चुभती और झुलसती गर्मियों के बाद आने वाला मानसून थोड़ी राहत दे जाता है, लेकिन इसके साथ ही कई परेशानियां भी आती हैं। खासतौर से महिलाओं को मानसून के दौरान ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि ऐसे समय में वह वेजाइनल इंफेक्शन के अधिक जोखिम पर होती हैं। मानसून के दौरान वेजाइना के स्वास्थ्य को बनाए रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि हवा में बढ़ी हुई नमी फंगस, बैक्टीरिया और यीस्ट के विकास को प्रोत्साहित करती है, जिससे कई तरह की वेजाइनल डिजीज हो सकती है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता प्रभाकर कहती हैं कि मानसून के दौरान अचानक तापमान में होने वाला उतार-चढ़ाव इम्यूनिटी को प्रभावित करता है। इससे वेजाइना से जुड़ी कई बीमारियां भी होती हैं, जैसे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, खुजली-जलन, बार-बार पेशाब जाना, यीस्ट इंफेक्शन, वेजाइनल डिस्चार्ज आदि, इसलिए मानसून में विशेष रूप से अपनी पर्सनल हाइजीन का ख्याल रखना चाहिए और वेजाइनल इंफेक्शन से बचने के लिए रोजाना साफ-सफाई करते रहना चाहिए। आइए जानें वेजाइनल इंफेक्शन से बचने के टिप्स।

प्राइवेट एरिया को रखें ड्राई

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हमारे प्राइवेट एरिया में पहले से ही नमी अधिक होती है और मानसून में ह्यूमिडिटी बढ़ जाने के कारण, वेजाइना को साफ रखना ज्यादा जरूरी हो जाता है। टॉयलेट जाने के बाद खासतौर पर आप वेजाइना को साफ रखें। नियमित रूप से टॉयलेट पेपर या किसी साफ कपड़े से अपने प्राइवेट एरिया को आगे से पीछे की ओर अच्छी तरह से साफ करें। गीलापन होने से बैक्टीरिया की ग्रोथ बढ़ सकती है, इसलिए कोशिश करें कि वो जगह एकदम साफ और ड्राई हो।

डूशिंग करने से बचें

हममें से अधिकांश महिलाएं सोचती हैं कि टॉयलेट के बाद जेट से अपनी वेजाइना को साफ करने का मतलब है वेजाइना की साफ-सफाई। मगर इससे हमारी वेजाइना के अच्छे बैक्टीरिया भी खत्म हो जाते हैं। आप जब भी प्राइवेट एरिया को साफ करें तो बिना खुशबू वाले नॉर्मल साबुन और साफ पानी का इस्तेमाल करें। वहीं पीरियड्स के दिनों में हर 4 घंटे में अपना पैड बदलें और दिन में दो बार अपने प्राइवेट एरिया को पानी से धोएं। सेंटेड वाइप्स से एकदम दूर रहें। उनसे अपने प्राइवेट एरिया को साफ करने से इंफेक्शन की समस्या बढ़ सकती है। 

टाइट कपड़े और इनरवियर पहनने से बचें

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टाइट पैंटी और जीन्स या शॉर्ट पहनने से उस एरिया में नमी बढ़ेगी और वेंटिलेशन नहीं होगा। इससे प्राइवेट एरिया पर ज्यादा पसीना आता है, जिस वजह से रैशेज और यूटीआई की समस्या हो सकती है। गीली पैंटी या कपड़े नमी के स्तर को बढ़ा सकते हैं जिससे जांघ की भीतरी सतह पर फ्रिक्शन की वजह से रेडनेस हो सकती है। मानसून के दौरान खासतौर पर कॉटन की पैंटी पहनें, इससे हवा आर-पार होगी और यह स्किन की जलन और रैशेज की संभावना को कम करती है।

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खुद को रखें हाइड्रेटेड

ऐसा देखा गया है कि मानसून के दौरान हमारी पानी पीने की इच्छा भी कम हो जाती है, जिसके कारण भी वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है। इस दौरान खुद को जितना हो सके उतना हाइड्रेटेड रखें। कम से कम 3-4 लीटर पानी जरूर पीएं, इससे आप हाइड्रेटेड भी रहेंगी और यह आपके शरीर से टॉक्सिन को निकालकर आपकी वेजाइना के पीएच बैलेंस को मेंटेन करेगा। बरसात के मौसम में होने वाले यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की रोकथाम में भी मदद मिलेगी।

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ज्यादा मिर्च मसाला वाला खाना खाने से बचें

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मानसून के दौरान हमारा मन कुछ चटपटा और तीखा खाने का करता है। ऐसे में यह आपके वेजाइना के पीएच लेवल को प्रभावित करता है। स्पाइसी फूड खाने से आपको जलन और खुजली की समस्या हो सकती है। अधिक मिर्च और मसाले वाले खाद्य पदार्थ खाने से वल्वा में जलन हो सकती है। इसके साथ ही वेजाइनल डिस्चार्ज और स्मेल की समस्या भी हो सकती है। दरअसल, हमारी वेजाइना का पीएच एसिडिक होता है, जो उसे संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसमें मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया कई चीजों को बैलेंस्ड रखते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ इस नाजुक संतुलन को खराब कर सकते हैं, जिस वजह से वेजाइना से गंदी बदबू भी आने लगती है।

अगर आप भी किसी इंफेक्शन से गुजर रही हैं, तो इन बातों का ख्याल रखें और अपनी हाइजीन का पूरा ध्यान रखें। इंफेक्शन बढ़ जाने की स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें। ऐसे अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।

 

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