Menopause एक लेडी की लाइफ में आने वाला defining period है। यह ना केवल लेडी के हार्मोन सिस्‍टम बल्कि हार्ट हेल्‍थ पर भी असर करता है। Menopause के बाद तीन में से एक महिला को हार्ट की प्रॉब्‍लम होती हैं। महिलाओं में हार्ट अटैक बढ़ने की संभावना menopause के लगभग 10 साल बाद देखी जाती है। डॉक्‍टरों ने इसे फीमेल हार्मोन, एस्‍ट्रोजन के लेवल में कमी के साथ जुड़ा हुआ पाया है।

Menopause के बाद एक लेडी की बॉडी में कई बदलाव आते हैं। ब्‍लड प्रेशर और एलडीएल या खराब कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ता है, जबकि एचडीएल या अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल में गिरावट आती है। वीएलडीएल और ट्राइग्लिसराइड का लेवल भी बढ़ता है। यह सभी परिवर्तन menopause के बाद की स्‍टेज में एस्‍ट्रोजन के लो लेवल के कारण होता है। Homeopathy Specialist Dr Jaswant Patil के अनुसार, ''ऐसा माना जाता है कि एस्‍ट्रोजन हार्ट डिजीज से लेडी को सेफ रखता है और menopause के बाद हार्मोन का कम उत्‍पादन हार्ट डिजीज के प्रति महिलाओं को कमजोर बनाता है। लेकिन menopause के बाद कुछ आसान टिप्‍स को अपनाकर ले‍डीज हार्ट डिजीज से बच सकती हैं।'' आइए Dr Jaswant Patil से जानें ऐसे ही कुछ टिप्‍स।

हार्ट हेल्‍दी डाइट 

पुरानी कहावत है शायद आपने सुनी भी होगी कि रोजाना अपनी डाइट में नौ फ्रेश फ्रूट और वेजिटेबल को शामिल कर आप हार्ट डिजीज से बच सकती हैं। इसमें डार्क कलर की के फूड जैसे ब्‍लूबेरी, पपीता, बैंगन, अंगूर, ब्रोकली, गोभी, फूलगोभी आदि ऐसे ही फ्रूट और वेजिटेबल हैं।
साथ ही अपनी डाइट में फाइबर से भरपूर फूड जैसे होल ग्रेन, फलियां जैसे सेम और मटल शामिल करें। ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड से भरपूर होने के कारण फिश भी हार्ट हेल्‍थ के लिए बहुत अच्‍छी होती है। और कुछ तरह के बीज और ड्राई फ्रूट जैसे अखरोट, बादाम, तिल, अलसी और कद्दू के बीज भी हार्ट के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके अलावा अपनी डाइट में हार्ट-हेल्‍दी ऑयल जैसे ऑलिव-ऑयल, सरसों और एवोकाडो ऑयल का इस्‍तेमाल करें और अपनी डाइट में शुगर और सोडियम कम मात्रा में लें।

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एक्‍सरसाइज, एक्‍सरसाइज और एक्‍सरसाइज

एक्‍सरसाइज की importance को बहुत कम लेडीज जानती हैं। रेगुलर एक्‍सरसाइज करने से हार्ट की मसल्‍स हेल्‍दी और स्‍ट्रांग होती है, और हार्ट को पंपिंग करने की capacity में सुधार होता है। रेगुलर एक्‍सरसाइज और एक्टिविटी करने से हार्ट के अलावा कई अन्‍य जोखिम कारकों को कम करने में हेल्‍प मिलती है। यह ब्‍लड प्रेशर को कम करता है, लिपिड प्रोफाइल में सुधार करता है, तनाव कम करता है, एक ideal वेट बनाए रखने में हेल्‍प करता है और ब्‍लड शुगर के लेवल में सुधार करता है।
एरोबिक एक्‍सरसाइज हार्ट को हेल्‍दी रखने वाली सबसे अच्‍छी एक्‍सरसाइज है। इसलिए अपने डेली शेड्यूल में कम से कम 45-50 मिनट की एरोबिक एक्‍सरसाइज को शामिल करने का प्रयास करें। यह एक्‍सरसाइज ब्रिस्‍क वाकिंग, रनिंग, साइकिलिंग, स्‍वीमिंग, डासिंग हो सकती है।

लाइफ से स्‍ट्रेस दूर भगाएं

स्‍ट्रेस हार्ट डिजीज के विकास का मेन कारण है, विशेष रूप से menopause के बाद। स्‍ट्रेस कई तरह से हार्ट हेल्‍थ पर असर डालता है, जैसे ब्‍लड प्रेशर का बढ़ना, दिल की धड़कन, चिंता का बढ़ना और नींद की आदतों पर असर। इससे बचने के लिए आपको स्‍ट्रेस को दूर भगाने के असरकार तरीके ढूंढ़ने चाहिए। योग, मेडिटेशन, पढ़ना, म्‍यूजिक सुनना ऐसे तरीके है जो आपकी लाइफ से स्‍ट्रेस को दूर कर हार्ट को हेल्‍दी रखते हैं।

कभी खुद का चेक-अप भी कराएं   

मेनोपॉज के बाद, हार्ट डिजीज चुपके से आपकी लाइफ में आ सकता हैं। इस unwanted surprise से खुद को सेफ रखने के लिए, रेगुलर screenings और हार्ट को हेल्‍दी रखने के लिए चेक-अप की आदत डालें। इसमें लिपिड लेवल का आकलन करने के लिए ब्‍लड टेस्‍ट, रेगुलर ब्‍लड प्रेशर पर निगरानी, स्‍ट्रेस टेस्‍ट, इकोकार्डियोग्राम और इसी तरह के हार्ट स्क्रीनिंग टेस्ट शामिल हैं।

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स्‍मोकिंग ना बाबा ना

स्‍मोकिंग करने वाली महिलाओं में हार्ट डिजीज के विकसित होने की संभावना अधिक होती है। मेनोपॉज के बाद स्‍मोकिंग करने वाली महिलाओं में स्‍मोकिंग ना करने वाली महिलाओं की तुलना हार्ट अटैक होने का जोखिम दोगुना ज्‍यादा होता है। स्‍मोकिंग से ब्‍लड क्‍लॉट का खतरा बढ़ जाता है, धमनियों में लचीलापन कम होता है और एचडीएल कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर कम होता है। इसलिए कुछ बुरा होने से पहले आज से ही इस आदत को छोड़ दें। ऐसा करने से हार्ट डिजीज के विकास की संभावना कम लगभग आधी हो जाती है।

ये ऐसे कुछ टिप्‍स हैं जिन्‍हें अपनाने से आप मेनोपॉज के बाद हार्ट डिजीज के विकास को रोक सकती है, इसके अलावा हर साल अपने हार्ट का चैकअप करवाना ना भूलें क्‍योंकि इससे आपको डिजीज को रोकने और जल्‍द पता लगाने में हेल्‍प मिलती है। याद रखें, सही लाइफ स्‍टाइल में परिवर्तन करके हार्ट डिजीज को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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