किसी भी महिला की सुंदरता में breast की अहम भूमिका होती है। इसलिए अपनी सुंदरता को बरकरार रखने के लिए वह अपनी ब्रेस्‍ट की बहुत केयर करती हैं लेकिन एक छोटी सी भूल उसकी सुंदरता को कम कर सकती हैं। महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोंन से ब्रेस्‍ट का विकास होता हैं। लेकिन ब्रेस्‍ट की सामान्य प्रक्रिया का असामान्य प्रक्रिया में बदलना बीमारी पनपने का संकेत हो सकता है। ये समस्या किसी भी महिला को हो सकती है। Breast disorders के लिए जरूरी नहीं कि आप सीधे चिकित्सक के पास जाए आप खुद से भी अपनी ब्रेस्‍ट का चेकअप कर सकती हैं।

Breast self exam ब्रेस्ट कैंसर के primary investigation process है जिसमें आप खुद से अपने ब्रेस्‍ट का चेकअप करके पता लगा सकती हैं कि कहीं आप ब्रेस्‍ट कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में तो नहीं हैं। ब्रेस्ट कैंसर के first stage में इस checkup से आप समस्या का पता लगा सकती हैं ताकि इस शुरुआती अवस्था में ही treatment किया जा सके।

आज के समय में हर महिला वर्ग में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता होना जरूरी है। इस बात को भी स्वीकार करना बेहद जरूरी है कि यह भी अन्य रोगों की तरह ही है और इसे स्वीकारने में किसी तरह की शर्मिंदगी नहीं होनी चाहिए। कुछ खास लक्षणों के माध्यम से आप breat cancer की पहचान कर सकती हैं।

ब्रेस्‍ट कैंसर की जांच खुद से करें

Breast की जांच का एक महत्वपूर्ण कारण breast cancer है, जो आजकल की महिलाओं की एक आम समस्या बन गई है। अगर breast कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में पता लग जाएं तो इसका सही समय पर उपचार संभव हो सकता है और आपका जीवन बच सकता हैं। इस बारे में जानने के लिए Jaslok Hospital and Research Centre की Consultant specialist Dr Shilpa Agrawal से बात की तब उन्‍होंने हमें बताया कि ब्रेस्‍ट कैंसर की जांच खुद से कैसे की जा सकती हैं। आइए हमारे साथ-साथ आप भी जानें।

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Dr Shilpa Agrawal का कहना हैं कि ''महिलाओं का मानना हैं कि ब्रेस्‍ट self examination 40 की उम्र के बाद करना चाहिए। लेकिन यह गलत है क्‍योंकि हर महिला को 20 की उम्र के बाद breast self examination करना चाहिए। क्‍योंकि ब्रेस्‍ट कैंसर किसी को भी किसी भी उम्र हो सकता है। एक बात और ज्‍यादातर महिलाएं नहाते समय ब्रेस्‍ट का examination जल्‍दी में करती हैं लेकिन यह तरीका सही नहीं है। ब्रेस्‍ट का चेकअप थोड़ा समय लेकर करना चाहिए।'' 

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Dr Shilpa Agrawal ने यह भी कहा कि ''ब्रेस्‍ट के आकार और बनावट में नियमितता को परखने के लिए महीने में एक बार breast self examination को करना बेहतर होता है। पीरियड्स के आखिरी दिन का समय इसके लिए सबसे अनुकूल होता है, इस दिन को नोट कर अगली जांच एक महीने बाद करें। पीरियड्स के दौरान चेकअप के लिए इसलिए भी मना करते हैं क्‍योंकि इस समय कई महिलाओं के ब्रेस्‍ट में पेन और गांठ जैसा महसूस होता है। इसके अलावा मीनोपोज के बाद महिलाओं को breast self examination के लिए एक डेट फिक्‍स कर लेनी चाहिए। आप हर म‍हीने की 1 तारीख को चुन लें ताकी आपको यह डेट याद रहें।''

अपने ब्रेस्‍ट का चेकअप करते समय आप इस बात का ध्यान रखें कि आप ब्रेस्‍ट का चेकअप कैंसर या सिस्ट देखने के लिए नहीं बल्कि अपने ब्रेस्‍ट में आए बदलाव को देखने के लिए कर रही हैं। वैसे तो खुद से चेकअप करने के कई तरीके हैं। लेकिन आपके लिए बहुत जरूरी हैं कि आप यह जान लें कि आपके लिए कौन सा तरीका सबसे अच्छा हो सकता है।

