फैमिली हिस्ट्री 
    • फिजिकल या/और मेंटल ट्रॉमा
    • किसी तरह का शोषण
    • एंग्जाइटी और डिप्रेशन से जुड़े डिसऑर्डर्स की हिस्‍ट्री
    • डिसमेनोरिया

    प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षण

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    ऐसा नहीं है कि हर कोई हर समय सभी लक्षणों का अनुभव करेगा। निम्नलिखित में से दो या तीन लक्षण एक महीने में अनुभव किए जा सकते हैं। इसके अलावा पीएमएस के कई लक्षण हैं, लेकिन सबसे आम लक्षणों में शामिल हैं:

    भावनात्मक लक्षण

    • चिड़चिड़ापन
    • तेज गुस्सा आना
    • एंग्जाइटी
    • बहुत ज्यादा रोना आना 
    • डिप्रेशन 
    • भ्रम होना
    • इनसॉम्निया या ज्यादा नींद आने जैसी नींद संबंधित समस्याएं होना
    • ध्यान न लगना 
    • समाज से दूरी बनाना
    • सेक्शुअल इच्छा में बदलाव आना

    शारीरिक लक्षण

    • ब्रेस्ट का नरम पड़ना
    • पेट फूलना
    • वजन बढ़ना
    • खाने की इच्छा होना
    • सिरदर्द
    • हाथ और पैरों में सूजन
    • दर्द और पीड़ा होना
    • थकान 
    • स्किन से जुड़ी समस्याएं होना
    • पेट में दर्द होना
    • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण दिखना

    ये लक्षण अंतर्निहित डिप्रेशन और एंग्जाइटी डिसऑर्डर्स के कारण भी हो सकते हैं। कभी-कभी यह प्रीमेनोपॉज़ल महिलाओं में भी शुरू हो सकते हैं। महिलाओं में डिप्रेशन और एंग्जाइटी डिसऑर्डर्स पर सुपरिम्पस प्रीमेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम हो सकता है। पीएमएस की गंभीरता व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होती है। अपने धीरज स्तर के आधार पर आपको चिकित्सा सलाह लेने का निर्णय लेना होगा।

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    पीएमएस का डायग्‍नोसिस कैसे करें?

    • लक्षणों का एक पैटर्न है जो एक महिला नोटिस करती है:
    • लक्षण उनके मेंस्ट्रुअल साइकिल्‍स के शुरू होने से 5-7 दिन पहले होते हैं और यह एक पंक्ति में कम से कम तीन साइकिल्‍स के लिए होता है। लक्षण चार दिनों के अंदर समाप्त हो जाते हैं।
    • लक्षण दिनभर की एक्टिविटी में बाधा डालते हैं।
    • मेंस्ट्रुअल डेट्स, लक्षणों का एक विस्तृत रिकॉर्ड, वे कितने समय तक चलते हैं, आदि से डॉक्टर को समस्या का डायग्‍नोज करने में मदद मिलेगी।

    प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम को मैनेज कैसे करें?

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    पीएमएस का कोई सटीक इलाज नहीं है। हालांकि लाइफ में कुछ बदलावों को अपनाने से लक्षणों की गंभीरता को कम करना संभव है। इसमें शामिल है:

    • रेगुलर एक्‍सरसाइज - फिजिकल एक्‍टिव रहने से हार्मोन के उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी। यह मूड स्विंग, डिप्रेशन, एंग्जाइटी, चिड़चिड़ापन और नींद की गड़बड़ी को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह पाया गया है कि नियमित 30 मिनट के एक्‍सरसाइज सेशन से पीएमएस को कम किया जा सकता है।
    • स्‍ट्रेस मैनेजमेंट और रिलैक्‍सेशन थेरेपी पीएमएस को कम करने में बहुत मदद करती हैं। रिलैक्सेशन थेरेपी में मेडिटेशन, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और योग शामिल हैं। मसाज थेरेपी एक अन्य प्रकार की रिलैक्‍सेशन थेरेपी है जिसे आप आजमा सकती हैं।
    • अगर सेल्‍फ रिलैक्‍सेशन मदद नहीं करता है तो किसी को नैदानिक मनोवैज्ञानिकों की सहायता लेनी चाहिए, जैसे कि कभी-कभी सम्मोहन और बायोफीडबैक थेरेपी मदद कर सकती है।
    • नियमित नींद की आदत पीएमएस की रोकथाम का एक अनिवार्य हिस्सा है जो मूड और थकान को कम करने में मदद करती है।
    • अच्छी तरह से हाइड्रेटिंग वॉटर रिटेंशन और पेट फूलना को रोक सकता है।
    • विटामिन सप्‍लीमेंट लेने से ऐंठन और मूड स्विंग जैसे लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम भी आपकी मदद कर सकते हैं।

    डाइटरी बदलाव

    • अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और एनर्जी के लेवल में सुधार के लिए संतुलित आहार लें।
    • कैफीन का सेवन कम करें।
    • छोटे लगातार भोजन लें।
    • शुद्ध स्टार्च, बहुत अधिक नमक, फैट और चीनी के सेवन से बचें।
    • अपने आहार में सब्जियों और फलों का भरपूर सेवन करें।

    अगर आपके लक्षण असहनीय हैं और इससे आपकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है तो मेडिकल सपोर्ट लें। आपकी स्थिति के हिसाब से अपनी लाइफस्टाइल को सही करने के अलावा स्ट्रेस मैनेजमेंट क्लास या एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां या हार्मोनल दवाइयां लेने की सलाह दी जा सकती है। इस प्रकार एक हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल और एक व्यापक उपचार योजना ज्यादातर महिलाओं में पीएमएस और पीएमडीडी के लक्षणों को कम और नियंत्रित कर सकती है।

    एक्‍सपर्ट सलाह के लिए डॉक्‍टर रागिनी अग्रवाल (एमएस, एफआईसीओजी, एफआईसीएमसीएच) को विशेष धन्यवाद।

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