महिलाओं को हेल्दी और खुशहाल रहने के लिए फैमिली प्लानिंग करना बहुत जरूरी है। अगर आप बर्थ कंट्रोलिंग ऑप्शन्स तलाश रही हैं, तो आईयूडी यानी इंट्रा यूटरीन डिवाइस आज के दौर में सबसे अच्छे विकल्पों में से एक माना जाता है। इसकी कई वजहें हैं। एक तो यह कि एक बार इसे लगा देने के बाद आपको ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव टैबलेट लेने की जरूरत नहीं पड़ती। यह लंबा चलता है और इसकी कीमत भी वाजिब है। यह डिलीवरी के तुरंत बाद लगवाया जा सकता है। इस बारे में हमने बात की डॉ. कुणाल दोषी (एमबीबीएस, एफसीपीएस, डीजीओ, डीएफपी) और उन्होंने हमें आईयूडी से जुड़ी अहम जानकारी दी।

आईयूडी क्या है

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आईयूडी एक टी शेप का इंट्रा यूटरीन डिवाइस होता है, जो यूट्रस से आकार की तुलना में एक चौथाई से ज्यादा होता है। यह डिवाइस यूट्रस में लगाया जाता है और यह बाहर से अपना काम करता है। 

आईयूडी किस तरह से करता है काम

आईयूडी से प्रेग्नेंसी रोकने में मदद मिलती है। यह स्पर्म को यूट्रस तक पहुंचने नहीं देता। इससे एग्स का फर्टिलाइजेशन नहीं हो पाता। इससे इंप्लांटेशन की प्रक्रिया भी संभव नहीं हो पाती। 

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आईयूडी के प्रकार

बाजार में दो तरह की आईयूडी उपलब्ध हैं, एक हार्मोनल और दूसरी नॉन-हार्मोनल( कॉपर डिवाइसेस) आईयूडीज।

हार्मोनल आईयूडीज

  • हार्मोनल आईयूडीज प्रोजेस्टेरोन का सिंथेटिक वर्जन रिलीज करते हैं, जिसे प्रोजेस्टिन के नाम से जाना जाता है। प्रोजेस्टिन को levonorgestrel के नाम से भी जाना जाता है। इसी हार्मोन का कई बर्थ कंट्रोल पिल्स में इस्तेमाल किया जाता है। प्रोजेस्टिन से सर्विक्स में म्यूकस को मोटा बनाने में मदद मिलती है। इससे स्पर्म एग तक नहीं पहुंच पाता। 
  • प्रोजेस्टिन एक और तरीके से काम करता है और वह है यूट्रस की लाइनिंग को पतला करके। इससे यूट्रस में एग इंप्लांट करना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। यह स्पर्म को यूट्रस तक पहुंचने नहीं देता, जिससे एग फर्टिलाइज नहीं हो पाता। 
  • हार्मोनल आईयूडी 5 साल तक काम करती हैं। 

कॉपर या नॉन हार्मोनल आईयूडीज

कॉपर आईयूडीज में किसी तरह के हार्मोन का इस्तेमाल नहीं होता। इसकी बजाय कॉपर का इस्तेमाल होता है, जिससे स्पर्मेटोजोआ डैमेज हो जाता है और एग तक नहीं पहुंच पाता। इससे इंप्लांटेशन रोकने में भी मदद मिलती है। अगर इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन की जरूरत पड़ती है, तो कई डॉक्टर इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं। कॉपर आईयूडीज 3, 5 या 10 साल के लिए लगाई जाती हैं। इन तीनों में कॉपर के अलग-अलग कंपोजिशन का इस्तेमाल किया जाता है। 

हार्मोनल आईयूडीज इस्तेमाल करने के फायदे और नुकसान

  • दोनों तरह की आईयूडीज विश्वसनीय हैं। दोनों आईयूडीज प्रेग्नेंसी रोकने में 99 फीसदी तक कामयाब रहती हैं। साल 2015 में हुई स्टडी के अनुसार हार्मोनल आईयूडीज कॉपर आईयूडीज की तुलना में थोड़ी ज्यादा कारगर साबित होती हैं। इनसे एंडोमेट्रियल कैंसर का जोखिम कम हो जाता है।
  • हार्मोनल आईयूडीज ऐसी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रहती, जिन्हें पेल्विक इन्फेक्शन, सर्वाइकल कैंसर, वेजाइना से होने वाली ब्लीडिंग( जिसका कारण ज्ञात नहीं है) या यूटरीन डिस्ऑर्डर्स हैं। ऐसे मामले, जहां ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री रही है, वहां महिलाओं को इसका इस्तेमाल सावधानी पूर्वक करना पड़ता है,  क्योंकि फैमिली हिस्ट्री की वजह से ऐसी महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। 
  • इससे मैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कम करने और हीमोग्लोबिन का स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है। 

कॉपर आईयूडी के फायदे

  • इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन: इस तरह की आईयूडी तुरंत काम करना शुरू कर देती है, इसीलिए यह इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव के तौर पर इस्तेमाल की जाती है। 
  • किसी तरह के हार्मोन की जरूरत नहीं होती: कॉपर आईयूडी में हार्मोन की जरूरत नहीं होती और यह ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल में सुरक्षित होती है, जो हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल नहीं कर सकते। 
  • कॉपर आईयूडी के अलग-अलग टाइप के आधार पर प्रेग्नेंसी को ये लंबी अवधि तक रोकने में ये सक्षम होती हैं। 

आईयूडीज से अहम तरीके से सुरक्षा मिलती है। यह असरदार है, सेफ है और इसके साइड इफेक्ट्स भी कम हैं। अगर आप आईयूडी इस्तेमाल करने के बारे में सोच रही हैं तो इस बारे में अपनी डॉक्टर से सलाह ले लें, ताकि अपनी जरूरत के अनुसार सही आईयूडी का आप चुनाव कर सकें। 

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