शीशे के सामने खड़े होकर करें breast self examination

Dr Shilpa Agrawal के अनुसार, ''इस तरह से ब्रेस्‍ट self examination करने के लिए सबसे पहले शीशे के आगे कपड़े निकलकर खड़ी हो जाए फिर अपने दोनों हाथों को हिप्‍स पर रख लें। इस examination में आपको शीशे के आगे खड़े होकर सिर्फ अपनी ब्रेस्‍ट को देखना है कि उसमें कोई बदलाव तो आपको नहीं दिख रहा। जी हां इसमें ब्रेस्‍ट के कलर, साइज और शेप पर ध्‍यान देना है। आपको देखना है कि दोनों breast के आकार और शेप में कोई अन्तर तो नही है या आपकी ब्रेस्‍ट का कलर पहले से थोड़ा बदला हुआ तो नहीं हैं। दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर भी इस प्रक्रिया को दोहराएं।

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Breast self examination quiz

घर पर करें breast self examination, जानिए कैसे

किस उम्र में breast self examination करना चाहिए?

 

20 साल

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30 साल

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40 साल

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50 साल

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Breast self examination कब करना चाहिए?

 

महीने में 2 बार

,

 

दो महीने में 1 बार

,

 

महीने में 1 बार

,

Breast self examination कैसे करना चाहिए?

 

शीशे के सामने

,

 

सीधे लेटकर

,

 

नहाते समय

,

 

उपरोक्‍त सभी

,

Breast self examination का सही समय क्‍या है?

 

पीरियड्स से पहले

,

 

पीरियड्स के दौरान

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पीरियड्स खत्‍म होने के बाद

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कभी भी

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Breast self examination के दौरान क्‍या चेक करना चाहिए?

 

ब्रेस्‍ट का आकार और रंग

,

 

ब्रेस्‍ट की बनावट और गांठ

,

 

निप्पल में बदलाव और स्राव

,

 

उपरोक्‍त सभी

 

सीधे लेटकर करें breast self examination

सीधा लेटने पर अपने breast में आए बदलाव को महसूस करें। पीठ के बल लेट जाएं। बाएं कंधे के नीचे तकिया लगाएं। बाएं हाथ को सिर के नीचे रखें तथा सीधे हाथ की हथेली के हल्के दबाव से breast को दबा कर गांठ की जांच करें। ब्रेस्‍ट के बाहरी ओर यानि बगल की तरफ breast की चेकअप करें। बाई बांह को नीचे करके उंगलियों के समतल हिस्से से बाई बगल में दबाव डालते हुए चेकअप करें। इसी तरह दाई ओर से भी इस प्रक्रिया को दोहराकर दाएं breast की चेकअप करें। इसमें  ब्रेस्‍ट self examination करने के लिए सर्कुलर मोशन में करें या ऊपर से नीचे करें।

नहाते समय करें breast self examination

नहाते समय भी आपको ब्रेस्‍ट self examination जल्‍दी बाजी में नहीं करना बल्कि खुद को थोड़ा समय देना है। और निप्‍पल प्रेस करके देखना है कि कहीं निप्‍पल अंदर की ओर तो नहीं चला गया है या निप्‍पल से किसी तरह का स्राव तो नहीं हो रहा है। या निप्पल के आकार, बनावट, गोलाई में कोई अंतर तो नहीं है।

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पहली बार breast self examination में आती है कुछ परेशानी

पहली बार अपने breast का चेकअप करते समय कुछ भी जान पाना थोड़ा कठिन होता है। लेकिन बार-बार करने से आप अपनी breast के बारे में जानने लग जाएंगी। अपने breast के बारे में चेकअप के दौरान अपने अहसास के बारे में ज्‍यादा जानने के लिए आप अपनी डॉक्टर से भी पूछें क्योंकि वे ही आपके breast का चेकअप करते हैं।

इसके अलावा अपनी डॉक्‍टर से भी breast का चेकअप करवाना बहुत जरूरी होता है। अगर आप की उम्र 20-30 साल की है तो डॉक्‍टर से अपने breast का चेकअप हर 3 साल में करवाएं और अगर आपकी उम्र 40 साल से ज्यादा है तो हर साल चेकअप करवाये।

अपने ब्रेस्‍ट में किसी भी तरह के बदलाव जैसे मुलायम गांठ, कठोर गांठ या breast में मोटापन, breast के आकार या बनावट में बदलाव, त्वचा में गड्डा या सिकुड़न, निप्पल में किसी भी तरह के बदलाव या पानी आने पर तुरंत अपनी डॉक्‍टर से संपर्क करें।