हर महीने होने वाले पीरियड्स बहुत पेनफुल होते है और जी मिचलाना, मितली, मूड स्विंग्‍स के कारण लड़कियां बहुत ज्‍यादा परेशान रहती हैं। इसलिए ज्यादातर लड़कियां इसके बिना रहना पसंद करती हैं। लेकिन अगर पीरियड्स हर महीने समय पर ना आए तो भी चिंता होने लगती है। लड़कियों की इस बारे में राय जानने के लिए हमने उनसे पूछा कि इस बारे में ऐसी दो चीजें बताओ जिससे आप सबसे ज्यादा नफरत करती हैं तो ज्यादातर लड़कियों का यहीं जवाब था अप्रत्याशितता और पीरियड्स के लक्षण जिसमें उन्हें सबसे ज्यादा दर्द होता है। हालांकि हर उम्र में ये दोनों चीजें काफी हद तक भिन्न होती हैं।

जी हां कई बार पीरियड्स अप्रत्‍याशित होते है, किसी महीने देर से आता है तो कभी समय से पहले ही आ जाते है। कभी-कभी ब्‍लीडिंग एक हफ्ते तक रहती हैं तो कभी 2-3 दिन में ही बंद हो जाते है। स्‍ट्रेस, हेल्‍थ या लाइफस्‍टाइल में बदलाव का असर पीरियड्स पर पड़ता है। इसके अलावा उम्र के साथ भी इसमें बदलाव आने लगता है। आइए जानें उम्र के अनुसार पीरियड्स में किस तरह का बदलाव देखा जा सकता है।

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20 की उम्र में पीरियड्स

periods change as age inside

यह वह उम्र है जब आपके पीरियड्स  अनियमित और अचानक होने से होने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किशोरावस्था में नियमित रूप से ओव्यूलेट नहीं होता हैं। हालांकि, रेगुलर पीरियड्स में एक नकारात्मक पहलू यह है कि पीएमएस के लक्षण इसके साथ आते हैं, जो बदतर हो सकते हैं। ऐसे में आपको ब्रेस्ट में कोमलता, पेट में ऐंठन और अन्य पूर्व लक्षणों का अनुभव होता है। अंतिम परिवर्तन जो आपके 20 के दौरान आ सकता है, वह हार्मोनल परिवर्तन है जो गर्भनिरोधक गोलियों के कारण होता है। कई हार्मोनल गर्भनिरोधक से आपके पीरियड्स अधिक रेगुलर और लाइट भी हो सकते है। अच्छी बात यह है कि यह पीएमएस के लक्षणों को भी कम कर सकता है। लेकिन आपको इसे लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। बॉडी को इसकी आदत होने में समय लगेगा लेकिन अगर 3 महीने से ज्‍यादा समय तक ऐसा होता है तो आपको अपनी डॉक्‍टर से मिलना चाहिए।

30 की उम्र में पीरियड्स

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यह वह उम्र है जब पीरियड्स रेगुलर होते हैं। लेकिन किसी भी प्रकार का बदलाव जैसे नॉर्मल से ज्यादा फ्लो होने तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि जब आप आपकी उम्र 30 के आस-पास होती हैं, तो एंडोमेट्रियोसिस और फाइब्रॉएड के मामले भी बेहद आम होते हैं। एक और बड़ा बदलाव जो इस दौरान हो सकता है, वह डिलीवरी से संबंधित है। जितनी महिलाओं के 30 की उम्र में बच्चे होते हैं, प्रेग्नेंसी पूरी तरह से एक महिला के पीरियड्स में बदलाव ला सकती है। पीरियड्स का ब्रेस्टफीडिंग से भी गहरा संबंध है। आमतौर पर, ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली कई महिलाओं में तब तक पीरियड्स नही होते है जब तक पीरियड्स बंद नहीं हो जाते हैं।



साथ ही, एक महिला के पीएमएस के लक्षण भी बच्चे के जन्म के बाद बदल सकते हैं। अक्सर, कई महिलाओं को ऐंठन से छुटकारा मिलता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डिलीवरी के बाद गर्भाशय ग्रीवा का आकार बढ़ जाता है और इसलिए पीरियड्स के दौरान गर्भाशय को संकुचन मिल जाता है।

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40 की उम्र में पीरियड्स

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यह वह समय होता है जब आप किसी समापन की ओर बढ़ रही होते हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमित होना, मिस्ड पीरियड्स, पीरियड्स के बीच स्पॉटिंग और अन्य कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। पेरिमेनोपॉज़ल स्टेज अप्रत्याशितता होती है, हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप प्रेग्‍नेंट नहीं हो सकती हैं। इसके अलावा, इस समय के दौरान, आपके पीएमएस लक्षण खराब हो सकते हैं क्योंकि वे पेरिमेनोपॉज़ल परिवर्तनों के साथ आते हैं। आपको बहुत ज्यादा मूड स्विंग, ज्यादा गर्मी महसूस होना, रात को पसीना आना जैसा महसूस हो सकता हैं और ये पीएमएस या पेरिमेनोपॉज़ के लक्षण हो सकते हैं।

इस तरह उम्र के साथ-साथ आपके पीरियड्स में कई तरह के बदलाव होते हैं।